जयनगर कमला रोड निवासी ड अशोक कुमार प्रसाद ने सच साबित कर दिया है कि एलोवेरा की खेती से लाखों कमाया जा सकताहै। जिले में अब तक लोग धान, गेहूं, सब्जी की खेती करते थ़े किसान यह कल्पना भी नहीं की होगी कि इस धरती पर एलोवेरा की खेती भी हो सकतीहै। पर यह डा़ अशोक ने कर दिखाया है। अशोक के पांच एकड़ खेत में एलोवेरा का पौधा लहलहा रहाहै। सालाना पांच लाख की आमदनी एलोवेरा की खेती से डॉ अशोक सालाना पांच लाख रुपये तक कमा रहे है।साथ ही खेती के माध्यम से सात लोगों को रोजगार भी मुहैया कराया है करीब सात साल पहले जब डॉ अशोक ने एलोवेरा का एक पौधा लगाया था, तो लोगों ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि सात साल के बाद इसकी जड़ पांच एकड़ तक फैल जायेगी़ जिला के साथ अन्य कई जिलों में जयनगर का एलोवेरा उत्पाद पहुंच जायेगा़ सात साल के दौरान अशोक ने मेहनत, तकनीक से खेती की, तो आज उसका परिणाम सामने दिख रहाहै। डॉ अशोक बताते हैं कि इसकी शुरुआत वर्ष 2003 में हरलाखी में एक प्रशिक्षण से किया़ बाद में इसकी तकनीकी ज्ञान कोलकाता में जाकर लिया़ बाद में अपने बेकार हो चुके खेत में एलोवेरा की खेती की शुरुआत की़ नहीं मिली सरकारी सहायता यह कृषि क्षेत्र की उदासीनता है, जिले का दुर्भाग्य है या फिर विभाग की लापरवाही कि एक ओर तो कृषि क्षेत्र की विभिन्न योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं, तो दूसरी ओर ऐसे लगनशील किसान को आज तक एक रुपये की सहायता तक नहीं दी गयी है। ऐसा नहीं कि इनकी इस उपलब्धि से विभाग अनभिज्ञ हैक़ कई बार मेला में इनको स्टाल लगाने को आमंत्रित किया जा चुका है। बना रहे कई उत्पाद डॉ अशोक न सिर्फ एलोवेरा की खेती कर रहे, बल्कि इससे कई उत्पाद भी बना रहे है।वर्ष 2012 में ड अशोक ने एलोवेरा से तेल निकालने वाला प्लांट लगाया़ इसका उद्घाटन तत्कालीन जिला पदाधिकारी संजीव हंस ने किया था़ इस प्लांट लगाने के बाद तो मानों डॉ अशोक के सपनों को नयी पंख मिल गयी़ दिन रात मेहनत कर इन्होंने अपने प्लांट से एलोवेरा जूस, एलोवेरा जेल, सैंपू, अर्थो पेडिक तेल, आंवला जूस, आंवला स्वीट्स सहित कई अन्य उत्पाद बनाया़ जिसे जिले के साथ साथ दरभंगा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी के बाजार तक पहुंचा दिया गयाहै। डॉ अशोक की मानें तो इनके इस उत्पाद को कई बड़ी कंपनियां भी खरीद रही हैं। बेटा भी कर रहा सहयोग एलोवेरा की खेत व उत्पाद निर्माण में डॉ अशोक के पुत्र एमबीबीएस के छात्र कुमार आदित्य भी सहयोग कर रहे है। डॉ अशोक बताते हैं कि उत्पाद का निर्माण उनके व उनके पुत्र ही करते है।इस काम में अन्य किसी का सहयोग नहीं लिया जा रहाहै। स्त्रोत : संदीप कुमार,स्वतंत्र पत्रकार,पटना बिहार ।