परिचय अच्छे नर्सरी प्रबंधन के अंतर्गत स्वस्थ पौध उगाना सफल सब्जी उत्पादन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। टमाटर, मिर्च, बैंगन और इसी प्रकार की अन्य फसलों के लिए, जिनमें आमतौर पर रोपाई की जाती है, अधिक उपज और उच्च मानक प्राप्त करने के लिए अच्छी गुणवत्ता की पौध की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। सब्जी पौध उत्पादन एक विशेष गतिविधि है और यह हाल ही में किसानों द्वारा एक विशेष उद्यम के रूप में अपनाई जा रही है। इस लेख का उद्देश्य स्वस्थ पौध उगाने के लिए नर्सरी उत्पादन विधियों से किसानों को परिचित करवाना और सब्जी उत्पादन को बढ़ाने के लिए उन्नत पौध तैयार करने के तरीकों से अवगत करवाना है। प्रो-ट्रे पौधशाला अधिक गुणवत्तापूर्ण सब्जी पौध उत्पादन के लिए यह एक नवीनतम तकनीक है। इसमें संरक्षित संरचना के नीचे पौध का उत्पादन किया जाता है। इसमें बीजों का बेहतर अंकुरण होता है। पौधे स्वस्थ दिखाई देते हैं और कीट और रोगों से सुरक्षित रहते हैं। प्रायः 25 से 30 दिनों के भीतर अच्छी तरह से विकसित जड़ प्रणाली के साथ रोपाई के लिए पौध तैयार हो जाती हैं। प्रो-ट्रे चयन के लिए मानदंड प्रो-ट्रे को अंकुर ट्रे/प्रसार ट्रे या प्लग ट्रे भी कहा जाता है। प्रो-ट्रे का चयन फसल के बीज और बुआई की विधि के आधार पर करना चाहिए। यह मुख्यतः 40 खानों, 50 खानों, 98 खानों और 108 खानों वाली हो सकती हैं। प्रो-ट्रे की रचना इस तरह से की जाती है कि प्रत्येक पौध को सही मात्रा में मृदारहित माध्यम और नमी प्राप्त होती रहे। प्रो-ट्रे के प्रत्येक भाग की तली में छिद्र होते हैं और ये अतिरिक्त पानी की उचित निकासी का कार्य करते हैं। प्रो-ट्रे के लिए वृद्धि माध्यम का चयन कीटाणुरहित व्यावसायिक वृद्धि माध्यम बेहतर होते हैं। इनमें रोगों की घटना कम या शून्य और नमी सही मात्रा में होती है। आमतौर पर सबसे अधिक उपयोग में लाया जाने वाला माध्यम कोकोपीट है, जो कि पौधशाला रोगों को रोकने के लिए प्रयोग किया जाता है। कोकोपीट कॉयर उद्योग का एक उप-उत्पाद है और इसमें उच्च पानी धारण करने की क्षमता होती है। यह अच्छी तरह से विघटित और प्रमुख पोषक स्रोतों से पूर्ण होना चाहिए। इसके अलावा मृदा, गोबर की खाद और रेत मिश्रण (2:1:1 अनुपात) को भी वृद्धि माध्यम के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। प्रो-ट्रे प्रबंधन बुआई के बाद 10 ट्रे को फसलों केआधार पर 3 से 6 दिनों के लिए एक दूसरे के ऊपर रखा जाता है। अंकुरण तक नमी का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए पॉलीथीन का उपयोग करके पूरे ढेर को आवृत किया जाता है। अंकुरण के उपरांत ट्रे को छायाघर में स्थानांतरित कर दिया जाता हैऔर नर्सरी क्यारियों पर फैला दिया जाता है। मौसम की स्थिति के आधार पर ट्रे पर प्रत्येक दिन हल्के से एक बढ़िया छिड़काव गुलाब कैन या नली पाइप का उपयोग करके इन्हें सिंचित किया जाता है। पौधों की मृत्यु दर कम करने के लिए सावधानी के तौर पर ट्रे को फफूंदनाशकों (कार्बेन्डाजिम या थीरम) के साथ भिगोया जाता है। पौधों के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए बुआई के 12 और 20 दिनों बाद पानी में घुलनशील उर्वरकों (19:19:19) का उपयोग 3 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से किया जाता है। बारिश की स्थिति में प्रो-ट्रे को पॉलीथीन से ढकने के लिए सुरंग संरचना का भी प्रयोग किया जाता है। रोपण के सही स्तर पर पौधों को सिंचाई रोककर और रोपाई से पहले छाया को कम करके कठोर किया जाता है। रोग फैलाने वाले कीटों का प्रबंधन करने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव अंकुरण के 7 से 10 दिनों बाद और रोपाई से पहले किया जाता है। पौधे मुख्य क्षेत्र में रोपाई के लिए लगभग 21 से 25 दिनों में तैयार हो जाते हैं। यह अवधि फसल के प्रकार पर भी निर्भर करती है। विभिन्न नर्सरी तकनीकों के आगमन ने वर्ष के किसी भी समय में स्वस्थ सब्जियों की फसल उगाने के नये अवसर प्रदान किए हैं। प्रो-ट्रे भी इसी तरह की नवीन तकनीक है और यह उच्च उपज और आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए गैर-मौसमी सब्जी फसलों के उत्पादन में सुविधा प्रदान कर रही है। प्रो-ट्रे में नये और कोमल पौधों को अच्छी तरह से पोषण दिया जाता है। इन पौधों को संरक्षित किया जाता है। इससे यह बेहतर बीज अंकुरण और स्वस्थ अंकुर उत्पादन को सुनिश्चित करता है। इसके कारण अंततः कम बीज दर की आवश्यकता होती है और उपज एवं गुणवत्ता में भी सुधार होता है।