जई उत्तरी/पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में जई हरे चारे में सभी पशुओं को अकेले या बरसीम के साथ 1 : 1 या 2 : 1 के अनुपात में मिलाया जाता है। इस क्षेत्र में सामान्यतया ज्वार, बाजरा, मक्का या मध्यम समय से पकने वाली धान के बाद खेती करते है। भूमि जई के लिए दोमट या भारी दोमट भूमि जहॉ जल निकास का उचित प्रबन्ध हो उपयुक्त है। भूमि की तैयारी प्रायः खरीफ की फसल के बाद जई की बुआई की जाती है। अतः पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से व दो तीन जुताइयां कल्टीवेटर से करके पाटा लगा लें। उन्नतिशील प्रजातियाँ प्रजातियॉ हरा चारा उपयुक्त क्षेत्र एकल कटाई केन्ट 400-475 सम्पूर्ण उ.प्र. ओ.एस.-6 450-500 सम्पूर्ण उ.प्र. बुंदेल जई-99-2(जे.एच.ओ. 99-2) 500-550 उ. प्र. का पश्चिम व पूर्वी क्षेत्र बहु कटाई केन्ट 450-500 सम्पूर्ण उ.प्र यू.पी.ओ. -212 450-500 सम्पूर्ण उ.प्र. बुंदेल जई-822 (जे.एच.ओ.-822) 450-550 उ. प्र. का मध्य मैदानी व बुंदेलखण्ड क्षेत्र बुंदेल जई-851(जे.एच.ओं 851) 450-500 सम्पूर्ण उ.प्र. बीज दर 1 कूडो में बुवाई समय से बुवाई पिछैती बुवाई 75-80 किग्रा./हे. 100-110 किग्रा./हे. 2 छिटकाव समय से बुवाई पिछैती बुवाई 110-115 किग्रा./हे. 120-125 किग्रा./हे. बुवाई का समय एवं विधि समय से बुवाई अक्टूबर का प्रथम पखवारा से नवम्बर का प्रथम पखवारा तक विलम्ब से बुवाई नवम्बर का अन्तिम सप्ताह तक कूडो में बुवाई 20 सेमी. पर लाइनों में करते है। बुवाई के बाद खेत को लम्बी-2 क्यारियो में बॉट लेते है। इससे बैला या ट्रैक्टर चालित मशीनों से भी कटाई सम्भव है। उर्वरक प्रति हे. 60 किग्रा.नत्रजन और 40 कि0ग्र. फास्फोरस अन्तिम जुताई के समय भूमि मे मिला दे। 20 कि.ग्रा. नत्रजन दो बार बराबर मात्रा में पहली बुवाई के 20-25 दिन बाद सिचाई के उपरान्त छिड़काव कर देना चाहिये तथा दूसरी मात्रा इसी तरह पहली कटाई के बाद देनी चाहियें। जिस भूमि मे सल्फर कम हो उसमें 20 किग्रा. सल्फर का प्रयोग अच्छी उपज देता है। सिचाई पलेवा करके खेत को तैयार करे। आगे की सिचाइयां लगभग एक माह के अन्तर पर करना चाहिये। कल्ले निकलने तथा फूल आने के समय सिचाई आवश्यक है। कटाई एकल कटाई के लिए 50 प्रतिशत फूल की अवस्था में। बहु कटाई के लिए पहली कटाई बोने के 50-55 दिन पर दूसरी कटाई 50 प्रतिशत बाली निकलने पर कटाई 8-10 सेमी. की जमीन के ऊपर करने से कल्ले निकलते है। बीज लेने के लिए पहली कटाई के बाद फसल छोड दे। उपज हरा चारा 50-55 टन/हे. यदि बीज उत्पादक करते है तो हरा चारा 25 टन लगभग बीज 15-20कु./हे. एवं भूसा 20-25 कु./हे. प्राप्त हो सकता है। फसल सुरक्षा आवृत कण्डुआं रोग बीज को 3 ग्राम थीरम या जिंकमैगनीज कार्बोनेट 2.5 ग्रा/कि. दर से उपचारित कर लेना चाहिेये। दीमक एक मात्र कीट दीमक लगता है। इससे बचाने के लिए क्लारोपायरीफास 2-3 ली./हे. की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करना चाहिए। स्त्राेत : पारदर्शी किसाना सेवा याेजना, कृषि विभाग, उत्तरप्रदेश।