परिचय बिहार के बेगूसराय जिले के बलिया प्रखंड में गाजर की खेती कर खुशहाल हो रहे हैं किसान। विभिन्न गांवों के सैकड़ों किसान कई वर्षों से गाजर की खेती कर रहे हैं। तीन माह के पूरे फसल चक्र में पांच सौ रुपये प्रति कट्ठा के लागत से दो हजार प्रति कट्ठा की हो रही है आमदनी। जुताई की प्रक्रिया किसान आम्बेडकर नगर निवासी अर्जुन पासवान, रामविलास पासवान, नूरजमापुर निवासी गणोशी महतो, सत्यनारायण सिन्हा एवं मेंही महतो बताते हैं कि सितंबर-अक्तूबर माह में खेतों की अच्छी जुताई के बाद अंतिम जुताई में ढाई सौ ग्राम गाजर बीज प्रति कट्ठा के दर से मिट्टी मिलाकर छींटा जाता है। बुआई के बाद खेतों में क्यारी बनायी जाती है। पूरे फसल चक्र में तीन बार सिंचाई एवं एक बार निकौनी की जाती है। जुताई के समय खेतों में डीएपी, पोटाश, यूरिया, थाइमेट एवं जिंक डाला जाता है। फसल जब रोगग्रस्त हो जाए इस फसल में खर्रा, छेदी सहित कई रोग होते हैं, जिसका उपचार संभव नहीं है। फसल के रोगग्रस्त होने पर किसानों को काफी क्षति भी उठानी पड़ती है। गाजर कि फसल के साथ अनेक प्रकार के खरपतवार भी उग आते है , जो भूमि से नमी और पोषक तत्व लेते है , जिसके कारण गाजर के पौधों का विकास और बढ़वार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है अत: इन्हें खेत से निकाल देना अति आवश्यक है। निराई करते समय पिक्तयों से अनावश्यक पौधे निकाल कर पौधो के मध्य कि दूरी अधिक कर देनी चाहिए। साथ ही वृद्धि करती हुई जड़ों के समीप हल्की निराई गुड़ाई करते रहना चाहिए, इससे राहत पाने के लिए कुछ किसान मिश्रित खेती के तौर पर मक्का की भी बुआई कर देते हैं। ताकि किसानों के द्वारा खेतों में दी गयी उवर्रक बेकार नहीं हो सके। किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष बाजार की दरों में कमी एवं अधिक उपज के कारण किसानों को अधिक लाभ नहीं मिल पाया। फसल चक्र किसानें का कहना है कि गाजर की खेती के लिये मूलत ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है इसका बीज को अंकुरित होने के लिए 7.5 से 28 डिग्री सेल्सियस तापमान अधिक उपयुक्त होता है। जड़ों कि वृद्धि और उनका रंग तापमान से बहुत अधिक प्रभावित होता है 15-20 डिग्री तापमान पर जड़ों का आकार छोटा होता है परन्तु रंग सर्वोत्तम होता है। गाजर की विभिन्न किस्मों पर तापमान का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न पडता है। विलायती किस्मों के लिए 4-6 सप्ताह तक 4.8 -10 डिग्री सेन्टी ग्रेड तापमान जड़ बनते समय चाहिए होता है। जिससे इस बार किसान कम मात्रा में खेती की है। फसल चक्र तैयार होने पर किसान बेगूसराय, खगड़िया एवं मुंगेर के सब्जी आढ़तों में इसकी निर्यात करते हैं। लेखन : संदीप कुमार, स्वतंत्र पत्रकार