देश की बढ़ती जनसंख्या के भरण-पोषण के लिये वर्तमान समय में प्रति इकाई क्षेत्रापफल से ज्यादा से ज्यादा उत्पादन लेने के साथ ही भूमि की उर्वराशक्ति बनाये रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। दिनोंदिन जहां खेती योग्य जमीन का क्षेत्रापफल कम होते जा रहा है, वहीं ज्यादा उत्पादन लेना एक चुनौती बन रहा है। ऐसे में मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के प्रगतिशील कृषक श्री दिनेश ठाकुर द्वारा अपने एक हैक्टर क्षेत्रापफल में अदरक के साथ अरहर की अंतर्वर्तीय खेती कृषि विज्ञान केंद्र, सिवनी के मार्गदर्शन में की गयी है। अदरक (जिंजीबेर ओपिफसीनेल), जिनजिबेरेसी कुल की प्रमुख मसाला फसल है। भारत, विश्व के अग्रणी अदरक उत्पादक देशों में से एक है। वर्ष 2018-19 में देश में 1,74,000 हैक्टर क्षेत्रफल से 18,46,000 मीट्रिक टन अदरक का उत्पादन प्राप्त हुआ है अंतर्वर्तीय खेती में एक ही खेत में एक ही मौसम और एक ही समय में दो या दो से अधिक फसलों का एक साथ उत्पादन किया जाता है। इससे लागत में कमी के साथ प्रति इकाई अधिक उत्पादन प्राप्त किया जाता है। आर्थिक दृष्टिकोण से अंतर्वर्तीय खेती सुरक्षा कवच का काम करती है। जब एक खेत में एक ही साथ दो फसलें उगाई जाती हैं, तब ऐसी स्थिति में मौसम की अनिश्चितता के कारण अगर एक फसल नष्ट हो जाती है तो दूसरी फसल बचाकर उसकी भरपाई की जा सकती है। अदरक फसल को हल्की छाया देने से खुले में बोयी गई अदरक फसल की तुलना में 25 से 30 प्रतिशत ज्यादा उत्पादन प्राप्त होता है। ऐसे में अदरक के साथ अरहर की अंतर्वर्तीय खेती एक लाभकारी आय का जरिया बन सकती है। अरहर की फसल वातावरण में उपलब्ध नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर उपयोग में लाने के साथ-साथ अंतर्वर्तीय फसल के रूप में दूसरी फसल को भी लाभ पहुंचाती है। अरहर की फसल के पौधों की जड़ों पर उपस्थित ग्रंथियां वायुमंडल से सीधे नाइट्रोजन ग्रहण कर पौधों को देती हैं, जिससे भूमि की उर्वराशक्ति बनी रहती है। मध्य प्रदेश में अरहर की औसत उत्पादकता 10-12 क्विंटल प्रति हैक्टर है। धारवाड़ पद्धति से अरहर की खेती अंतर्वर्तीय फसल के रूप में करने से 18-20 क्विंटल उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र, सिवनी द्वारा अंगीकृत ग्राम छुई में अदरक के उत्पादन एवं प्रसंस्करण पर आयोजित प्रशिक्षण के द्वारा कृषक श्री दिनेश ठाकुर ने अंतर्वर्तीय खेती में दोगुना उत्पादन प्राप्त कर एक मिसाल पेश की है। सारणी 1. किस्मों का चुनाव फसल किस्म फसल अवधि (दिन) विशिष्ट गुण अदरक महिमा 200 अधिक उत्पादन क्षमता, कच्ची और सोंठ बनाने के लिए उपयोगी ओलिओरीसिन 4.48 प्रतिशत अरहर ट्रांबे जवाहर अरहर-501 (टी.जे.टी.-५०१) 150-155 असीमित वृद्धि वाली, दाने का रंग लाल, अधिक उपज एवं उकठा अवरोधी बीज कंद की मात्रा एवं बीज उपचार एक हैक्टर खेत में अदरक की बुआई के लिए 20-25 क्विटंल बीज की आवश्यकता होती है। अच्छे परिरक्षित प्रकन्द 2.5-5.0 सें.मी. लंबाई के 20-25 ग्राम वजन के जिनमें कम से कम तीन गांठें थी, बुआई के लिए प्रयोग में लाया गया। बीज के प्रकन्द को बुआई के पूर्व 30 मिनट तक 0.3 प्रतिशत 30 ग्राम (मेटालेक्सिल+मैन्कोजेब) को 10 लीटर पानी में घोलकर प्रकन्दों को उपचारित करके 3-4 घंटे छायादार स्थान में सुखाकर बुआई की गई। अरहर के लिए 2 कि.ग्रा. बीज प्रति हैक्टर उपयोग किया गया। अरहर फसल के बीज को बुआई के पूर्व 2 ग्राम बीटावेक्स पावर 10 ग्राम राइजोबियम और 10 ग्राम पी.एस.बी. पफाॅस्पफोरस घुलनशील बैक्टीरिया प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित किया गया। अरहर की पौध तैयार करने के लिए 6×4 इंच के पॉलीथीन पैकेट में नीचे 3-4 छेद करके 1 भाग मिट्टी, 1 भाग रेत और 1 भाग गोबर की पकी खाद मिलाकर पैकेट में मिश्रण भरने के बाद प्रत्येक प्रत्येक पैकेट में उपचारित बीज की बुआई की गई। 30 दिनों बाद तैयार पौधों की खेत में रोपाई की गई। सारणी 2. अदरक के साथ अरहर की अंतर्वर्तीय खेती के उत्पादन और आय-व्यय का विवरण/हैक्टर मद अदरक अरहर की धारवाड़ तकनीक (एस.पी.आई.) परंपरागत अरहर उत्पादन तकनीक बुआई तकनीक रेज्ड क्यारी पर बुआई पाैध तैयार करके रेज्ड क्यारी पर रापेाई पंक्तियों में सीधी बुआई किस्म महिमा टी.जे.टी.-501 आशा उत्पादन (क्विंटल/हैक्टर) 171.35 18.93 11.76 उत्पादन लागत (रुपये/है.) 172600.00 28700.00 20500.00 शुद्ध लाभ (रुपये/हैक्टर) 427125 73522.00 43004.00 लागत-लाभ अनुपात 3.47 3.56 3.09 आदान की बचत अंतर्वर्तीय फसल लेने में आदान लगात की बचत धारवाड़ तकनीक में बीज की मात्रा 2 कि.ग्रा./हैक्टर लगने से 18 कि.ग्रा. बीज/हैक्टर की बचत होती है। समय में बुआई करने पर फसल में फलीछेदक कीट का प्रकोप एवं पाले का असर नहीं वर्षा की स्थिति में देरी से बुआई करने पर फसल प्रभावित होती है। बीज की मात्रा 20 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर लगती है। लंबी अवधि की किस्म होने के कारण फसल पाले से प्रभावित होती है। फसल रेज्ड क्यारी पर फसल लगाने से उत्पादन में बढ़ोतरी तैयार पौध का रोपण रेज्ड क्यारी पर करने में ज्यादा वर्षा की स्थिति में भी पफसल प्रभावित नहीं होती है। समतल खेत में ज्यादा वर्षा की स्थिति में 40-50 प्रतिशत पौधे खराब होते हैं। निष्कर्ष उत्पादन बढ़ने के साथ आय में बढ़ाेत्तरी बीज की बचत और उत्पादन में वृद्धि उत्पादन में कमी अदरक सह अरहर की अंतर्वर्तीय खेती से कुल शुद्ध लाभ/हैक्टर 500647.