परिचय अमरूद को उष्ण का सेब' कहा जाता है। इसकी काश्तकारी उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु में सफलतापूर्वक की जाती है। अमरूद का फल स्वादिष्ट एवं पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन 'सी' सर्वाधिक मात्रा में पाया जाता है। अमरूद को अधिक पी-एचक उगाया जा सकता है। इसके कलमी पौधों में फलत दुसरे वर्ष प्रारंभ हो जाती है तथा 3-4 वर्ष में मरूद के फल का उपयोग ताजा खाने एवं प्रसंस्करित रूप में उपयोग में लाया जाता है। देश के कुल फल उत्पादन में अमरूद का हिस्सा लगभग 5 प्रतिशत है। वर्ष 2016-17 के आंकड़े के अनुसार भारत में कुल 3.65 मिलियन टन अमरूद का उत्पादन 2.62 हैक्टर क्षेत्रफल से हुआ था। उत्तर प्रदेश, अमरूद उत्पादन में शीर्ष स्थान पर है। यहां 48,698 हैक्टर क्षेत्रफल में इसकी खेती की जाती है, जिसमें 9,14,350 मीट्रिक टन उत्पादन होता है तथा औसत उत्पादकता 18.78 टन प्रति हैक्टर है (राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, वर्ष 2016-17) अमरूद का फल वर्षभर उपलब्ध रहता है। भारत में इसकी तीन मुख्य बहार सारणी-1 में दर्शायी गयी हैं। शरद ऋत में फल का आकार एवं भार - आकर्षक होता है, कुल घुलनशील ठोस,अम्ल शर्करा संतुलन सर्वोत्तम होता है। इस समय फल मक्खी का प्रकोप भी नहीं होता। है। जाड़े या मृग बहार में उत्पादित फल ऊंचे दाम पर बेचा जाता है और कृषक को अधिक लाभ होता है। अमरूद में फलों के आकार, भार, गठन एवं फल मक्खी से मुक्त फल की अधिक कीमत मिलती है। भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ में किये गये प्रयोग में पाया गया कि यदि फलों की थैलाबंदी कर दी जाये तो इनकी गुणवत्ता में गुणात्मक वृद्धि हो जाती है। इससे फल को अधिक दाम में बेचकर कृषक ज्यादा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। थैलाबंदी की विधि अमरूद में थैलाबंदी के लिए 18 x 24 सें.मी. माप का अखबार, ब्राउन पेपर बैग या बटर पेपर बैग का प्रयोग किया जाता है। भारत के अधिकतर भागों में अमरूद की जाड़े या मृग बहार की फसल ली जाती है। इसके फलों की थैलाबंदी के लिए उपरोक्त माप का पेपर बैग लेकर फल टिकाव के 25-35 दिनों के बाद या 20-25 मि. मी. के आकार के फलों की सितंबर में थैलाबंदी की जाती है। फल को बैग पहनाकर धागे की सहायता से बांध दिया जाता है। अखबार का पेपर थैला/बैग, सस्ता तथा सुलभ होता है। यदि पेपर बैग बरसात में खराब हो जाये तो नया बैग बदल देना चाहिए। पेपर बैग के प्रयोग से फल द्वारा वाष्पीकृत पानी निकल जाता है तथा वायु संचार पर्याप्त रहता है, जिससे फल खराब नहीं होते हैं। बैग का प्रकार फल थैलाबंदी के लिए कई तरह के बैग जैसे-पार्चमेंट पेपर बैग, नेटेड फोम ट्यूब बैग, कागज, पॉलीबैग, न्यूजपेपर आदि को व्यावसायिक स्तर पर उपयोग कियाजाता है। पॉलीबैग को नेटेड फोम ट्यूब के साथ प्रयोग किया जाता है। पॉलीबैग को सामान्यतः दोनों कोनों पर काट दिया जाता है, जिससे पानी आदि थैले से बाहर निकल जायें। फल की तुड़ाई अमरूद का फल 140-150 दिनों बाद पककर तैयार होता है। फल जब पूर्ण रूप से पक जाता है तथा इसका रंग हरे से हल्का पीला होने लगता है, तब माना जाता है कि यह अब तुड़ाई के लिए तैयार है। अमरूद की तुड़ाई सुबह-सुबह कर फलों को बैग से निकालकर डिब्बाबंदी कर इनका विक्रय किया जाता है। फल की थैलाबंदी फलों की थैलाबंदी उचित समय पर करनी चाहिए। अमरूद के मृग बहार के वृक्षों में फल लगने के 30-40 दिनों बाद अर्थात फल का आकार 35 x 32 मि.मी. (लंबाई x चौड़ाई) होने पर इसको कागज के लिफाफे में बंद करने की प्रक्रिया को फलथैलाबंदी कहा जाता है। इस तकनीक का उपयोग आज अधिकतर फलों जैसे-आम, अमरूद, लीची आदि में सफलतापूर्वक किया जाता है। पंजाब, दिल्ली, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा एवं दक्षिण भारत के आम एवं अमरूद उत्पादक इस तकनीक का व्यावसायिक ढंग से प्रयोग कर रहे हैं। इस तकनीक के प्रयोग से फल की गुणवत्ता जैसे अधिक आकर्षक एवं फल पर एकसमान रंग का विकास होता है। इससे फलों पर कीटों आदि द्वारा नुकसान एवं संक्रमण का प्रकोप कम हो जाता है। फल की गुणवत्ता थैलाबंदी किया गया फल आकार में बडा एवं आकर्षक होता है। सामान्यतः मृग बहार का फल 180-350 ग्राम तक होता है। ललित किस्म का फल पीला,बड़े आकार का दाग एव धब्बारहित होता है। फल लिफाफे के अंदर बंद होने के कारण अंदर तापमान कम होता है तथावाष्पोत्सर्जन द्वारा कम पानी का ह्रास होता है, इस कारण फल अधिक भार वाला होता है। थैलाबंद फल में विटामिन 'सी' की मात्रा भी अधिक होती है। बरसात के दौरान फलों पर अधिकतर एंथेक्नोज के धब्बे पड़ जाते हैं, जो इसकी गुणवत्ता को कम कर देते हैं। थैलाबंदी से फल की वृद्धि के दौरान फल को किसी तरह की चोट से बचाया जा सकता है और फल की गुणवत्ता भी उत्तम होती है। फल की थैलाबंदी के लिए बैग की कीमत 20-60 पैसे/बैग होती है तथा एक श्रमिक सामान्यतः 500-600 फलों की थैलाबंदी कर सकता है। एक दिन में सामान्यतः प्रति बैग लगाने का खर्च 1-1.50 रुपये प्रति फल होता है। प्रति कि.ग्रा. फल का दाम 80-100 रुपये होता है, जबकि बिना थैलाबंदी का फल रुपये-30-40/ कि.ग्रा. की दर से बेचा जाता है। इस प्रकार यदि कृषक इस तकनीक का प्रयोग करते हैं, तो 3-4 गुना अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं। अमरूद का थैलाबंदी किया गया फल सामान्यतः 140-150 दिनों में तैयार हो जाता है। अखबार के बैग से थैलाबंदी सस्ती पड़ती है, लेकिन 3-4 वर्षा के उपरांत फटने की आशंका रहती है। परिपक्व फल पूर्ण आकार ले लेता है और बैग के ऊपर से देखकर इसके तैयार होने का अंदाजा लग जाता है। कई स्थानों पर अमरूद का रंग पीला होने पर तुड़ाई की जाती है। इस तरह का फल तुरंत खाने योग्य होता है. परन्तु इसकी भण्डारण क्षमता कम होती है। अमरूद का परिपक्व फल हल्का हरा या हरा-पीला दिखने पर तोड़ने की सबसे उत्तम अवस्था है। अखबार या अन्य पेपर बैग में तुड़ाई पूर्व थैलाबंदी से फल की गुणवत्ता अधिक होती है तथा फल चिकना, एक तरह का हल्का पीला रंग तथा जाडे में फल पर लाल रंग की आभा भी बन जाती है। पेपर थैलाबंदी से फल की उत्तम गणवत्ता. बैग के अंदर सूक्ष्म जलवायु के परिवर्तन के कारण होती है। फल थैलाबंदी तकनीक किसानों के लिए इको फ्रैंडली एवं कम खर्च में गुणवत्ता सुधार के लिए सर्वोत्तम है। सारणी 1. अमरूद की मुख्य बहार बहार पुष्पण फल की उपलब्धता मृग बहार जुलाई-अगस्त नवंबर-जनवरी अम्बे बहार मार्च-अप्रैल जून-जुलाई हस्त बहार सितंबर-अक्टूबर मार्च-अप्रैल सारणी 2. अमरूद के थैलाबंद फल की गुणवत्ता क्र. सं. गुण अमरूद की थैलाबंदी फलकिस्म ललित अमरूद की थैलाबंदी फलकिस्म श्वेता बिना थैलाबंदीकिया हुआ फल 1 फल का भार (ग्राम) 190-325 170-320 160-175 2 2 लंबाई (मि.मी.) 65-73 6.5-8.0 53 3 3 चौड़ाई (मि.मी.) 73-84 7.0-8.8 56-68 4 4 कुल घुलनशील ठोस डिग्री ब्रिक्स _ 9-11 10-11 8-10 5 ए' ग्रेड फलों की संख्या (प्रतिशत में) 60-75 180-195 30-40 6 एस्कार्बिक अम्ल (मि.ग्रा./100 ग्राम फल) 178-190 0.19-0.25 110-165 7 ट्राइट्रेबल एसिडिटी (प्रतिशत) 0.20-0.27 65-75 0.28-0.37 8 लाभ-लागत का अनुपात 1:5 5-10 1:2.7 प्रधान वैज्ञानिक, फसल उत्पादन प्रभाग, भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ-227101 (उत्तर प्रदेश) कंचन कुमार श्रीवास्तव,और दिनेश कुमार