परिचय मटर, फलीदार सब्जियों में सबसे ज्यादा प्रयोग में लाई जाने वाली फसल है। मटर पोषक तत्वों से सम्पन्न सब्जी है, जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन एवं खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। हरे मटर को हम ज्यादा दिनों तक प्राकृतिक अवस्था में नहीं रख सकते हैं। इसके खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। भारत में मटर की खेती सबसे अधिक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में की जाती है। देश में वर्ष 2018-19 में मटर का उत्पादन लगभग 5427 हजार मीट्रिक टन व क्षेत्रफल 540 हजार हैक्टर था। व्यावसायिक तौर पर मटर को हिमीकृत अवस्था में रखा जाता है और बेमौसम में बेचा जाता है, जिससे कि उत्पादकों को उचित मूल्य मिल पाता है। यह प्रक्रिया महंगी होने के कारण किसानों के लिए उपयोग में लाना सम्भव नहीं है। मौसम में मटर का कम मूल्य, ज्यादा नापैदावार व जल्दी खराब होने के कारण इस फसल को कम लागत में सुखाने की जरूरत पड़ जाती है। वैसे तो फलों और सब्जियों को धूप में सुखाने की प्रक्रिया काफी वर्षों से प्रचलित है। मौसम में आ रही विविधता के कारण कई बार फल और सब्जियां खराब भी हो जाती हैं। इसलिए आजकल बहुत से व्यावसायिक सुखावक यंत्र प्रयोग में लाए जा रहे हैं, जिनसे तापमान एवं आर्द्रता आदि को नियंत्रित किया जाता है। इसके उपयोग से हम अच्छी गुणवत्ता वाला उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं। इस तकनीक द्वारा किसान अधिक मात्रा में सब्जियां सुखा सकते हैं और ज्यादा दिनों तक सुरक्षित रख सकते हैं। वे अच्छी गुणवत्ता वाला पौष्टिक खाद्य उत्पाद अपने परिवार के खाने में इस्तेमाल में ला सकते है और बेमौसम में बेचकर अपनी आमदनी में बढ़ोतरी कर सकते हैं। सुखावक यंत्र जैसे कि बिजली से चलने वाले कैबिनेट ड्रॉयर और सौर ऊर्जा से चलने वाले सोलर ड्रॉयर को इस्तेमाल करके मटर को सुखाया जा सकता है। इसके साथ-साथ अगर हम मटर की गुणवत्ता जैसे कि उसके रंग, स्वाद, एवं बनावट को बनाए रखना चाहते हैं, तो सुखाने से पहले विभिन्न विधियों को प्रयोग में लाकर उनका उपचार किया जा सकता है, ताकि सुखाई गई मटर की गुणवत्ता ज्यादा अच्छी बनी रहे और उसमें ज्यादा परिवर्तन न आए। इन कठिनाइयों को देखते हुए मटर को सुखाने से पहले निम्नलिखित विधियों से उपचारित किया गया और मटर की भौतिक एवं रासायनिक गुणवत्ता पर शोध कार्य किया गया। मटर को सुखाने से पहले की विभिन्न प्रक्रियाओं में ट्रीटमैन्ट टी , 8.5 की स्वीकार्यता के साथ सबसे अच्छा रहा और इसे भौतिक एंव रासायनिक विश्लेषण के लिए चुना गया। हरे और सूखे मटर के भौतिक एवं रासायनिक गुण में गणना के अनुसार हरे मटर में नमी (73 प्रतिशत) कुल घुलनशील पदार्थ (15 डिग्री ब्रिक्स) क्लोरोफिल (28मि.ग्रा./100 ग्राम) और एस्कार्बिक एसिड(54 मि.ग्रा./100 ग्राम) तथा सुखाने के बाद नमी की मात्रा (4 प्रतिशत), क्लोरोफिल (17 मि.ग्रा./100 ग्राम) और एस्कार्बिक एसिड (37.60 मि.ग्रा./100 ग्राम) और कुल घुलनशील पदार्थ 22 डिग्री ब्रिक्स हो जाता है। रिड्यूसिंग चीनी (8.3 प्रतिशत) संपूर्ण चीनी (20 प्रतिशत) पाई गई। सुखावक यंत्र के साथ-साथ मटर को सखाने से पहले उपचार प्रक्रिया मटर की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बहुत उपयोगी है। सुखाने के दौरान मटर के हरे रंग (क्लोरोफिल) एवं दूसरी गुणवता को बनाए रखने के लिए सुखाने से पहले विभिन्न उपचार प्रक्रियाओं को प्रयोग में लाया गया। परन्तु ज्यादा अच्छी उपचार प्रक्रिया (2 मिनट तक 2 प्रतिशत नमक के घोल में उबालना और ठण्डे पानी के बाद में 0.5 प्रतिशत सोडियम कार्बोनेट के घोल में आधे घण्टे तक रखना) रही। इस प्रक्रियासे मटर के हरे रंग एवं दूसरी गुणवत्ता को सुरक्षित रखा जा सकता है। अच्छी गुणवत्ता वाले मूल्यवर्द्धक उत्पाद जैसे-इन्स्टेंट पुलाव मिक्स, वेजीटेबल सूप, मटर प्रोटीन पाउडर इत्यादि बनाए जा सकते हैं। मटर प्रोटीन पाउडर को पास्ता में डालकर उसके प्रोटीन को बढ़ाया जा सकता है। अगर सोडियम कार्बोनेट उपलब्ध नहीं हो, तो 2 प्रतिशत नमक के घोल से उपचार प्रक्रिया सुखाने से पहले प्रयोग कर सकते हैं और काफी हद तक मटर की गुणवत्ता बनाए रख सकते है। सुखाने से पहले की प्रक्रिया मटर की फलियों से दानों को निकालकर ठीक प्रकार से धो लें, फिर नीचे लिखी तकनीक को अपनायें। टी : 2 मिनट तक 2 प्रतिशत नमक के घोल में उबालना और ठण्डे पानी में शीतल करना। टी : 2 मिनट तक 2 प्रतिशत नमक के घोल में उबालना और ठण्डे पानी के बाद में 2 प्रतिशत नमक+4 प्रतिशत चीनी के घोल में आधे घण्टे तक रखना। टी : 2 मिनट तक 2 प्रतिशत नमक के घोल में उबालना और ठण्डे पानी के बाद में 0.5 प्रतिशत सोडियम कार्बोनेट के घोल में आधे घण्टे तक रखना। माटर सूखने की प्रक्रिया ताजे मटर का चयन मटर को छांटना एवं दाने निकालना 2 प्रतिशत नमक के घोल में 2 मिनट तक उबालना ठण्डे पानी में डुबोना एवं निथारना 0.5 प्रतिशत सोडियम कार्बोनेट के घोल में आधा घण्टा तक रखना ट्रे में बिखेर कर मलमल के कपड़े पर रखना मटर को कैबिनेट ड्रॉयर में सुखाना (तापमान 60-65 डिग्री सेल्सियस) सुखाने के बाद नमी 6-8 प्रतिशत होनी चाहिए ठण्डा करना पैकिंग एवं ठण्डे एवं शुष्क स्थान पर भण्डारण करना सारणी 1. उपचार प्रक्रियाओं का मटर की संवेदी गुणवत्ता पर असर उपचार रंग स्वाद बनावट समग्र स्वीकार्यता टी 0 5.8 6.5 6.2 6.4 टी 2 7.3 7.4 7.4 7.2 टी1 8.5 7.8 7.8 8.5 सीडी 0.005 0.512 0.358 0.301 0.28 सारणी 2. हरे एवं सूखे मटर की भौतिक एंव रासायनिक विशेषता पौष्टिक तत्व हरे मटर सूखे मटर नमी (प्रतिशत) 73.0 + 0.94 4.0 + 0.26 कुल घुलनशील पदार्थ (0 ब्रिक्स) 15.0 + 0.48 22.0 + 0.70 क्लोरोफिल (मि.ग्रा./100 ग्राम) 28.0 + 0.96 17.0 + 0.82 एस्कार्बिक एसिड (मि.ग्रा./100 ग्राम) 54.0 + 0.50 37.60 + 1.61 रिड्यूसिंग चीनी (प्रतिशत) 0.80 + 0.02 8.30 + 0.07 चीनी (प्रतिशत) 8.30 + 0.23 20.00 + 0.26 रेशे के अवयव (प्रतिशत) 4.0 + 0.52 3.5 + 0.49 राख के अवयव (प्रतिशत) 1.73 + 00.4 1.82 + 0.07 पुनर्जलीकरण अनुपात 3:1