सदाबहार आम श्रीकृष्ण सुमन (55 वर्ष) ने आम की एक ऐसी नई किस्म विकसित की है, जिसमें नियमित तौर पर पूरे वर्ष फल लगते हैं। आम की इस प्रजाति को 'सदाबहार' नाम दिया गया है। यह किस्म ज्यादातर प्रमुख रोगों से मुक्त है। इसका फल स्वाद में ज्यादा मीठा और लंगड़ा आम जैसा होता है। इस प्रजाति के पेड़ बौने कद के होते हैं और इसलिए किचन गार्डन में लगाने के लिए उपयुक्त हैं। इसका पेड़ काफी घना होता है और इसे कुछ वर्षों तक गमले में भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा इसका गूदा गहरा नारंगी रंग का और स्वाद में मीठा होता है। इसके गूदे में बहुत कम रेशा होता है, जो इसे अन्य किस्मों से अलग करता है। आम की 'सदाबहार' किस्म का विकास करने वाले किसान श्री सुमन ने कक्षा दो तक पढ़ाई करने के बाद स्कूल छोड़ दिया था। उनकी दिलचस्पी फूलों और फलों के बागान के प्रबंधन में थी, जबकि उनका परिवार सिर्फ गेहूं और धान की खेती करता था। उन्होंने यह जान लिया था कि गेहूं और धान की अच्छी फसल लेने के लिए कुछ बाहरी कारकों जैसे-बारिश, पशुओं के हमले से रोकथाम और इसी तरह की बातों पर निर्भर । रहना होगा और इससे सीमित लाभ ही मिलेगा। श्रीकृष्ण सुमन ने परिवार की आमदनी बढाने के लिए फूलों की खेती शुरू की। सबसे पहले उन्होंने विभिन्न किस्म के गलाबों की खेती की और उन्हें बाजार में बेचा। इसके साथ ही आम के पेड़ लगाने भी शुरू किये। वर्ष 2000 में श्रीकृष्ण सुमन ने बागान में आम के एक ऐसे पेड़ को देखा, जिसके बढ़ने की दर बहुत तेज थी एवं पत्तियां गहरे हरे रंग की थीं। उन्होंने देखा कि इस पेड़ में पूरे वर्ष बौर आते हैं। यह देखने के बाद उन्होंने आम की इस किस्म की पांच कलमें तैयार की। इस किस्म को विकसित करने में उन्हें लगभग 15 वर्षों का समय लगा। इस बीच उन्होंने कलम से बने इन पौधों का संरक्षण और विकास किया। श्री समन ने पाया कि कलम लगाने के बाद पेड़ में दूसरे ही वर्ष से फल लगने शुरू हो गए। इस नई किस्म को नेशनल इन्नोवेशन फाउंडेशन (एनआईएफ) इंडिया ने भी मान्यता दी हैं। एनआईएफ भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्तशासी संस्थान है। एनआईएफ ने भाकृअनुप-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु को भी इस किस्म का स्थल पर जाकर मूल्यांकन करने की सुविधा दी। इसके अलावा राजस्थान के जयपुर के जोबनेर स्थित एसकेएन एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने इसकी फील्ड टेस्टिंग भी की। आम की इस नई प्रजाति की, पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम तथा भाकृअनुप-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, नई दिल्ली के तहत पंजीकरण करवाने की प्रक्रिया चल रही है। एनआईएफ ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन में इस आम की किस्म का पौधा लगाने में भी सहायता की है। 'सदाबहार' किस्म के आम का विकास करने के लिए श्री श्रीकृष्ण सुमन को एनआईएफ का नौवां राष्ट्रीय तृणमूल नवप्रवर्तन एवं विशिष्ट पारंपरिक ज्ञान पुरस्कार दिया गया है और इसे कई अन्य मंचों पर भी मान्यता दी गई है।श्री श्रीकृष्ण सुमन को वर्ष 2017 से 2020 तक देशभर से और अन्य देशों से भी 'सदाबहार' आम के पौधों के 8000 से ज्यादाऑर्डर मिल चुके हैं। वे वर्ष 2018 से 2020 तक विभिन्न राज्यों को 6000 से ज्यादा पौधों की आपूर्ति कर चुके हैं। 500 से ज्यादा पौधे राजस्थान और मध्य प्रदेश स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों में वे खुद लगा चुके हैं। इसके अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के विभिन्न अनुसंधान संस्थानों को भी 400 से ज्यादा कलमें भेज चुके हैं।