परिचय हाइपसीजियस अल्मसरियस को आमतौर पर 'एल्म ऑयस्टर' या 'ब्लू ऑयस्टर' कहा जाता है। यह सीप मशरूम के समान होता है, लेकिन रूपात्मक और जैविक दक्षता में भिन्न होता है। ब्लू ऑयस्टर मशरूम एक नॉवेल प्रजाति है। इसमें बहुत बड़े फलने वाले अंग होते हैं और नीले रंग के पिनहेड्स परिपक्वता पर हल्के सफेद हो जाते हैं। ये स्वादिष्ट के साथ उच्च उपज वाले होते हैं। यह मशरूम की किस्म आकर्षक आकार और उत्कृष्ट स्वाद के साथ मांसल भी है। इसकी पैदावार, स्पोरोफोर आकार, स्वाद और बनावट अन्य व्यवसायिक सीप मशरूम की तुलना में कहीं अधिक बेहतर है जैसे कि प्लूरोटस फ्लोरिडा या प्लूरोटस साजोर-काजू। वर्तमान में इसे हिमाचल प्रदेश में उगाया जाता है। इसके अलावा इसकी बीजाणु सामग्री बहुत कम है। पौष्टिक रूप से इसमें 23.2 प्रतिशत कच्चा प्रोटीन, 56.1 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 1.9 प्रतिशत वसा और 9.1 प्रतिशत रेशा होता है। यह पेट और आंतों के रोगों के लिए अत्यधिक अनुशंसित है। ब्लू ऑयस्टर मशरूम को छोटे और सीमांत। किसानों द्वारा उगाया जा सकता है। इसको महत्व विभिन्न उपजाऊ अर्थात सोयाबीन, गेहूं, धान, मक्का के डंठल, अरहर, तिल, बाजरा, गन्ने की खोई, सरसों के पुआल, कागज के कचरे, कार्डबोर्ड, बुरादा और अन्य कृषि अपशिष्टों पर सफलतापूर्वक उगने की सादगी के कारण है। सबसे पहले पुआल कोछोटे टुकड़ों (2-4 सें.मी. लंबे) में काटा जाताहै और उसके बाद उसे पानी में भिगोया जाता है, ताकि पुआल 75-90 प्रतिशत नमी के स्तर को प्राप्त कर ले। फिर फॉर्मेलीन (0.5 प्रतिशत) और कार्बेन्डाजिम (0.075 प्रतिशत)के घोल से उपचारित किया जाता है। 18 घंटे के बाद पुआल को बाहर निकाल दिया जाता है तथा सब्स्ट्रेट में से अतिरिक्त पानी कोसाफ तार की जाली पर रखकर निकाल दिया जाता है। सब्स्ट्रेट 18 x 12 या 20 x 16या 24 x 16 इंच आकार के पॉली-प्रोपलीन बैग में भरा जाता है, जो क्रमशः 4, 7 और 9 कि.ग्रा. तक गीले पुआल को समायोजित कर सकते हैं।बैग हटाने के 3-5 दिनों के बाद पिनहेड की शुरुआत होती है। मशरूम का पहला फ्लश इस्तेमाल किए गए सब्स्ट्रेस के प्रकार के आधार पर पिनहेड उपस्थिति के 5-7 दिनों के भीतर प्राप्त किया जाता है। मशरूम के किनारों को मुड़ने या नीचे कीओर मुड़ने से ठीक पहले परिपक्व स्पोरोफोर। फलों के पिंडों को तोड़ा जाता है। यह आमतौर पर गुच्छों में दिखाई देते हैं तथा इसकी तुड़ाई मामूली घुमाकर और खींचकर की जाती है। सब्स्ट्रेस के प्रकार और मौजूदा जलवायु परिस्थितियों के आधार पर 8-10 दिनों के अंतराल पर एक ही बैग से तीन से पांच लगातार फ्लश लिए जा सकते हैं। पहली तुड़ाई में बिजाई से 30-35 दिनों का समय लगता है। औसतन 700-900 ग्राम ताजे मशरूम को एक कि.ग्रा. सब्स्ट्रेट के बैग से लिया जा सकता है, जिससे 70-90 प्रतिशत जैविक दक्षता प्राप्त होती है। स्पॉनिंग विधि बैगों में स्पॉनिंग (खुंभी का बीज मिलाना) दो तरीकों से की जा सकती है यानी बहुपरती या पूरी तरह से सब्स्ट्रेट में 5 प्रतिशत की दर से गीला भार के आधार पर मिलाया जाता है। बैग के ऊपरी किनारों को नायलॉन रस्सी की मदद से बांधा जाता है। वेंटिलेशन के लिए प्रत्येक बैग में एक मि.मी. के आठ से दस छेद किए जाते हैं। स्पॉन बैग (बीज फैले बैग) को मशरूम हाउस में रखा जाता है। औसत तापमान 20-30 डिग्री सेल्सियस, पी-एच 7.0-8.0 और सापेक्ष आर्द्रता 75-90 प्रतिशत इसकी मायसेलियल वृद्धि के लिए सामान्य व्यावसायिक खेती की शर्तों के तहत आवश्यक है। मशरूम मायसेलियम (स्पॉन रन) द्वारा सब्स्ट्रेट के पूर्ण उपनिवेशण के बाद पॉली-प्रोपलीन बैग हटा दिए जाते हैं। थैलों के खुलने तक पानी की आवश्यकता नहीं होती है। जब प्राइमरी गठन के समय थैलियों को खुला रखा जाता है, तो धुंध के रूप में बहुत हल्के पानी की व्यवस्था नियमित रूप से दी जाती है, ताकि वे नम रहें।