<p style="text-align: justify;">भारत में प्याज एक महत्वपूर्ण सब्जी फसल है। इसे सलाद एवं रसोई में मसाले के रूप में प्रयोग किया जाता है। भारत, चीन के बाद दुनिया में प्याज का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसके बाद अमेरिका, ईरान, मिस्र एवं रूस प्रमुख देश हैं। प्याज की कीमत में वृद्धि से उपभोक्ताओं का खाद्य उपभोग बजट प्रभावित होता है, जबकि अधिक उत्पादन होने पर खेती की लागत से नीचे प्याज की कीमतों में कमी से किसानों को हानि उठानी पड़ती है। अतः प्याज की पर्याप्त और उचित भंडारण सुविधा उपलब्ध होना अति आवश्यक है। यह किसानों को प्याज की आपात बिक्री की समस्या से निजात दिलाने के लिए आवश्यक है एवं उपभोक्ताओं को भी सही दामों पूरे वर्ष प्याज मिल सकता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्याज उपयोग का महत्व</h3> <p style="text-align: justify;">प्याज की मांग उपभोक्ताओं में पूरे विश्व में वर्षभर बनी रहती है। इसमें तीखापन सल्फर यौगिकों की उपस्थिति के कारण होता है। प्याज विशेषकर रसोई में मसाले के रूप में, सब्जी और सलाद के रूप में दैनिक उपयोग किया जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट एवं अन्य रसायन यौगिक पाये जाते हैं। ये शरीर के स्तर को कम करते हैं, जिससे हृदय रोग का खतरा कम हो सकता है। प्याज में विभिन्न विटामिन, खनिज और यौगिक पाये जाते हैं, जो शरीर के लिए कई तरह से स्वास्थ्यप्रद होते हैं। वास्तव में प्याज, औषधीय गुणों का भंडार है।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cnn18.jpg" width="260" height="215" /></p> <p style="text-align: justify;">भारत, प्याज का निर्यातक देश है।वर्ष 2001-02 में प्याज उत्पादन में 5252 हजार टन की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गयी। इससे किसानों को लाभ हुआ। वर्ष 2016-17 के दौरान प्याज की कीमतों में अचानक उछाल के कारण प्याज का निर्यात बढ़कर 3493 हजार टन हुआ और 4651.73 करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा अर्जित की गयी। वर्ष 2017-18 में देश में प्याज का क्षेत्रफल 1285 हजार हैक्टर एवं उत्पादन 23262 हजार टन एवं उत्पादकता 18.10 टन प्रति हैक्टर दर्ज की गयी।पर्याप्त और उचित भंडारण सुविधा की कमी एक बड़ी समस्या है, जो किसानों को प्याज की आपात बिक्री के लिए विवश करती है। वर्तमान भंडारण क्षमता अपर्याप्त है और अमूमन अवैज्ञानिक तौर-तरीके से संचालित है, उसका नुकसान किसानों एवं उपभोक्ताओं दोनों को उठाना पड़ता है। किसानों की फसल नष्ट हो जाने से व्यापारी प्याज के दाम बहुत बढ़ा देते हैं, जो उपभोक्ताओं के घरेलू बजट को बिगाड देता है।</p> <p style="text-align: justify;">भारत मुख्यत: प्याज की तीनों किस्मों-लाल, पीला और सफेद का उत्पादन करता है। देश के उत्तरी भाग में प्याज आमतौर पर सर्दियों (रबी) के मौसम में उगाया जाता है, जबकि दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों-आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र में, यह सर्दियों (रबी) और साथ ही बारिश (खरीफ) के मौसम में भी उगाया जाता है एवं आपूर्ति पूरे वर्ष उपलब्ध रहती है। वर्तमान में, खरीफ में प्याज की खेती देश के उत्तरी भाग में बढ़ रही है। हमारे देश में प्याज की अपर्याप्त भंडारण सुविधा एवं बेमौसम बरसात के कारण 30-40 प्रतिशत प्याज सड़ जाता है। देश में प्याज भंडारण गोदाम की स्थिति और क्षमता वर्तमान में प्याज भंडारण की क्षमता लगभग 4.6 लाख टन है। यह हमारी कुल उत्पादन क्षमता (232.62 लाख टन) की तुलना में बहुत कम है। यहां तक कि अधिकांश मौजूदा गोदामों में पारंपरिक और अवैज्ञानिक तौर-तरीकों का प्रयोग अभी भी जारी है। </p> <h3 style="text-align: justify;">प्याज भंडारण एवं तकनीक</h3> <p style="text-align: justify;">भंडारण प्रौद्योगिकी का उद्देश्य प्याज को लंबे समय तक शेल्फ जीवन के साथ एक अपरिवर्तित हालत में यथासम्भव लंबे समय के लिए रखना है।</p> <h4 style="text-align: justify;">नियंत्रित तापमान</h4> <p style="text-align: justify;"> नियंत्रित तापमान और आर्द्रता प्रणाली के भौतिक सिद्धांतों का उपयोग कर लंबे समय तक निष्क्रिय हालत और उपयुक्त स्थिति प्रदान की जा सकती है। यह रोग के विकास के लिए प्रतिकूल है। इसके अलावा इस प्रक्रिया में आर्थिक और तकनीकी बाधाओं को देखना पड़ेगा। <strong>इसके लिए दो बुनियादी रणनीतियों पर ध्यान देना होगा जैसे प्याज भंडारण तापमान को 25-30 डिग्री</strong> <strong>सेल्सियस के आसपास रखनाऔर उच्च तापमान की प्रसुप्तावस्था में रखने की जरूरत है</strong>। फिजियोलजिकल और पैथोलोजिकल प्रक्रिया के कारण भंडारण में प्याज का सम्पर्क ऊष्मा और जल वाष्प की भौतिक प्रक्रिया से होता है, जिससे भंडारण कक्ष का वातावरण प्रभावित होता है। अंकुरण में वृद्धि होने से श्वसन दर बढ़ जाती है एवं श्वसन में वृद्धि के कारण प्याज से ऊष्मा, कार्बनडाइऑक्साइड और पानी की कमी को बढाता है।</p> <p style="text-align: justify;">भंडारण कक्ष में रोग तब विकसित होते हैं, जब वहां उसके अनुकूल परिस्थितियां हों। इस प्रकार प्याज खराब हो जाते हैं एवं रोगों के कारण प्याज की गुणवत्ता में गिरावट से श्वसन आउटपुट में वृद्धि हो जाती है।</p> <p style="text-align: justify;">प्याज के लिए सापेक्ष आर्द्रता 65-70 प्रतिशत छिलके को पूर्ण रूप से लचीला और लोचदार बनाए रखने के लिए वांछनीय है। कम सापेक्ष आर्द्रता में छिलका बहुत नाजुकहो जाता है और विशेष रूप से जब छिलके की नमी 20 प्रतिशत से नीचे गिर जाती है, तो छिलका बहुत पतला होकर आसानी से टूट जाता है। सापेक्ष आर्द्रता 67-70प्रतिशत के बीच नमी बनाए रखने के लिए टिलेशन की जरूरत होती है।</p> <p style="text-align: justify;">पानी की कमी और श्वसन में वृद्धि से गुणवत्ता और मात्रा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्याज द्वारा उत्पादित ऊष्मा को नष्ट करने के लिए वेंटिलेशन की जरूरत होती है। समय के साथ इसके लिए वेंटिलेशन की आवश्यकता को भी बढ़ाना होगा। प्याज भंडारण के तकनीकी पहलू अनुकूलतम तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के साथ 65 से 70 प्रतिशत के बीच आर्द्रता की रेंज बनाए रखने पर प्याज भंडारण का वेंटिलेशन काफी सन्तोषजनक रहता है। यह वातावरण भंडारण के होने वाले नकसान जैसे-सडन. अंकरण और वजन के रूप में फिजियोलोजिकल नुकसान करता है। प्याज भंडारण गोदाम उत्तर-दक्षिण की ओर उन्मुख होना चाहिए और उसकी छिद्रित सतह के साथ नीचेऔर किनारों के वेंटिलेशन के साथ 0.60 मीटर की ऊंचाई तक का भंडारण होगा। 80 प्रतिशत तक खुले किनारों के साथ 60 सें.मी. जमीन से ऊपर भंडारण होना चाहिए। वेंटिलेशन भंडारण के तहत भंडारण की ऊंचाई 90 सें.मी. से 150 सें.मी. होनी चाहिए।</p> <h3 style="text-align: justify;">उपयुक्त आकार</h3> <p style="text-align: justify;">प्याज भंडारण के लिए 25 मीट्रिक टन मात्रा के लिए भंडारण क्षेत्र का आकार 4.5 मीटर 6.0 मीटर होना चाहिए। भंडारण कक्ष की चौड़ाई स्थानीय निर्माण सामग्री और परिवेश दशा की उपलब्धता के आधार पर कम की जा सकती है। भंडारण गोदाम की लंबाई को व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुकूल बढ़ाया जा सकता है। धूप और बारिश से उत्पाद की रक्षा करने के लिए विंडवार्ड के ऊपर कम से कम 1.5 मीटर और अन्य सभी किनारों में 0.5 मीटर का छज्जा बनाना चाहिए। 25 मीट्रिक टन के गोदाम का कुल आयाम 6.5 मीटर x 7.0 मीटर होना चाहिए। इस आयाम को क्षमता और साइट की स्थिति के आधार पर समायोजित किया जा सकता है। किनारों की दीवारें भी चेनलिंक (जीआई तार) के प्रकार की हो सकती हैं। ऐसा देखा गया है कि प्रति मीट्रिक टन रुपये 150 से 200 रुपये के बीच निवेश लागत से इस तरह के गोदामों का निर्माण किया जा सकता है। इसलिए, पर्याप्त देखभाल से गोदामों द्वारा पूरा लाभ उठाया जा सकता है।</p> <p style="text-align: justify;"><strong> राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा प्याज भंडारण के लिए अनुदान का प्रावधान </strong>सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) 2019-20 के तहत कमोडिटी के भंडारण के लिए किसानों को प्याज गोदाम विकसित करने के लिए 60 करोड़ का अनुदान आवंटित किया है। केंद्र सरकार की योजना राज्य में भंडारण सुविधाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से है, ताकि किसानों को अपनी उपज को संकट में बेचने और जिंस को बनाए रखने के लिए मजबूर न किया जाए, जब तक कि बाजार की स्थिति में सुधार न हो।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्याज भंडारण में नुकसान की सीमा</h3> <p style="text-align: justify;">अधिकतर ताजा फल-सब्जियों में 70-90 प्रतिशत तक नमी होती है, जबकि कटाई के बाद प्याज में उच्च प्रारंभिक नमी की मात्रा 88 प्रतिशत होती है। प्याज आमतौर पर चार से छह महीने की अवधि के लिये कोल्ड स्टोर में मई से नवंबर तक रखा जाता है। हालांकि 50-90 प्रतिशत भंडारण नुकसान जीनोटाइप और भंडारण की परिस्थितियों के आधार पर देखा गया है। कुल भंडारण नुकसान में वजन (पीएलडब्ल्यू) का दैनिक नुकसान शामिल है जैसे कि नमी की कमी और सिकुड़न (30-40 प्रतिशत), परिवहन हानि (20-30 प्रतिशत) और अंकुरण (20-40 प्रतिशत)। सही समय पर प्याज की कटाई और उसे रोगमुक्त रखने के बाद वांछित तापमान और आर्द्रता की अवस्था में रखने से वजन के नुकसान (पीएलडब्ल्यू) को कम किया जा सकता है। आमतौर पर सड़न के कारण नुकसान विशेष रूप से जून और जुलाई में भंडारण के प्रारंभिक महीने में चरम पर होता है। उच्च नमी के साथ मिलकर उच्च तापमान नुकसान का कारण बनता है। प्याज के उचित श्रेणीकरण और गुणवत्ता एवं अच्छे वेंटिलेशन की स्थिति में सड़न के कारण होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।</p> <p style="text-align: justify;"><strong>राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र एवं नीति अनुसंधान संस्थान, डी.पी.एस. रोड, पूसा, नई दिल्ली-110012</strong></p>