भूमिका देश में पहले जेट्रोफा को जंगली अरण्डी के नाम से जाना जाता था | इसकी उपयोगिता एवं महत्व की जानकारी के अभाव में इसकी व्यापारिक तौर पर खेती नहीं की जा रही थी | परन्तु विगत वर्षो से इसका उपयोग बायोडीजल के रूप में होने के कारण यह केरोसिन तेल, डीजल, कोयला, जलौनी लकड़ी के विकल्प के रूप में उभरा है | जेट्रोफा की उपयोगिता इस पौधे का जैव ईंधन के अलावा आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने, औद्योगिक कच्चे माल के रूप में, जैविक खाद बनाने तथा अन्य कई रूपों में उपयोग होता है, जिनका विवरण नीचे दिया गया है – बायोडीजल (जैवईधन) बनाने के रूप में किसी भी पुन: नवीनीकरण योग्य जैव पुंज (रिन्यूवेबिल बायोमास) से तैयार ऐसा वनस्पति तेल जो पेट्रोलियम ईधन का विकल्प हो सकें, जैव डीजल कहलाता है | वास्तव में वनस्पतिक तालों को ईंधन के रूप में प्रयोग करने की अवधारणा कोई नयी नहीं है | डीजल ईंजन के आविष्कारक रुडोल्फ डीजल ने सन 1895 में वानस्पतिक तेल से चलने वाला पहला इंजन बनाया था | आज जेट्रोफा के बीजों से तैयार बायो डीजल इंजनों की बनावट में बिना किसी परिवर्तन के प्रयोग किया जाने लगा है | अमरीका व यूरोपियन देशों में 10-20 प्रतिशत बायोडीजल, पेट्रोलियम डीजल के साथ मिलाकर प्रयोग किया जा रहा है| भारतीय रेल ने दिल्ली से अमृतसर के बीच में जेट्रोफा बायोडीजल (5 प्रतिशत मिश्रित) डीजल तेल से शताब्दी एक्सप्रेस चलाकर तथा महिंद्रा एंड महिंद्रा कम्पनी ने अपने ट्रेक्टरों में बायोडीजल का प्रयोग सफलता पूर्वक परिक्षण करके दिखलाया है | दसवी योजना के अंत तक पेट्रोडीजल की मांग 52.33 मिलियन टन तक हो सकती है | यदि इस अवधि तक 5 प्रतिशत पेट्रो डीजल को जैविक डीजल में बदलना है तो उसके लिए 2.29 मिलियन हैक्टेयर जमीन पर जेट्रोफा का बीज उगाकर तेल निकालने की आवश्यकता है (तिवारी, 2003) | जेट्रोफा के तेल से बने डीजल में सल्फर की मात्रा बहुत ही कम होने के कारण इसको बायो-डीजल की श्रेणी में रखा गया है | जेट्रोफा के ज्वलन से उत्सर्जित गैसों में ग्रीन हाउस गैसों तथा कार्बन मोनोआक्साड के परिणाम में उल्लेखनीय कमी देखी गई है | जबकि खनिज डीजल से अत्यधिक मात्रा में उत्सर्जित ग्रीन हाउस गैसों से धरती के गर्म होने की एवं पर्यावरण प्रदूषण समस्या निरंतर बढ़ रही है | अत: जहाँ इसके बहुद्देशीय लाभ हैं वहीं इसके तेल का उपयोग करने से प्रर्यावरण प्रदूषण में कमी आएगी | जेट्रोफा से प्राप्त बायोडीजल एवं पेट्रोलियम डीजल के भौतिक व रासायनिक गुणों का तुलनात्मक विवरण निम्न प्रकार है – जेट्रोफा बायो डीजल तथा डीजल के विशिष्ट गुणों को तुलनात्मक सूची विशिष्ट गुण जेट्रोफा तेल के मानक गुण डीजल के विशिष्ट गुण स्पेसिफिक ग्रेविटी 0.9186 0.82/0.84 फ्लैश प्वाइन्ट (डिग्री सें.ग्रे.) 240/110 50 कार्बन रेसिड्यू 0.64 0.15 सीटेन नम्बर 51.0 50.0 डिस्टीलेशन प्वाइन्ट (डिग्री सें.ग्रे.) 295 350 काइनेटिक विस्कॉसिटी (सी.एस.) 50.73 2.7 सल्फर (%) 0.13 1.2 कैलोरिफिक (किलो कैलोरी/कि.ग्रा.) 9.470 10.170 पोर प्वाइन्ट (डिग्री सें.ग्रे.) 8 10 रंग 4.0 4 या 4 से कम जेट्रोफा उद्योगों में उद्योगों के लिए कच्चे माल के रूप में जेट्रोफा के तेल का उपयोग लुब्रिकेंट, रेजिन, पॉलिश, पेंट, वार्निश, साबुन, ऊन वाली गहरी नीली डाई, कपड़ा रंगने व मछली जाल को रंगने वाली डाई, तथा मोमबत्ती उद्योगों में होता है | पौधों के समस्त भागों में लसलसा (लेटेक्स) पदार्थ होता है जिसमें 15 (%), रेजिन युक्त पदार्थ होता हैं यह पदार्थ सूखने पर चमकीले लाल भूरे तथा भंगुर पदार्थ में परिवर्तित हो जाता है | यह पदार्थ लिनेन की रंगाई में प्रयोग होता है तथा छाल से प्राप्त 37 (%), टेनिन नोले रंग की डाई भी प्राप्त होती है | इसके बीजों में आर्दता (6.62%), प्रोटीन (18.2%), वसा (38.2%), फाईबर (15.5%), राख (5.0%), तथा कार्बोहाइड्रेट (18.0%), पाया जाता है | जेट्रोफा के बोजों में तेल की मात्रा 30-40% तथा गिरी में 50-60% पाया जाता है | इसके तेल से प्लास्टिक तथा सिंथेटिक फाइबर के लिए भी कच्चा माल तैयार किया जाता है | चीन में इसके तेल को लौह भस्म के साथ छानकर एक विशेष प्रकार की वार्निश बनाई जाती है | जेट्रोफा औषधियों में जेट्रोफा चिकित्सा के क्षेत्र में भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें जट्रोफीन नामक तत्व पाया जाता है, जिसमें कैंसर प्रतिरोधी क्षमता होने के कारण इसका उपयोग कैंसर सम्बन्धी औषधियों में किया जाता है | इसके तेल का उपयोग त्वचीय रोगों जैसे दाद, खाद-खुजली, गठिया लकवा आदि में भी किया जाता है | इसके दूध से असाध्य जख्म भर जाते हैं तथा सर्प दंश दूर होता है | इसकी नर्म टहनियों की दातून से दंत रोगों में तथा मसूड़ों की सुजन दूर होती है | जावा में इसके रस का उपयोग गठिया तथा पेट संबधी रोगों में किया जाता है | इसकी पत्ती के रस का उपयोग बवासीर के उपचार के अलावा बच्चों की जीभ में छालों की जलन को कम करने में भी किया जाता है | नरम टहनियों तथा छाल के रस द्वारा घावों व फुन्सी-फोड़ों की सफाई करने में भी इसका प्रयोग होता है | छाल के काढ़े द्वारा जोड़ों के दर्द तथा कुष्ठ रोगों को ठीक किया जा सकता है | इसके फल व बीजों में गर्भ निरोधक गुण भी पाए जाते हैं | विभिन्न देशों व क्षेत्रों में इसका प्रयोग अलग-अलग रोगों को ठीक करने में किया जाता है | जावा में इसके तेल को बाल बढ़ाने के उद्देश्य से तथा इसके पौधे के रस को खून बंद करने (हीमोस्टोटिक) के लिए प्रयोग किया जाता है | ट्रावनकोर में इसके बीजों को जलाकर शीरे में मिला लिया जाता है | जो पेट दर्द व सर्प दंश में उपचार हेतु काम आता है | कोंकण में इसकी छाल को हींग व छाछ में घिसकर बनाए पेस्ट को निर्जलीकण तथा अपच में प्रयोग करते हैं | ब्राजील में इसके बीजों को नारियल के तेल में पीसकर चूहों को मारने के लिए तथा कुछ अन्य देशों में पत्तियों को जलाकर धुएँ से खटमल मारने के लिए इसका कोट नाशक के रूप में प्रयोग किया जाता है | अत: इसका उपयोग एंटी-वायरल, एंटी-ट्यूमरल, अल्सर, पेट दर्द, सिर बाल वृद्धि कारक तथा काली डाई आदि के रूप में किये जाने से यह बहुद्देशीय पौधा कहलाता है | जेट्रोफा कृषि-वानिकी में कृषि-वानिकी में आज किसानों की मुख्य समस्याएं है किकृषि जोत बहुत ही छोटी होती जा रही हैं और उनके पढ़े-लिखे युवक बेरोजगार घूम रहे हैं | कम जोत में अनाज, चारा, ईंधन लकड़ी, रेशा इत्यादि की जरूरतें किसान भाईयों द्वारा आपूर्ति बहुत असम्भव है अत: बहुद्देशीय जेट्रोफा जैसे बायोडीजल पौधे को उगाकर किसान भाई इनके पौधों के बीच में शुरूआती 2-3 वर्षों तक कई प्रकार की फसलें उगा सकते हैं तदोपरान्त छाया पसंद करने वाली फसलों को इनके साथ उगाकर किसान भाई अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ अपने नवयुवकों को रोजगार के नए अवसर भी खोल सकते हैं | जेट्रोफा जैविक खाद के रूप में जेट्रोफा के बीजों पर आम के आम, गुठलियों के दाम वाली कहावत चरित्तार्थ होती है अर्थात बीजों का तेल निकालकर कई प्रकार के कार्यों में उपयोग किया जाता है जैसे बची हुई खली जैविक खाद के रूप में सीधे खेतो में या बायोगैस बनाकर बची स्लरी ले रूप में प्रयोग की जाती है | इसकी खाद में नाइट्रोजन (4.44 प्रतिशत), फास्फोरस (2.9 प्रतिशत) तथा पोटेशियम (1.68 प्रतिशत) काफी प्रचुर मात्रा में पायी जाती है | इसके पोषक तत्व अन्य जैविक खादों की अपेक्षाकृत काफी उच्च मात्रा में उपलब्ध हैं | इसका तुलनात्मक विवरण निम्न प्रकार है – खाद नाइट्रोजन (%) फास्फोरस (%) पोटैशियम (%) जेट्रोफा कर्कस 4.44 2.09 1.68 गाय का गोबर 0.97 0.69 1.66 मुर्गी के बीट से प्राप्त खाद 3.04 6.27 2.08 भूसे की खाद 2.37 2.10 1.09 बत्तख के बीट से प्राप्त खाद 0.81 0.81 0.68 जलकुम्भी की खाद 1.43 0.46 0.48 शहरी मलवाहित खाद 1.25 0.25 0.65 करंज की खली 4.00 1.00 1.00 नीम की खली 5.00 1.00 1.50 स्रोत: पाटिल एवं सिंह (1991) देश की विदेश मुद्रा की बचत में हमारे देश की आर्थिक व्यवस्था मशीनीकरण के ऊपर निर्भर है और मशीनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों का होना बहुत ही आवश्यक है | देश की आवश्यकता का लगभग 70% पेट्रोलियम तेल खाड़ी देशों से आयात करना पड़ता है जिसके बदले में लगभग 1,10,000 रुपए वार्षिक खर्च करना पड़ता है या बदले में खाद्य पदार्थ की वस्तुएं उन देशों के मनमाने ढंग से सस्ती कीमत पर निर्यात करनी पड़ती हैं | परीक्षणों द्वारा सिद्ध हो चुका है कि 20% तक बायो डीजल की मात्रा शुद्ध डीजल में मिश्रित करने पर डीजल इंजनो में किसी परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती | तेल आयात पर खर्च होने वाली धन राशि का 5% बायो डीजल प्रयोग करके लगभग 4,000, 10% प्रयोग करके लगभग 8000 तथा 20% प्रयोग करके 16000 करोड़ रुपए सालाना बचा सकते हैं | जेट्रोफा जैसी फसल को मौजूदा कृषि योग्य भूमि की बिना किसी हस्तक्षेप किए व्यर्थ पड़ी भूमियों जिनमें पार्थोनियम (कांग्रेस) घास खड़ी है, ऊँची-नीची पहाड़ी क्षेत्र की भूमियाँ तथा बंजर भूमियाँ व रेगिस्तानी रेतीले टीले इत्यादि जिनमें अन्य कृषि फसलें सम्भव नहीं हैं, में उगाकर बायो डीजल की उक्त मात्रा पैदा की जा सकती है | कृषि आधारित व्यवसाय को बढ़ाने में जेट्रोफा बहु उपयोगी पौधा होने के कारण इसके पौधों के बीच में पुष्पों की खेती करके मधुमक्खी पालन आसानी से किया जा सकता हैं इसके अलावा इसकी पत्तियों पर टसर सिल्क के बड़ी आसानी से पालकर सिल्क उद्योग को बढ़ावा मिलता है | तेल निकालने के बाद बची खली से बायो गैस का संयत्र चलाकर बायोगैस बनाई जा सकती है जो उजाला करने, खाना बनाने तथा डीजल इंजन में मिलाकर भी प्रयोग में लाई जा सकती है | इसकी छाल से रंग उद्योग व वार्निश उद्योग को बढ़ावा मिलता है | इसके जहरीले प्रभाव के कारण इससे जैव कीटनाशक दवाइयां भी बनाई जा सकती हैं | बाढ़ एवं आंधी रोकने के रूप में यह खेत के चारों तरफ बाढ़ के रूप में उगकर कृषि फसलों व बगीचों को जंगली जानवरों एवं आंधी-तूफ़ान से होने वाली हानि को रोकता है | नील गाय जैसा भयंकर जानवर भी इसकी बाढ़ के बड़े हो जाने पर खेतों में प्रवेश नहीं कर सकता है परन्तु बाढ़ एक दम ठसी हुई (घनी) होनी चाहिए | हरित पट्टी के रूप में इसके पौधों की गर्मी व सूखा वाले क्षेत्रों में उगने की क्षमता के कारण कारखानों एवं फैक्ट्रियों के बाहर हरित पट्टियों में उगाया जा सकता है | इसकी पत्तियाँ सूखा पड़ने पर भी हरी बनी रहती है | इसी विशेषता के कारण यह व्यर्थ भूमियों में भी हरियाली देता है | भूंसरक्षण के लिये हितैषी इस पौधे की जड़ों के भारी फैलाव रखने के कारण मिट्टी को पकड़ने की क्षमता अधिक है परिणामस्वरूप यह पौधा भूमि कटाव को रोकता है तथा मिट्टी के न बहने देने के कारण बाढ़ को आने से रोकने में अपरोक्ष रूप से सहायता करता है| जेट्रोफा तेल निकालने के उपरांत अन्य उत्पाद (बाई प्रोडक्ट) का सदुपयोग मीठी ज्वार, चुकन्दर इत्यादि फसलों से तैयार एथेनोल के अलावा बचे अन्य उत्पादकों को उपयोग में लाना एक बड़ी समस्या है परन्तु जेट्रोफा के बोजों से तेल निकालने के बाद बचे अन्य उप्पादों जैसे खली का जैविक खाद के रूप में एवं बायो गैस के रूप में गाँवों में काफी माँग है इसके छिलकों से जैव कोयला तैयार किया जा सकता है | इसके पौधे से निकाले गए सफेद दूध (लेटेक्स) से पौध विषाणु बीमारी रोकने की औषधि तथा रंजक में इसके वसीय अम्लों से साबुन व मोमबत्ती निर्मित किए जाते हैं| साबुन फैक्टरी से बची ग्लिसरीन की बहुत मांग है जो अनेक प्रकार के काम आती है | वातावरण संतुलन में अहम भूमिका भारत जैसे गर्म जलवायु वाले देश में 30 प्रतिशत भू भाग में वनवृक्षों से आच्छादित रहना चाहिए जबकि मौजूदा हालात में यह 22 प्रतिशत से भी कम है| जेट्रोफा का रोपण देश की हरित पट्टी बढ़ाने में एक आदर्श सिद्ध हो सकता है यह पौधा वायुमण्डल में उपस्थित कार्बनडाई आक्साइड (हानिकारक गैस) को अधिक मात्रा में शोषित करके प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा वायुमण्डल में आक्सीजन अधिक मात्रा में उत्सर्जित करने में सक्षम है | जिससे वातावरण में संतुलन बना रहता है अर्थात यह हानिकारक गैसों को कम करके प्राणवायु आक्सीजन को बढ़ावा देता है | उच्च घनत्व ऊर्जावान पौधरोपण यह व्यर्थ एवं सामुदायिक भूमियों में उच्च घनत्व ऊर्जा वान पौधा है जो कम समय में अधिक उत्पादन देता है एवं व्यर्थ पड़ी भूमियों से अधिक ऊर्जा उत्पादन करके अधिक धन तथा रोजगार सृजन में हितकारी है | बायो डीजल की राष्ट्रीय नीति का उच्च ऊर्जा उत्पादन वाला पौधा यह पौधा बायोडीजल की राष्ट्रीय नीति के तहत अधिक बढ़ावा मिलने वाला पौधा है क्योंकि इस पौधे से कम समय में अधिक लाभ प्राप्त होता है | इसकी मांग एवं शुद्ध लाभ अत्याधिक है | इसके अलावा यह पौधा विभिन्न कृषि पद्धतियों फल वृक्षों, औषधीय पौधों, सब्जी वाली फसलों, तिलहन एवं दलहन सभी फसलों के साथ पर्यावरर्णीय मित्रवत बना रहता है | विषम परिस्थितियों में आसान कृषिकरण इस पौधे को विषम परिस्थियों में भी उगाया जा सकता है जैसे मानसून समय पर न आना, बीच में मानसून का खाली रह जाना तथा मानसून का शीघ्र भाग जाना एवं लम्बा सूखा पड़ जाना इत्यादि | इसकी लागत बहुत ही कम रहती है तथा उगाने के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं पड़ती है | इसे पशु व जंगली जानवर नहीं खाते हैं | स्रोत: राष्ट्रीय तिलहन एवं वनस्पति तेल विकास बोर्ड,कृषि मंत्रालय, भारत सरकार