कुशल गृहणी से कुशल मशरुम उत्पादक तक का सफ़र तय किया है अनीता ने अगर इंसान में कुछ कर गुजरने की जज्बा होती है तो मुकाम भी कदम चुमते हैं। हौसला बुलंद हो तो पत्थर को भी काट कर रास्ता बनाया जा सकता है। इन सभी मुहावरों को सच कर दिखाया है नालंदा जिले के चंडी प्रखंड अंतर्गत अनन्तपुर गांव की रहने वाली अनीता कुमारी ने। उन्होंने ने बताया कि मैं बीए (गृहविज्ञान) पास कुशल गृहणी थी । मेरे पति संजय कुमार बीए पास करने के बाद नौकरी के तलाश में भटके जब नौकरी नहीं मिल पाया तो खेती करने लगे। मेरे पास कृषि योग्य तीन एकड़ तेइस डिसीमल जमीन था। मेरे परिवारों में सदस्यों की संख्या सात थी, माता -पिता एक बच्ची, दो बच्चे । पति के साथ मेहनत करने के बाद किसी तरह जीविकोपार्जन कर गुजरा करती थी । मैं सोचती थी किस प्रकार से बच्चों को अच्छी एवं उच्च शिक्षा दी जाए। मशरुम उद्योग से जुड़ाव इसी समस्या को लेकर मैं कृषि विज्ञान केंद्र हरनौत आयी। वहां के कार्यक्रम संचालक महोदय से मुलाकात हुई और उन्होंने मशरूम उद्योग की सलाह दी । मुझे लगा कि मैं इस कार्य से जुड़कर अपने पैर पर खड़ी हो सकूंगी इससे जो कमाई होगा उससे बच्चों को को उच्चम तालिम दिला सकूंगी। और संचालक महोदय ने मुझे कृषि तकनीकी प्रबंध अभिकरण (आस्था) के माध्यम से सबसे पहले रांची के कृषि विश्वविद्यालय में इसका प्रशिक्षण दिया। खुद सीखकर दे रही दूसरों को प्रशिक्षण वहां उसने मशरूम उत्पादन के तौर तरीके , इसके फायदे आदि के बारे में जानकारी हासिल की। इसके बाद राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा , समस्तीपुर, पंतनगर अविस्थत कृषि विश्वविद्यालय में जाकर मशरूम उत्पादन के साथ-साथ इसके बीज उत्पादन की तकनीक सीखा। आज अनीता अपने गांव में प्रतिदिन एक सौ किलोग्राम मशरूम उत्पादन के लक्ष्य को अगले सीजन में प्राप्त कर लेगी। उनकी प्रेरणा से दो सौ लोग मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण ले चुके हैं, जिनमें अधिकतर महिलाएं हैं। इन लोगों ने मशरूम उत्पादन भी शुरू कर दिया है। अनीता मशरुम के बीज भी तैयार कर लेती है। उसके बाद महिलाओं को स्वावलंबी तथा अपने पांव पर खडा होने के लिए 25 महिला किसानों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया, महिला एवं किसान पूरे उत्साह के साथ मशरूम उपजाना शुरू कर दिया । राज्य सरकार ने मशरूम स्पॉनलैब स्थापित करने के लिए की मदद कृषक हित समूह की सचिव अनीता विकलांग महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में जुटी है। इसे देखते हुए राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत अनीता को राज्य सरकार की ओर मशरूम स्पॉनलैब स्थापित करने के लिये करीब पंद्रह लाख लग रह था सरकार की ओर से 90 प्रतिशत सब्सिडी यानी तेरह लाख पचास हजार राशि अनुदान के रूप में दिया गया। इस लैब से आज के तारीख में 100 केडी बीज बनता है। मशरूम व मधुमकखी पालन के बदौलत अनीती की डिमांड जिले तथा राज्य के बडे अधिकारियों के किचन तक हो गयी है। ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिये राज्य सरकार की ओर से चलाये जा रहे ग्रामीण जीविकोपार्जन कार्यक्रम जीविका के समूह सदस्यों को मशरूम उत्पादन की जिम्मेदारी भी इन्ही को दी गयी है। समेकित कृषि प्रणाली ने अनिता व उसके परिवार की स्थिति ही बदल दी। आज अनिता देवी बदहाली की जिंदगी से निकल कर खुशहाल जिंदगी गुजर-बसर कर रही है। आज अनिता देवी मशरूम उत्पादन, मशरूम बीज उत्पादन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन आदि के व्यवसाय के साथ अन्य खेती भी कर रही है। मशरूम व मशरूम बीज की होती है पांच जिलों में बिक्री अनिता देवी आज मशरूम उत्पादन कक्ष, मशरूम बीज लैब की स्थापना कर चुकी है। अनिता के यहां प्रतिदिन 20 किलो मशरूम का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा प्रतिदिन 100 किलो मशरूम बीज का उत्पादन हो रहा है। मशरूम व मशरूम के बीजों को पांच जिलों भागलपुर, पटना, हाजीपुर, नालंदा व मुंगेर में सप्लाई हो रहा है। अनिता देवी का मशरूम सप्ताह में तीन दिन 20-20 किलो मुंगेर जा रहा है। इसके अलावा सप्ताह में एक-एक दिन पटना व हाजीपुर जा रहा है। इसी तरह अन्य जिलों में मशरूम भेजा जा रहा है। पटना के 575 घरों में हो रही होम डिलीवरी अनिता मशरूम का अचार भी बना रही है। उसका क्षितिज एग्रोटेक से टाई अप हुआ है। इसके माध्यम से पटना के 575 घरों में मोबाइल से होम डिलीवरी हो रही है। इसमें शहर, अचार, सत्तू, आटा, चावल, दाल, मसूर दाल, चना दाल, अरहर दाल व बासमती चावल की डिलीवरी की जा रही है। साथ वह के लिए राज्य सरकार के विभाग के अधिकारी एमेजेन कंपनी से भी बात कर रही है। ताकि उत्पाद होम डिलीवरी के साथ देश के हर राज्य व विदेशों में रहने वाले लोगों को आसानी से उपलब्ध हो सके। प्रति वर्ष तीन क्विंटल शहद का उत्पादन अनिता देवी ने मधुमक्खी पालन में भी कदम रखा है। मधुमक्खी के 50 बक्से से अनिता को प्रतिवर्ष तीन क्विंटल शहद प्राप्त हो जा रहा है। इससे करीब 45 हजार रुपये प्रतिवर्ष की आमदनी हो जा रही है। सम्मान से काम करने का बढ़ा जोश अनिता के कार्य को अब तवज्जो मिल रही है। 2012 में बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर द्वारा नवाचार कृषक पुरस्कार से नवाजा गया। 2015 में अनिता को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा जगजीवन राम अभिनव किसान पुरस्कार से नवाजा गया है। इन सम्मानों से नवाजे जाने पर अनिता देवी कहती है कि यह काम का पुरस्कार है। यह पुरस्कार मिलने से नया जोश व उत्साह पैदा हुआ है और भविष्य में और बेहतर करने की प्रेरणा मिली है। इसके लिए अनीता को और कई पुरस्कार मिल चुके हैं। स्त्रोत : संदीप कुमार, वरिष्ठ पत्रकार, पटना,बिहार