कृषि में भी अब प्रति इकाई से अधिक उत्पादकता के लिए आधुनिक उन्नत कृषि यंत्रों का उपयोग हो रहा है। देश में विभिन्न परीक्षणों द्वारा ज्ञात हुआ है कि कृषि यंत्रों के उपयोग से 15 से 20 प्रतिशत बीज और उर्वरक, 20 से 30 प्रतिशत समय तथा श्रमिकों की बचत की जा सकती है। इसके साथ ही साथ फसल घनत्व में 5 से 20 प्रतिशत तथा उत्पादकता में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि की जा सकती है। प्रस्तुत लेख में प्राकृतिक संसाधन संरक्षण एवं उच्च उत्पादकता के लिए प्रयोग हो रहे कुछ प्रमुख कृषि यंत्रों एवं मशीनों का विवरण दिया जा रहा है। इनके उपयोग से भूमि एवं जल की स्थिरता में सुधार किया जा सकता है। रोटावेटर परंपरागत विधि में फसलों की बुआई से पूर्व खेत की दो-तीन बार देसी हल से जुताई फिर डिस्क हैरो द्वारा जुताई तथा अंत में खेत को समतल करने के लिए पटेला चलाना पड़ता था। इसका प्रयोग गीली एवं सूखी जमीन में 5 से 6 इंच गहराई तक मृदा को मुलायम करने में किया जाता है। इस यंत्र का उपयोग हरी खाद बनाने में भी होता है। रोटावेटर से खेत में बचे फसल अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में दबा दिया जाता है, जिससे फसल अवशेषों का विघटन शीघ्र हो जाता है। इससे एक घंटे में लगभग एक एकड़ खेत की अच्छी महीन जुताई की जाती है। एक हैक्टर खेत की जुताई के लिए लगभग 3.6 घंटे का समय लगता है। लेजर लैण्ड लेवलर इसके उपयोग से खेतों को पूर्णतः समतल किया जा सकता है। इस यंत्र में तीन उपकरण कंट्रोल बॉक्स, लेजर ग्राही और मांजा (बकेट) एक ट्रैक्टर में लगे होते हैं। ट्रांसमीटर खेत के बाहर तिपाई पर रखा जाता है। यह लेजर ट्रांसमीटर खेत के समानांतर लेजर तरंगें अपने चारों ओर भेजता है, जिन्हें मांझे पर लगा लेजर ग्राही (रिसीव) पकड़ लेता है और उन्हें कन्ट्रोल बॉक्स को भेजता है। ट्रैक्टर ड्राइवर की सीट की बगल में लगा हुआ यह कन्ट्रोल बॉक्स मांझे को आवश्यकतानुसार ऊपर नीचे करता रहता है। इससे खेत में चलता हुआ ट्रैक्टर खेत को पूर्ण समतल कर देता है। यदि एक एकड़ खेत का ढलान 10 सें.मी. से कम है तो उसको समतल करने में दो घन्टे प्रति एकड़ का समय लगता है। इस यंत्र से 20 से 30 रोटावेटर प्रतिशत पानी की बचत, 40 से 50 प्रतिशत पैदावार में बढ़ोतरी एवं 30 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि बढ़ जाती है। फरो-ऑपनर संरक्षण खेती के अंतर्गत प्रयोगात्मक छोटे प्लाटों में विभिन्न प्लाटों के अंतर्गत पहले ट्रैक्टरचालित फरो-ओपनर यंत्र द्वारा पंक्तियां बनाई जाती हैं। इसके बाद हाथों द्वारा बीजों की बुआई की जाती है, जिससे खेत में सटीक बुआई हो जाती है। नो टिल सीड-ड्रिल आजकल किसान जीरो टिलेज से धान, बाजरा, कपास, मक्का, अरहर एवं सरसों के खेतों में सीधे गेहूं, मूंग, चना तथा सरसों की बुआई करने लगे हैं। यह मशीन विशेष रूप से गेहूं की बुआई के लिए डिजाइन की गई थी। इस तकनीक द्वारा अगेती एवं पछेती दोनों तरह की बुआई कर सकते हैं। अच्छी पैदावार के लिए बीज एवं उर्वरक की मात्र पांरपारिक विधि के बराबर ही रखनी चाहिए। इस मशीन द्वारा पूर्व फसलों की कटाई करने के उपरांत उसी खेत की बिना जुताई किये गेहूं की बुआई भी कर सकते हैं। इस तकनीक के प्रयोग से एक ओर गेहूं की उत्पादन लागत में कमी आती है तो वहीं दूसरी यह पर्यावरण हितैषी भी है। रेज्ड क्यारी प्लांटर यह यंत्र सिंचित क्षेत्रों के लिए धान, सोयाबीन, कपास व मक्का आदि के बाद गेहूं की बुआई के लिए उपयुक्त यंत्र है। रेज्ड क्यारी प्लांटर दो मेंड़ों पर 6 पंक्तियों में बुआई करता है। इससे उभरी हुई क्यारियों की चौड़ाई को 56 से 70 सें.मी. के बीच समायोजित किया जा सकता है। इसकी कार्य क्षमता 0.2 हैक्ट प्रति घंटा है। मेड़ों को समतल तथा आकार देने के लिए एक बड़ा शेपर, यंत्र के पीछे लगा होता है। मेड़ों की बीच की नालियों से सिंचाई की जाती है तथा बरसात में जल निकासी का लाभ भी इन्हीं नालियों से होता है। इस पद्धति में बुआई के लिए भूमि का भुरभुरा होना आवश्यक है तथा अच्छे बीज अंकुरण के लिए पर्याप्त नमी होनी चाहिए। इस विधि से दलहन व तिलहन की 15 से 20 प्रतिशत अधिक उपज मिलती है तथा रबी मौसम की फसलों में फेलेरिस माइनर खरपतवार का मेड़ के ऊपर कम जमाव होता है। टी.एम.ओ यह यंत्र अत्यधिक साधारण संरचनायुक्त होता है तथा विभिन्न फसलों की पंक्तियों में बुआई के लिए उपयुक्त है। संरक्षण खेती के अंतर्गत इस यंत्र द्वारा बीज से बीज एवं पंक्ति से पंक्ति की दूरी को नियंत्रित किया जा सकता है। टी.एम.ओ. में बुआई इकाई एवं कूंड़कारी दो मुख्य भाग हैं। पूसा संस्थान में यह यंत्र 4 से 6 पंक्तियों में बुआई के लिए उपलब्ध है। इस यंत्र द्वारा गेहूं, सरसों, चना, मटर, सोयाबीन, ज्वार इत्यादि फसलों की पंक्तियों में सटीक बुआई की जा सकती है। यह यंत्र अनुसंधान कार्यों के लिए उपयुक्त है। बहुफसलीय स्पेस प्लांटर (विंटर-स्ट्राइगर) यह यंत्र 5 से 20 मीटर लंबाई वाले छोटे प्लाटों में बीज की बुआई के लिए उपयुक्त है। इस यंत्र में बीज बक्सों के स्थान पर एक फनेल लगाया गया है, जिसमें बुआई के समय बीज डाला जाता है। इसे चलाने व खेत में बुआई के लिए दो व्यक्तियों की आवश्यकता होती है। एक व्यक्ति यंत्र को चलाता है तथा दूसरा फनेल में बीज डालता रहता है। इस मशीन द्वारा छह प्रजातियों को एक साथ बोया जा सकता है। इसमें पंक्तियों से पंक्तियों की दूरी 20 से 30 सें.मी. तथा बीज से बीज की दूरी 2 से 40 सें.मी. तक समायोजित की जा सकती है। बहुफसली स्पेस पलांटर से गेहूं, मक्का, मटर, सूरजमुखी, ज्वार, सोयाबीन एवं सरसों इत्यादि की बुआई की जा सकती है। जुर्न कम्बाइन इसके द्वारा प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र में विभिन्न फसलों की कटाई, गहाई एवं सफाई आदि का कार्य आसानी से किया जा सकता है। इस यंत्र में हैडर इकाई, गहाई, छंटाई व सफाई, शक्ति वाहन एवं नियंत्रण इकाई आदि मुख्य भाग हैं। जुर्न कम्बाइन द्वारा छोटे-छोटे प्लाटों की कटाई की जा सकती है तथा अलग किस्म के बीज मिश्रित हुए अलग-अलग प्राप्त किये जा सकते हैं। इस मशीन से 1.2 से 2 मीटर की चौड़ाई तक फसल काट सकते हैं। इस यंत्र में दानों की टूट तथा हानि लगभग न के बराबर है। जुर्न कम्बाइन के उपयोग से परीक्षण प्लाटों की कटाई, गहाई तथा सफाई कम खर्च एवं समय में की जा सकती है। इस यंत्र से गेहूं, चना, अरहर, मूंग, सरसों आदि फसलों की परिशुद्ध कटाई की जा सकती है। इसकी कार्य क्षमता 2 से 3 हैक्टर प्रति दिन होती है। हैप्पी सीडर इसको धान-गेहूं फसलचक्र में फसल अवशेष एवं बुआई के लिए प्रयोग किया जाता है। यह यंत्र, कम्बाइन द्वारा धान कटाई के बाद उसके अवशेषों में गेहूं की बुआई के लिए प्रयुक्त किया जाता है। हैप्पी सीडर में नो टिल सीड कम फर्टि ड्रिल के सभी गुण हैं। इस यंत्र में फसल के अवशेषों आदि को दबाने के लिए चॉपर लगा रहता है। यह अवशेषों को भूमि में दबा देता है, जिससे बुआई में सुविधा के साथ-साथ फसल अवशेषों से कार्बन की मात्रा भी मिल जाती है। इससे एक घंटे में एक एकड़ खेत की बुआई की जा सकती है। हैप्पी सीडर के प्रयोग से उपयोगी प्राकृतिक संसाधनों यथा ऊर्जा, श्रमिक, डीजल इत्यादि की बचत होती है। इसकी कार्य क्षमता 5-6 घंटे प्रति हैक्टर है। पॉलमेन थ्रेसर इसके द्वारा गेहूं, धान, सरसों, सोयाबीन, मूंग, मसूर, चना, उड़द, अरहर इत्यादि फसलों की थ्रेसिंग आसानी से एकल प्लाटों के अनुसार की जा सकती है। इससे प्रयोगात्मक उपज के आंकड़े अधिक सटीक व सार्थक प्राप्त होते हैं। स्वचालित कम्बाइन हार्वेस्टर इस यंत्र द्वारा गेहूं, धान, सरसों, तिलहन, सोयाबीन, चना, आदि की कटाई तथा गहाई एक साथ कर सकते हैं। इस मशीन से दानों की ठूंठ तथा हानि कम से कम होती है। इस मशीन की कार्य क्षमता 3.7 से 5 हैक्टर प्रति घंटा है। इससे श्रम की लागत में कमी तथा समय की बचत संभव है। यह नमी वाले खेतों में अच्छा कार्य करती है। स्वचालित कम्बाइन हार्वेस्टर को 2.8 कि.मी. प्रति घंटा की गति से चलाया जाता है तथा यह फसल को लगभग 30 सें.मी. ऊंचाई से काटता है। इसमें ईंधन की खपत 7 से 12 लीटर प्रति घंटा होती है। स्त्राेत : खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर),रणबीर सिंह, सुरेन्द्र कुमार, अशोक दीक्षित, राजकुमार, दिनेश टाक और ओम प्रकाश फार्म संचालन सेवा इकाई, भाकृअनपु-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012