<h3 style="text-align: justify;">स्टीविया का जमाना है <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;"><img class="image-right" title="Stiviya" src="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/agriculture/crop-production/91593e93094d92f92a94d93092393e93293f92f94b902-91593e-938902915941932/91493792794092f-92a94c92794b902-915940-916947924940/91d93e93091692394d921-92e947902-91493792794092f-90f935902-93894191790292794092f-92a94c92794b902-915940-93594d92f93593893e92f93f915-916947924940/stivya.jpg/@@images/49fcac3e-c5db-4bfd-9096-f7751ffdd216.jpeg" alt="Stiviya" width="232" height="154" /></p> <p style="text-align: justify;">स्टीविया एक औषधीय पौधा है। इसकी पत्तियाँ चीनी से 25-30 गुणा मीठी होती है। तथा पत्तियों से निकाली गई चीनी सामान्य चीनी से 300 गुणी मीठी होती है। यह मूल रूप से पेरूग्वे में पाया जाता है और विश्व में इसकी खेती पेरूग्वे, जापान, कोरिया, ताइवान, अमेरिका इत्यादि देशों में होती है। भारत के विभिन्न भागों जैसे बंगलोर, पुणे, इंदौर व रायपुर में इसकी खेती हो रही है।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्रश्न: इसे किन रोगों में उपयोग किया जाता है?<strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;"><strong>उत्तर</strong>: स्टीविया की उपयोगिता इसमें पाए जाने वाले मिठास के कारण होती है। यह न केवल सामान्य शक्कर से ज्यादा मीठी है बल्कि यह पूर्णतया कैलोरी रहित भी है जिससे न केवल मधुमेह रोगियों के लिए शक्कर के विकल्प के रूप में इसका उपयोग सुरक्षित है बल्कि रक्तचाप, मसूड़ों में होने वाली बीमारियों, चर्म विकारों तथा एन्टी वैक्टीरियल भी है।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्रश्न: किसान भाई इसकी खेती कैसे करें?<strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;"><strong>उत्तर</strong>: इसकी खेती झारखंड के सभी हिस्सों में की जा सकती है। अर्धआर्द्र एवं अर्ध उष्ण किस्म की जलवायु इसके लिए उपयुक्त है। यह 10 डिग्री सेल्सियस से 40 डिग्री सेल्सियस तक के जगहों में उपजाया जा सकता है। अच्छी जल निकास वाली रैतीली दोमट मिट्टी जिसका पी.एच.6.0 से 8.0 तक हो उपयुक्त मानी जाती है।</p> <p style="text-align: justify;">स्टीविया का रोपन कलमों से किया जाता है जिसके लिए 15 सेंटीमीटर लम्बी कलमों को काटकर पौलिथिन की थैलियों में तैयार कर लिया जाता है। टिसु कल्चर से भी पौधों को बनाया जाता है जो सामान्यत: 5-6 रूपये प्रति पौधे मिलते हैं।</p> <p style="text-align: justify;">स्टीविया का रोपन मेड़ों पर किया जाता है जिसके लिए लगभग 9 इंच ऊँचे बेड्स पर पौधे पंक्ति से पंक्ति 40 सेंटीमीटर तथा पौधों से पौधे 15 सें.मी. की दूरी पर लगाते हैं। एक एकड़ में 30,000 पौधे लगाये जाते हैं। लगाने का उपयुक्त समय फरवरी-मार्च है।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्रश्न: इनकी उन्नत किस्मों एवं खाद के बारे में बताएं?<strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;"><strong>उत्तर</strong>: इनकी उन्नत किस्में एस.आर.बी. 123, एस आर बी 128 एवं एस आर बी 512 है। एस. आर.बी. 128 में ग्लुको साइडस की मात्रा 21 प्रतिशत, एस. आर.बी. 123 में 9-12 प्रतिशत और एस.आर.बी. में बी 9-12 प्रतिशत पायी जाती है।</p> <p style="text-align: justify;"><a href="../../../../../../../agriculture/crop-production/91593e93094d92f92a94d93092393e93293f92f94b902-91593e-938902915941932/91493792794092f-92a94c92794b902-915940-916947924940/92c93f93993e930-92e947902-91493792794092f-92a94c92794b902-915940-916947924940/93894d91f94093593f92f93e-915940-916947924940">स्टीविया की खेती </a>जैविक रूप से की जाती है अत: किसी प्रकार का रसायनिक खादों, कीटनाशक या जीवाणुनाशकों के बजाय जैविक खादों एवं कीटनाशकों का व्यवहार करना चाहिए। अत: फसल में प्रतिवर्ष 20-25 टन गोबर की सड़ी खाद या केचुआ खाद 7-8 टन प्रति एकड़ दी जानी चाहिए। नीम या करंज खली भी प्रति एकड़ 2-3 क्विटल लगाते समय दें।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्रश्न: पौधे लगाने के बाद किन बातों पर ध्यान दें?<strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;"><strong>उत्तर</strong>: पौधे लगाने के बाद सिंचाई की आवश्यकता होती है। यह फसल एक बार लगाने पर 3-5 साल तक कटाई देती है अत: सिंचाई की ड्रिप या फब्वारा विधि का प्रयोग करना चाहिए।</p> <p style="text-align: justify;">खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए समय-समय पर निकाई गुड़ाई आवश्यक है। खासकर लगाने के एक महीने पर एवं फिर एक महीने पर निकाई गुड़ाई करें। स्टीविया में पत्तों में ही स्टीवियों साईड पाये जाते हैं अत: फूलों के आने पर उन्हें तोड़ दें। फूलों की तोड़ाई पौधों के खेत में रोपने के 35,45,60,75,90 दिनों पर निकाल देनी चाहिए।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्रश्न: इन पर होने वाले प्रमुख रोग क्या है?<strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;"><strong>उत्तर</strong>: सामान्यत: यह कीड़ों एवं रोगों से मुक्त रहता है पर कभी-कभी लीफ स्टाप का प्रकोप होता है इसके निदान के लिए बोरक्स (2%) का छिड़काव किया जा सकता है। <a href="../../../../../../../health/diseases/अन्य-रोग">अन्य रोग</a>ों के लिए नीम का तेल को पानी में घोलकर छिड़काव करें।</p> <p style="text-align: justify;">स्विविया के पौधों को लगाने के चार महीने बाद प्रथम कटाई की जाती है। कटाई की दृष्टि से पत्तों की तुड़ाई अथवा सम्पूर्ण पौधे की जमीन से 5-6 सें.मी. के ऊपर से काट लिया जाता है फिर सुखाकर पत्ते अलग कर लेते हैं। इसके बाद हर तीन महीने के बाद कटाई की जाती है और यह अगले 5 वर्षों तक फसल देती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्रश्न: अंत में इससे होने वाले प्राप्तियों के बारे में बताएं?<strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;"><strong>उत्तर</strong>: प्राय 3-4 कटाई में प्रतिवर्ष 35 क्विंटल सूखे पत्ते प्राप्त होते हैं जिनकी बिक्री दर इस समय 80/- प्रति किलो है। जिसका मूल्य 2 लाख 80 हजार है। प्रथम वर्ष में खर्च लगभग 2 लाख रूपये है जो द्वितीय वर्ष में घटकर 50 हजार रह जाता है। इस तरह 5 वर्षों में खर्च 4 लाख आता है जबकि प्राप्तियां 14 लाख आती है। अत: 5 वर्षों में शुद्ध लाभ 10 लाख प्रति एकड़ है।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्रश्न: इनके पौधे कहां मिलते हैं?<strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;"><strong>उत्तर</strong>: इनके पौधे मिलने का पता है –</p> <p style="text-align: justify;">मे. सन फ्रूटस लि., पुणे 411054, महाराष्ट्र</p> <p style="text-align: justify;">मे. एस बी हेल्दी हर्वल, इंदौर, मध्य प्रदेश</p> <p style="text-align: justify;">मे. केजीएन हर्वल्स, रायपुर, छत्तीसगढ़</p> <p style="text-align: justify;"><strong> स्रोत: समेति तथा कृषि एवं गन्ना विकास विभाग, झारखंड सरकार</strong></p>