मशरूम या खुम्बी मानव स्वास्थ्य के लिए बहुमूल्य औषधि एवं पोषक खाद्य पदार्थ है। इसमें बहुत से पोषक तत्व जैसे-एमिनोएसिड, लवण, विटामिन आदि उपस्थित होते हैं। इनके कारण यह स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त, रोगरोधक एवं सुपाच्य खाद्य पदार्थ है। मशरूम उत्पादन को 'छाता क्रान्ति' के रूप में जाना जाता है। यह एक प्रकार की फफूंदी है, जिसको खाद्य पदार्थ के रूप में उगाया जाता है। देश में विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को चलाकर मशरूम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कुपोषण को समाप्त किया जा सके और स्वस्थ भारत का सपना साकार हो सके। नेन्सिलीन की खोज सभी कवक प्रजातियोंमें औषधीय उपयोगिता का एक स्तम्भ है। वर्तमान में कवकों का प्रयोग विभिन्न व्याधियों एवं रोगों के उपचार के लिए किया जा रहा है। इसमें फफूंद, जीवाणु एवं विषाणु अवरोधी गुण पाये जाते हैं। इसका निरंतर सेवन करनेसे यह ट्यूमर, मलेरिया, मिर्गी, कैंसर, मधुमेह, रक्तस्राव आदि रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में मशरूम की विभिन्न प्रजातियों का प्रयोग प्रमुखता से हो रहा है तथा असाध्य रोगों के निवारण के लिए ये सहायक सिद्ध हो रही हैं। देश में विभिन्न प्रकार के खाद्य मशरूम का उत्पादन किया रहा है। इसमें उच्च पोषक तत्व, खाने में स्वादिस्ट एवं कम मूल्य होने से सभी वर्ग के व्यक्ति इसको पसंद करते हैं। मशरूम का महत्व कैंसर: यह प्रोस्टैट और स्तन कैंसरसे बचाता है। इसमें बीटा ग्लूकॉन और कंजुगेट लानोलिक एसिड होता है, जो कि कैंसररोधी प्रभाव छोड़ते हैं। मधुमेहः इसमें विटामिन, लवणऔर रेशा होता है। मशरूम में वसा, कार्बोहाइड्रेट और शर्करा नहीं होती है, जो कि मधुमेह रोगियों के लिये जानलेवा है। यह शरीर में इन्सुलिन को भी बनाता है। हृदय रोग: मशरूम में उच्च पोषण तत्व पाये जाते हैं। इसलिए यह दिल के रोग के लिये अच्छा होता है। इसमें कुछ तरह के एंजाइम और रेशे पाए जाते हैं ये कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करते हैं। मैटाबॉलिज्मः मशरूम में विटामिन'बी' होता है। यह भोजन में पाये जाने वाले ग्लूकोज को बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन 'बी' और बी. इस कार्य के लिये उत्तम हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा: मशरूम में उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट फ्री अवयव से बचाता है। यह शरीर में एंटीवायरल और अन्य प्रोटीन की मात्रा बढ़ाता है। यह कोशिकाओं के पुनः निर्माण में सहायक होता है। यह सूक्ष्मजीवी और अन्य फफूंद संक्रमण को ठीक करता है। मोटापा कम करने में सहायकः इसमें लीन प्रोटीन होता है। यह मोटापा घटाने में बड़ा योगदान करता है। मोटापा कम करने वालों को प्रोटीनयुक्त भोजन पर रहने को बोला जाता है, जिसमें मशरूमखाना अच्छा माना जाता है। पोषकीय महत्व मशरूम में पोषक तत्व अधिकांश सब्जियों की तुलना में अधिक पाये जाते हैं। इसकी खेती पोषकीय एवं औषधीय लाभ के लिये की जाती है, जिनका संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है: मशरूम में लगभग 22-35 प्रतिशत उच्च कोटि की प्रोटीन पायी जाती है, जिसकी पाचन शक्ति 60-70 प्रतिशत तक होती है। इसके प्रोटीन में सभी आवश्यक तत्व जैसे-अमीनो अम्ल, मेथियोनिन, ल्यूसिन, आइसोल्यूसिन, लाइसिन, थायमीन, वैलीन, हिस्टीडिन, आर्जीनिन, आदि प्राप्त होते हैं, जो दालों में भी प्रचुर मात्रा में नहीं पाये जाते हैं। इसमें कालवासिन, क्यूनाइड, लेंटीनिन, क्षारीय और अम्लीय प्रोटीन की उपस्थिति मानव शरीर में ट्यूमर बनने से रोकती है। मशरूम में 4-5 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट्स पाये जाते हैं, जिसमें मैनीटाल 0.9, हेमी सेल्यूलोज 0.91 और ग्लाइकोजन 0.5 प्रतिशत विशेष रूप से पाया जाता है। ताजे मशरूम में पर्याप्त मात्रा में रेशे (लगभग 1 प्रतिशत) व कार्बोहाइड्रेट तन्तु होते हैं। यह कब्ज, अपचन, अति अम्लीयता सहित पेट के विभिन्न विकारों को दूर करता है। इसके साथ ही यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल एवं शर्करा के अवशोषण को भी कम करता है। इसमें वसा न्यून मात्रा (0.3-0.4 प्रतिशत) में पाई जाती है तथा आवश्यक वसा अम्ल, प्लिनोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है। प्रति 100 ग्राम मशरूम से लगभग 35 कि.ग्रा. कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। मशरूम में शर्करा (0.5 प्रतिशत) और स्टार्च की मात्रा अल्प होने के कारण मधुमेह रोगियों के लिये यह एक महत्वपूर्ण आहार माना जाता है। इसमें प्यूरीन, पायरीमिडीन, क्यूनान, टरपेनाइड इत्यादि तत्व होते हैं, जो जीवाणुरोधी क्षमता प्रदान करते हैं। इसमें विटामिन 'ए', 'डी' और 'के' नहीं पाया जाता है, लेकिन एर्गोस्टेरॉल पायाजाता है, जो मानव शरीर के अंदर विटामिन 'डी' में परिवर्तित हो जाता है। इसमें आवश्यक विटामिन जैसे-थायमीन, राइबोफ्लेविन, नायसीन, बायोटिन, एस्कार्बिकएसिड और पेंटाथोनिक एसिड पाया जाता है। मशरूम में उत्तम स्वास्थ्य के लिए सभी प्रमुख खनिज लवण जैसे- पोटेशियम, फॉस्फोरस, गंधक, कैल्शियम, लोहा, तांबा, आयोडीन और जिंक आदि भी प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। ये खनिज, अस्थियों, मांसपेशियों, नाड़ी संस्थान की कोशिकाओं तथा शरीर की क्रियाओं में सक्रिय योगदान करते हैं। मशरूम में लौह तत्व कम मात्रा में पाया जाता है फिर भी रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है। इसके साथ ही इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड की उपलब्धता होती है, जो केवल मांसाहारी खाद्य पदार्थों से प्राप्त होता है। अतः लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी से गकस्त अधिकांश ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये उत्तम आहार है। हृदय रोगियों की आहार योजना में मशरूम को शामिल करना उपयोगी पाया गया है, क्योंकि यह शर्करा एवं कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर रक्त संचार को बढ़ाता है। मशरूम गर्भवती महिलाओं, बाल्यावस्था, युवावस्था तथा वृद्धावस्था तक सभी चरणों में कुपोषण से बचाव में अति उपयोगी पाया गया है। इसमें सोडियम वर्षट नहीं पाया जाता है जिसके कारण मोटापा, गुर्दा और हृदयघात से पीड़ित रोगियों के लिये यह महत्वपूर्ण आहार है। मशरूम की प्रजातियां बटन मशरूम यह विश्व में सर्वाधिक उगाया जाने वाला खाद्य मशरूम है।औषधीय गुणों के कारण इसका बहुत महत्व भी है। इसमें हृदय संबंधी रोगों के निदान के लिए रक्त के जमाव को रोकने के लिये लैक्टिन, कैंसररोधी प्रोटीन, जीवाणुरोधी हिर्सटिक अम्ल, फिनोलिक व क्यूनॉन पाया जाता है। बटन मशरूम का सेवन पाचन तंत्र को दक्ष बनाता है। रोगों के प्रति रोगरोधी क्षमता बढ़ाता है तथा रक्त में कोलेस्ट्रॉल को कम करके हृदय रोगों को दूर करता है। दूधिया मशरूम इसमें मौजूद लौह तत्व की वजह से यह एनीमिया अथवा रक्ताल्पता में बहुत उपयोगी है। दूधिया मशरूम में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहींपाया जाता है। इसलिए हृदय रोगियों के लिए अच्छा माना जाता है। ऊंचे तापमान पर इस मशरूम की अच्छी पैदावार होती है एवं इसमें नमी 80-90 तक प्रतिशत होती है। धान के पुआल का मशरूम उष्ण कटिबंधीय जलवायु में उगाया जाने वाला यह प्रमुख मशरूम है। इसमें उपस्थित वोल्वाटाक्सिन कैंसर कोशिकाओं की श्वसन प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करता है। इसका हृदय, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल की अधिकता एवं कैंसर संबंधी रोगों में उत्तम प्रभाव पाया गया है। कठकर्ण मशरूम विश्व के कुल उत्पादन में इसका मशरुम योगदान लगभग 7.9 प्रतिशत है। चीन तथा दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में यह बहुत ही लोकप्रिय मशरूम है। कठकर्ण मशरूम में बवासीर, पेट की व्याधियों, गले का फोड़ा एवं रक्ताल्पतारोधी गुण पाए जाते हैं। यह रक्त के कोलेस्ट्रॉल को कम करता है ऋषि मशरूम इस मशरूम में पॉलीसैकराइडस एवं इटरपीनायड्स दो प्रमुख रासायनिक तत्व होते हैं। ये रक्तचाप, रक्त शर्करा, ट्यूमर, कैंसर सहित अन्य रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। ऋषि मशरूम का उपयोग मानसिक तनाव एवं मोटापा कम करने, हिपैटाइटिस, ब्रान्काइटिस, बवासीर, मधुमेह, कैंसर एवं एड्स के उपचार में किया जाता है। कीट घास या यार्सा गम्बू यह मशरूम हिमालय की पहाड़ियों पर गर्मी के मौसम में एक कीट हेपिएलस आरमोरिकेन्स के लार्वा पर अत्यन्त कम समय के लिये पाया जाता है। इसके सेवन से जनन क्षमता में आशातीत वृद्धि होती है। कीट घास मशरूम पुरुषत्व एवं ओज को बढ़ाता है तथा जीवन प्रत्याशा व सम्पूर्ण स्वास्थ्य (रोगरोधी क्षमता) में सुधार लाता है। रजतकर्ण मशरूम यह क्षय रोग, मानसिक तनाव, जुकाम आदि रोगों के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका सेवन अच्छे स्वास्थ को बढ़ाता है। जापान में इसका उपयोग शक्तिवर्धक पेय पदार्थ के रूप में किया जाता है। श्वेत बटन मशरूम का कैलोरीज मान 36 कि.ग्रा. कैलोरी है। प्रजातियां श्वेत बटन मशरूम की निम्न दो प्रजातियां हैं: एगेरिकस बाइस्पोरसः इसकी प्रभेद-एम. एस.-39, एन.सी.एस.-6, एन.सी. एस.-11 एगेरिकस बाइटोरकसः इसकी प्रभेद-एन. सी.बी.-1, एन.सी.बी.-6, एन.सी.बी.-13 उत्पादन विधि बटन मशरूम को उगाने के लिए कम्पोस्ट की आवश्यकता होती है। कम्पोस्ट भूसा, गेहूं का चापड़, यूरिया एवं जिप्सम को एक साथ मिलाकर व सड़ाकर तैयार किया जाता है। इस मिश्रण को कई तरह की सूक्ष्मजीव रासायनिक क्रिया द्वारा कार्बनिक पदार्थों का विघटन कर कम्पोस्ट में परिवर्तित कर देते हैं। यह एक जैविक विधि है। कम्पोस्ट बनाने के लिए आवश्यक सामग्री गेहूं का भूसाः आवश्यकतानुसार परन्तु कम से कम 5 क्विंटल सूखा भूसा होना ही चाहिए। गेहूं का चापड़ः 100 कि.ग्रा. सूखे भूसे में 15 कि.ग्रा. चापड़ यूरिया: 100 कि.ग्रा. सूखे भूसे में 1 कि.ग्रा. 800 ग्राम