<h3 style="text-align: justify;">परिचय <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;"> </p> <p style="text-align: justify;">जैविक उत्पाद के जैविक होने की मान्यता तभी है जब वह उत्पाद जैविक खेती नियत राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरता हो| जैविक प्रमाणीकरण एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है| इसके अंतर्गत मान्यता प्राप्त जैविक प्रमाणीकरण संस्थाओं द्वारा जैविक उत्पादन की विभिन्न अवस्थाओं जैसे, उत्पादन, प्रसंस्करण, भण्डारण आदि का राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय जैविक मानकों के आधार पर निरीक्षण करने के उपरांत किसान को “प्रमाणित जैविक खेत/उत्पाद” का प्रमाणपत्र दिया जाता है| जैविक उत्पाद उगाने वाला किसान “प्रमाणित जैविक उत्पादक किसान” कहलाता है|</p> <p style="text-align: justify;">प्रमाणीकरण संस्था एवं जैविक प्रमाणीकरण</p> <p style="text-align: justify;">भारत वर्ष में राष्ट्रीय स्तर पर जैविक खेती के केन्द्रित व सुव्यवस्थित विकास हेतु भारत सरकार के वाणिज्य मत्रालय द्वारा सन` 2000 में अपने उपक्रम कृषि उत्पाद निर्यात विकास निगम (एपीडा) के माध्यम से जैविक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को नियत्रित करने के लिए जैविक उत्पादन हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम (नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑरगेनिक प्रोड्क्शन (एन०पी० ओ०पी०) की शुरुआत की गई| एपीडा हमारे देश में जैविक उत्पादों का प्रमाणीकरण संस्था विश्व के सभी देशों में मान्य है| एपीडा भारत वर्ष में निर्यात को बढ़ावा देती है| वर्तमान में देश में लगभग 20 जैविक प्रमाणीकरण संस्थायें हैं| जिनमें एस०जी० एस०, इकोसर्ट, इंडोसर्ट आईसर्ट, लेकोंन आदि प्रमुख हैं| उत्तराखंड में एपीडा द्वारा जैविक प्रमाणीकरण संस्था के रूप में मान्यता दी गई है, जो न केवल भारत में अपितु यूरोप व अमेरिका में भी प्रमाणीकरण करने हेतु अधिकृत है|</p> <h3 style="text-align: justify;">जैविक प्रमाणीकरण क्यों?<strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">जैविक उत्पादन के जैविक होने का प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए जैविक प्रमाणीकरण</p> <p style="text-align: justify;">की प्रक्रिया आवश्यक है| किसी भी उत्पाद को तभी जैविक उत्पाद कह कर बेचा जा सकता है जब वह किसी प्रमाणीकरण संस्था से प्रमाणित हो| जैविक प्रमाणीकरण का उद्देश्य जैविक किसानों और उपभोक्ताओं के बीच विश्वास को बनाना है| आज उपभोक्ता पाने स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक व चिन्त्तित है| वह स्वयं व अपने परिवार को स्वस्थ भोजन व स्वस्थ वातावरण देना चाहता है| जैविक प्रमाणीकरण प्रकृति, पर्यावरण और उपभोक्ता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करता है| जैविक प्रमाणीकरण के तहत किसान का पूरा खेत जिसमें फल, पेड़-पौधे एवं पशुधन सम्पदा भी शामिल है, तीन साल के अंदर पूरी तरह जैविक परिवर्तित हो जाती है| जैविक खेती में प्रतिबंधित रसायनों व हानिकारक कीटनाशकों का प्रयोग पूरी तरह निषिद्ध है|</p> <p style="text-align: justify;">जैविक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया की मिट्टी संरक्षण, मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रबन्धन, जैव विविधता को बढ़ाना और फसल चक्र पद्धति को प्रोत्साहन दया जाता है| प्राकृतिक वातावरण में पशुओं का रखरखाव व विकास भी इसकी महत्वपूर्ण कड़ी है|</p> <p style="text-align: justify;">जैविक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया व्यक्तिगत रूप से या समूह में हो सकती है, जिसे क्रमशः व्यक्तिगत प्रमाणीकरण अथवा एकल प्रमाणीकरण या समूह प्रमाणीकरण कहा जाता ही|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>एकल प्रमाणीकरण</strong></p> <p style="text-align: justify;">यदि एक किसान प्रमाणीकरण हेतु आवेदन कर प्रमाणपत्र प्राप्त करे तो इसे एकल प्रमाणीकरण कहा जाता है| इसके तहत किसान सीधा प्रमाणीकरण संस्था को आवेदन कर प्रमाणीकरण हेतु समूह प्रमाणीकरण की व्यवस्था शुरू की गई है| इस के तहत समूह को प्रमाणपत्र दिया जाता है|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>प्रमाणीकरण कैसे?</strong></p> <p style="text-align: justify;">प्रमाणीकरण हेतु आवश्यक दस्तावेज तैयार करने के बाद किसान या समूह का मुखिया प्रमाणीकरण हेतु अपने विकासखंड के सहायक खंड विकास अधिकारी (कृषि), मास्टर जैविक प्रशिक्ष्क्म जैविक उत्पाद परिषद के सेवा प्रदाता जो कि जनपद स्तर पर कार्यरत हो अथवा जैविक प्रमाणीकरण संस्थाओं से पत्र द्वारा या सीधे सम्पर्क कर सकता है|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>जैविक समूह प्रमाणीकरण प्रक्रिया</strong></p> <p style="text-align: justify;">समूह प्रमाणीकरण हेतु किसानों का एक समूह गाँव स्तर पर बनाया जा सकता है| इस प्रकार गठित में एक व्यक्ति समूह के मुखिया के रूप में काम करेगा| समूह का मुखिया समूह के कृषकों को जैविक खेती सम्बन्धी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करायेगा|</p> <h3 style="text-align: justify;">समूह प्रमाणीकरण हेतु चयनित किसानों के लिए यह आवश्यक है कि: <strong> </strong></h3> <ul style="text-align: justify;"> <li>समूह के किसानों व उनकी उत्पादन प्रणाली में एकरूपता हो|</li> <li>किसान जैविक खेती में रूचि रखते हो व अपनी खेती में प्रमाणीकरण संस्था द्वारा तय जैविक मानकों का पालन करने की इच्छा रखते हों|</li> <li>प्रत्येक किसान स्वयं भूमि का मालिक हो, यदि भूमि पट्टे वाली हो तो किसान के पास एग्रीमेंट के कागज होने चाहिए|</li> <li>किसान-प्रसार कार्यकर्ता, आंतरिक निरीक्षक तथा बाह्य निरीक्षकों को सहयोग प्रदान हेतु सहमत हो|</li> <li>जैविक उत्पादों के भंडारण हेतु पर्याप्त भंडार घर की व्यवस्था हो|</li> <li>समूह के सदस्यों की न्यूनतम संख्या समूह की क्षमता के अनुसार हो सकती है|</li> <li>किसान की भूमि की कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा नहीं रखी गई है|</li> </ul> <p style="text-align: justify;"><img class="image-left" src="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/agriculture/best-practices/93093e91c94d92f94b902-92e947902-93893094d93594b92494d91594393794d91f-91594393793f-92a939932/91c94893593f915-916947924940/90992494d92493093e916902921-92e947902-91c948935-93593f93593f92792493e-90692793e93093f924-91c94893593f915-91594393793f/Pic2.JPG" width="530" height="217" /></p> <p style="text-align: justify;">जैविक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया</p> <p style="text-align: justify;">जैविक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया दो तरह से नियंत्रित होती है:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>आंतरिक नियंत्रण प्रणाली द्वारा</li> <li>बाह्य नियंत्रण प्रमाणीकरण संस्था द्वारा</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली</h3> <p style="text-align: justify;">जैविक उत्पाद समूहों के प्रमाणीकरण हेतु आंतरिक मानकों की संरचना करने, आंतरिक मानकों के अनुसार जोखिमों के आंकलन करने तथा इन जोखिमों के आंकलन हेतु आंतरिक नियत्रण प्रणाली की स्थापना एवं संचालन हेतु किसी संस्था/संस्थान द्वारा विकसित उच्च गुणवत्ता युक्त यंत्र को “आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली कहते हैं| इसके अंतर्गत निम्नलिखित कार्य किये जाते हैं|</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>आंतरिक नियंत्रण प्रणाली की स्थापना एवं संचालन</li> <li>आंतरिक मानकों की संरचना करना</li> <li>जोखिमों का प्रंबधन</li> </ul> <p style="text-align: justify;">आंतरिक नियंत्रण प्रणाली</p> <p style="text-align: justify;">छोटे जैविक किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए आई०एफ०ओ०ए०एम० द्वारा मुख्य अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं से विचार विमर्श के बाद विकसित जैविक प्रमाणीकरण के लिए आंतरिक नियत्रण हेतु नियमावली के मुख्य बिंदु निम्न है:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>आंतरिक नियत्रण प्रणाली के माध्यम से छोटे किसान समूह बनाकर एक प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते अहिं| जिसे समूह प्रमाणीकरण कहा जाता है| इस प्रणाली के द्वारा छोटे किसान समूह बनाते है, तथा समूह के समस्त किसानों के उत्पादन प्रक्रिया का पूरा लेखा जोखा, निरीक्षण व नियंत्रण भी स्वयं करते हैं|</li> <li>एक व्यक्ति द्वारा अपने खेत का प्रमाणीकरण करवाने में काफी खर्च आता है| इस व्यय कम करने के के लिए समूह प्रमाणीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाती है|</li> <li>आंतरिक नियंत्रण प्रणाली में प्रमाणीकरण संस्था द्वारा यह सुनिश्चित करना होता है कि किसान, समूह या संस्था द्वारा जिसके साथ यह माध्यम से आपस में प्रमाणीकरण हेतु जुड़े हुए हैं, वह आंकड़े सही तरह से व सही समय पर जमा कर रहे हैं एवं इंटरनेट पर प्रेषित कर रहे हैं या नहीं| इसके तहत प्रमाणीकरण संस्था बाह्य निरीक्षकों के द्वारा केवल कुछ सदस्यों के अभिलेख व खेत देखकर व उन किसानों से गहन पूछताछ कर प्रमाणपत्र जारी करती है|</li> <li>प्रमाणीकरण प्रक्रिया संस्था/समूह अपनी सुविधानुसार आसान बना सकता है| इस प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य है कि खेत से उपभोक्ता के खाने की मेज जो उत्पाद पहुँचता है उसकी सम्पूर्ण जानकारी आवश्यकता पड़ने पर उपबल्ध हो सके व किसी उत्पाद की देखकर उसके मूल स्रोत का आसानी से पता लगाया जा सके| प्रमाणीकरण के माध्यम से उत्पाद की गुणवत्ता, उसके प्रसंस्करण में पारदर्शिता व उसके मूल स्रोत की पहचान को कायम रखना आवश्यक है|</li> </ul> <p style="text-align: justify;"> </p> <h3 style="text-align: justify;">आई०एफ०ओ०ए०एम० द्वारा समूह प्रमाणीकरण हेतु सामान्य जरूरतें निम्नवत है<strong> </strong></h3> <ul style="text-align: justify;"> <li>एक प्रंबधन समिति का चयन करें जो उत्पादों के उत्पादन के विपणन तक मानकों के अनुसार समूह की कार्य प्रणाली के लिए जिम्मेदार हो|</li> <li>एक प्रमाण पत्र समूह की उत्पादन, प्रसंस्करण व अन्य पंजीकृत गतिविधियां संचालित हो सकती हैं|</li> <li>समूह के सभी सदस्यों को आंतरिक नियत्रण प्रणाली के नियमों की पूरी जानकारी होनी चाहिए|</li> </ul> <p style="text-align: justify;">आंतरिक नियत्रण प्रणाली (आई०सी०एस०) में समूह प्रमाणीकरण हेतु तय मुख्य मानक निम्न हैं:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>आंतरिक नियत्रण प्रणाली का विस्तृत विवरणात्मक अभिलेख मौजूद होना चाहिए|</li> <li>प्रबंधन ढांचे के दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए|</li> <li>समूह का एक व्यक्ति जो पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी लेगा, उसे समूह के प्रबधक का काम करना होगा|</li> <li>एक आंतरिक नियमावली (उत्पादन, मानक, कन्वर्जन नियम-बदलाव के नियम, दंड नियम आदि) तय होनी चाहिए| जिसकी जानकारी सभी सदस्यों को हो|</li> <li>जैविक खेती में बदली जाने वाली जमीन की कन्वर्जन नियमावली (पारम्परिक खेती, खेत का इतिहास इत्यादी) तय होनी चाहिय|</li> <li>समूह व प्रमाणीकरण संस्था के बीच अनुबंध के पूर्ण दस्तावेज मौजूद होने चाहिए|</li> <li>समूह द्वारा नियंत्रण प्रक्रियाओं हेतु आंतरिक दरोगा (इंस्पेक्टर) चयनित होने चाहिए|</li> <li>संचालक मंडल जैसे प्रबन्धक, दरोगा तथा किसान व अन्य सम्बन्धित व्यक्तियों का इस मुद्दे पर विविधता प्रशिक्षित होना चाहिए|</li> <li>समूह का किसानों के साथ अनुबंध पत्र के दस्तावेज मौजूद होने चाहिए|</li> <li>प्रत्येक किसान के खेत का रिकार्ड व नक्शा मौजूद होना चाहिए|</li> <li>वार्षिक निरीक्षण के मानक/आवश्कताएं तय होनी चाहिए|</li> <li>किसान निरीक्षण रिकार्ड/प्रपत्र मौजूद होने चाहिये|</li> <li>एक संतुति (एप्रूवल) कमेटी का गठन होना चाहिए जिसे सदस्य को समूह से जोड़ने व निकालने का अधिकार हो|</li> <li>किसान समूह की पूरी सूचि मौजूद हो|</li> <li>आंतरिक कमियों के सुधार व निस्तारण की प्रक्रियाएं स्पष्ट हों|</li> <li>अलग-अलग संस्कृति व इलाकों के अनुसार सामाजिक नियंत्रण व नियंत्रण व्यवस्थाएं तय हों|</li> <li>फसल कटने के बाद की उत्पादन चक्र प्रक्रिया, प्रोडक्ट फ्लो व उत्पादित मात्रा के दस्तावेज मौजूद हों|</li> </ul> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/agriculture/best-practices/93093e91c94d92f94b902-92e947902-93893094d93594b92494d91594393794d91f-91594393793f-92a939932/91c94893593f915-916947924940/90992494d92493093e916902921-92e947902-91c948935-93593f93593f92792493e-90692793e93093f924-91c94893593f915-91594393793f/Pic1.JPG" width="563" height="328" /></p> <h3 style="text-align: justify;">जैविक प्रमाणीकरण हेतु मानक <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">जैविक प्रमाणीकरण हेतु निम्न मानकों का पालन हर सदस्य के लिए जरुरी है:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>अपने खेतों में केवल/पारम्परिक बीजों का प्रयोग मान्य होगा| अगली फसल के लिए अपने खेतों के बीज बचाने होगें| किसी भी प्रकार के संकर या जैव-यांत्रिक बीजों का प्रयोग मान्य नहीं है|</li> <li>खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ/उर्वरक/कीटनाशक अथवा बाहरी अकार्बनिक पदार्थों का प्रयोग वर्जित है|</li> <li>जैव विविधता आधारित मिश्रित जैविक खेती करते हुए जैव-विविधता बढ़ानी होगी तथा फसल चक्र का अनुसरण करना होगा|</li> <li>पानी एवं मिट्टी के संरक्षण एवं सतत प्रयोग पर विशेष ध्यान देना होगा| मिट्टी का क्षरण रोकने व पोषकता बढ़ाने हेतु विशेष प्रयास करने होंगे|</li> <li>खेती में सिंचाई शुद्ध पानी द्वारा जैसे नलकूप, झरना, प्राकृतिक स्रोत व वर्षा के पानी से मान्य होगा| किसी भी प्रकार के प्रदूषित पानी का प्रयोग वर्जित होगा|</li> <li>पानी एवं मिट्टी का दुरुपयोग मान्य नहीं होगा|</li> <li>खेतों में मिट्टी की पोषकता बढ़ाने हेतु केवल पूर्णतः सड़ी हुई गोबर, कम्पोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट, वर्मीवाश का प्रयोग ही मान्य है| किसी भी प्रकार की आधी सड़ी गली खाद व कचरे का प्रयोग वर्जित है|</li> <li>खेती के दौरान किसी भी स्तर पर प्रतिबन्ध पदार्थों का प्रयोग मान्य नहीं है|</li> <li>खेती में प्रयोग किये जाने वाले उपकरणों के साफ व सुरक्षित स्थान पर रखें| बीज एवं भंडारण अलग-अलग होना चाहिए तथा संरक्षण हेतु राष्ट्रीय जैविक मानकों पर आधारित जैविक पदार्थों का ही प्रयोग मान्य होगा|</li> <li>जैविक उत्पाद का भंडारण केवल राष्ट्रीय जैविक मानकों द्वारा मान्य बर्तनों व थैली में करें|</li> <li>खेत में पोलिथीन अथवा अन्य किसी भी प्रकार के जैविक/अजैविक कचरे को जलाना निशिद्ध है|</li> <li>प्राकृतिक संसाधनों का दुरूपयोग पूर्णतः वर्जित है|</li> <li>खेती के दौरान किसी भी प्रकार का प्रदुषण पूर्णतः वर्जित है| उदाहरण के लिए मानव-मूल-मूत्र का रिसाव, रासायनिक खेतों का जल बहाव इत्यादि|</li> <li>लगातार तीन साल पुर्णतः जैविक खेती करने पर ही खेत पूर्ण जैविक माना जायेगा|</li> <li>पशुओं के साथ अनैतिक व्यवहार अमान्य है|</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">आंतरिक नियंत्रण प्रणाली प्रक्रिया <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">आंतरिक नियंत्रण प्रणाली प्रक्रिया (आ० नि० प्र०) के अंतर्गत गुणवत्ता को कायम करने के लिए गुणवत्ता प्रबन्धक की देखरेख में आंतरिक निरीक्षकों द्वारा समूह के शत-प्रतिशत कृषकों के खेतों, भंडार गृहों, गौशाला तथा दस्तावेजों इत्यादि का वर्ष में दो बार निरीक्षण के उपरांत आंतरिक निरीक्षक अपनी आख्या तैयार कर गुणवत्ता प्रबंधक को भेजते हैं| गुणवत्ता प्रबन्धक उपरोक्त आख्या को पढ़कर प्रमाणीकरण हेतु बाह्य निरीक्षक को नियुक्त करती है| या बाह्य निरीक्षक समूह के समस्त किसानों का निरीक्षण न कर केवल कुछ ही किसानों का (किसानों की संख्या मानकों के आधार पर तय की जाती है जो कुल सदस्यों का लगभग 10 से 20 प्रतिशत होता है) बाह्य निरीक्षण के संतुष्ट होने पर बाह्य प्रमाणीकरण संस्था पुरे समूह के लिए समूह के लिए प्रमाण पत्र जारी करती है| प्रमाणीकरण की इस पूरी प्रक्रिया को समूह प्रमाणीकरण कहते हैं|</p> <h3 style="text-align: justify;">आंतरिक नियंत्रण प्रणाली का स्वरुप <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">आंतरिक नियंत्रण प्रणाली प्रक्रिया (आ० नि० प्र० ) के माध्यम से जैविक कृषक समूहों के प्रमाणीकरण एवं उत्पादन की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के ल्क्ये यह अति आवश्यक है कि इस प्रणाली का क्रियान्वयन के लिए कुशल एवं अनुभवी कार्मिकों का चयन किया जाये| सामान्यतः किसी भी संस्था को आंतरिक नियंत्रण प्रणाली के स्थापना करने तथा उसके क्रियान्वयन करने हेतु निम्नलिखित कार्मिकों की आवश्यकता होती है:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>प्रबन्धक/गुणवत्ता नियंत्रण</li> <li>आंतरिक निरीक्षक</li> <li>अनुमोदक कार्मिक</li> </ul> <p style="text-align: justify;"> </p> <p style="text-align: justify;"><strong>समूह प्रबन्धक/ गुणवत्ता नियंत्रक</strong></p> <p style="text-align: justify;">आंतरिक नियंत्रण प्रणाली में यह पद सबसे महत्वपूर्ण एंव जिम्मेदारी वाला है| किसी भी आई०सी०एस० की सफलता एंव विफलता प्रबन्धक (प्रमाणीकरण) की योग्यता एवं उसके अनुभव पर निर्भर करती है| अतः इस पद पर कार्य करने वाले व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यताएं होना आवश्यक है:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>मानव संसाधन प्रंबधन व आंकड़ों के प्रंबधन की योग्यता रखता हो|</li> <li>दस्तावेजों के रखरखाव की दक्षता व जैविक खेती के बारे में तकनीकी ज्ञान एवं अनुभव रखता हो|</li> <li>जैविक खेती से सम्बन्धित राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय मानकों तथा तरीकों की जानकारी रखता हो|</li> </ul> <p style="text-align: justify;">समूह प्रबन्धक/ गुणवत्ता नियंत्रक के कार्य</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>सम्बन्धित संस्था के अंतर्गत जैविक कृषकों के प्रमाणीकरण एवं जैविक उत्पादों की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने हेतु आई०सी०एस० की स्थापना कर उसके सफल संचालन एवं क्रियान्वयन हेतु आई०सी०एस० के नियमों, मानकों को परिभाषित करना|</li> <li>बाह्य निरीक्षण हेतु बाह्य प्रमाणीकरण संस्था के साथ समन्वय स्थापित करना|</li> <li>स्थानीय कार्यकर्ता (फील्ड स्टाफ) के साथ समन्वय स्थापित करना|</li> <li>उत्पाद के खेत से उपभोक्ता तक पहुँचने की अनुश्रवण करना|</li> </ul> <p style="text-align: justify;"> </p> <p style="text-align: justify;"><strong>आंतरिक निरीक्षक</strong></p> <p style="text-align: justify;">आ० नि० प्र० आंतरिक निरीक्षक की केन्द्रीय भूमिका है| आंतरिक निरीक्षक आ० नि० प्र० के आंख व कान होते हैं| आंतरिक निरीक्षक समूह द्वारा नियत होते हैं व प्रत्येक कृषक के खेत, भंडार गृह, गौशाला व दस्तावेजों का शत-प्रतिशत अध्ययन करते हैं| इनकी जिम्मेदारी समूह के सदस्यों से प्रमाणीकरण संस्थाओं द्वारा नियत मानकों का अनुपालन करवाना होता है| आंतरिक निरीक्षक का कार्य करनेवाले व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यता होनी चाहिए:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>स्थानीय भाषा व स्थानीय कृषि का ज्ञान तथा कृषकों के साथ कार्य करने की प्रवृत्ति होनी चाहिए| जनसम्पर्क का कौशल चाहिए व भेदभाव की भावना नहीं होनी चाहिए|</li> <li>रिपोर्ट बनाने व पढ़ने की समझ होनी चाहिए|</li> <li>जैविक कृषि के सिद्धांतों एवं विधियों की समझ होनी चाहिए|</li> <li>आ० नि० प्र० की प्रक्रिया को प्रस्तुत कर सकता हो व आंतिरक निरीक्षण के नियमों को समझता हो|</li> </ul> <p style="text-align: justify;">आंतरिक निरीक्षक के कार्य</p> <p style="text-align: justify;">आंतरिक निरीक्षक के निम्नलिखित मुख्य कार्य होते हैं:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>परियोजना में पंजीकृत समस्त किसानों के प्रक्षेत्रों, भंडार गृह, डेरी इत्यादि का प्रत्येक फसल में 100% आंतरिक निरिक्षण करना|</li> <li>जाँच सूची को पूर्ण करना व गुणवत्ता प्रंबधक को इस सम्बन्ध में सूचित करना|</li> <li>किसान की फसलों की उपज की जाँच करना व उत्पादन प्रक्रिया में प्रयोग हुए अवयवों की विस्तृत जानकारी तैयार करना|</li> <li>सभी प्रकार के अनुपालन सम्बन्धी विसंगतियों को देखना|</li> </ul> <p style="text-align: justify;">अनुमोदन कार्मिक/अनुमोदन समिति</p> <p style="text-align: justify;">आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली द्वारा सम्पन्न कराये जा रहे आंतरिक निरीक्षण की परिणामों तथा अन्य गतिविधियों के अनुमोदन हेतु एक समिति का गठन किया जाता है जिसे,” जैविक अनुमोदन समिति” कहते हैं|</p> <p style="text-align: justify;">आंतरिक नियंत्रण प्रणाली को लागू करने वाली संस्था जैविक अनुमोदन समिति के स्थान पर अनुमोदन प्रबन्धक को भी नामित कर सकती है|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अनुमोदन प्रबन्धक के कार्य</strong></p> <p style="text-align: justify;">आंतरिक निरीक्षण के परिणामों एवं आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली द्वारा सम्पादित किये जाने वाले अन्य कार्यों को अनुमोदित करना|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>प्रसार कार्यकर्ता</strong></p> <p style="text-align: justify;">प्रसार कार्यकर्ता जैविक कृषि प्रक्षेत्रों में ही रहते हैं| यह नियमित रूप से कृषि भूमि में जाते हैं व कृषकों को जैविक कृषि सम्बन्धी आवश्यक सलाह एवं सहायता प्रदान करते हैं| प्रसार कार्यकर्ता का स्थानीय भाषा एवं स्थानीय कृषि तंत्र एवं पारिस्थितिकी का ज्ञान भी होना चाहिए| साथ ही उन्हें आ० नि० प्र० की पूरी व्यवस्था, जैविक खेती के समस्त मानकों व तकनीक की जानकारी भी हीनी चाहिए| प्रसार कार्यकर्ता को नियमित रूप से जैविक प्रशिक्षण में भाग लेना चाहिए उनके कार्यों का निरीक्षण गुणवत्ता प्रंबधक के द्वारा किया जाता है|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>प्रसार कार्यकर्ता के कार्य</strong></p> <p style="text-align: justify;">प्रसार कार्यकर्ता के मुख्यतः निम्नलिखित कार्य होते हैं:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>किसानों का जैविक प्रमाणीकरण हेतु पंजीकरण कराना व उनके समूहों से एकत्रित सूचनाओं को फार्म फाईल (कृषि क्षेत्र प्रपत्र) में भरना|</li> <li>किसान को जैविक उत्पादन सम्बन्धी तकनीक एवं उत्पाद की गुणवत्ता सम्बन्धी जानकारी देना|</li> <li>किसान को जैविक प्रशिक्षण दिलाना व उसे जैविक कृषि हेतु प्रेरित करना|</li> </ul> <p style="text-align: justify;">आंतरिक नियंत्रण प्रणाली का दस्तावेजीकरण</p> <p style="text-align: justify;">आंतरिक नियंत्रण प्रणाली के अंतर्गत यह आवश्यक है कि कृषक तथा आई०सी०एस० संचालक द्वारा प्रमाणीकरण प्रक्रिया सम्बन्धी दस्तावेजों को तैयार किया जाए| इन दस्तावेजों का निरीक्षण एवं बाह्य प्रमाणीकरण प्रक्रिया के एक भाग के रूप में किया जाता है| जैविक प्रमाणीकरण हेतु निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:</p> <p style="text-align: justify;"><strong>किसान स्तरीय दस्तावेज</strong></p> <p style="text-align: justify;">इन दस्तावेजों का रखरखाव कृषकों द्वारा किया जाता है| यदि कृषक ऐसा करने में असमर्थ हों तो आई०सी०एस० संचालक को उसके दस्तावेज तैयार करवाने में उसकी सहायता करनी चाहिए| साथ ही इन दस्तावेजों को नियमानुसार एवं सटीक भरने हेतु कृषक का मार्गदर्शन व प्रेरित करना चाहिए| यही दस्तावेज आंतरिक एवं बाह्य निरीक्षण हेतु आधारभूत जानकारियाँ उपलब्ध करवाते हैं|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>जैविक किसान डायरी</strong></p> <p style="text-align: justify;">समस्त किसानों को एक सादी डायरी में या खास तौर पर समूह द्वारा तैयार डायरी में खेती के कामों से जुडी जानकारियाँ अंकित करनी होती हैं| डायरी स्वयं किसान द्वारा या समूह के किसी व्यक्ति द्वारा भरी जाती है| डायरी में किसान समूह का नाम, पूरा पता, खेत का रेखाचित्र, कुल क्षेत्रफल एवं जैविक क्षेत्रफल का विवरण होता है| साथ ही जैविक खेती से जुड़े सभी कार्य जैसे खेत की जुताई, बीज बुवाई, फसल कटाई, मंडाई, बीज की मात्रा, इत्यादि का सम्पूर्ण विवरण दैनिक या साप्ताहिक रूप से भरा जाता है| निरीक्षण के दौरान निरीक्षक द्वारा इस डायरी का बारीकी से अध्ययन किया जाता है| किसान से यह अपेक्षा की जाती है कि डायरी को सावधानी व पूर्ण जिम्मेदारी से भरें या भरवायें|</p> <p style="text-align: justify;">यदि किसान द्वारा खेती में किसी भी प्रकार के जैविक कीटनाशक. दवाई अथवा जैविक खाद का बाहर से खरीद कर प्रयोग किया गया है तो उसके डिब्बे, थैली व खरीद के बिल आदि का सुरक्षित रखा जाना अनिवार्य है| निरीक्षक द्वारा मांगे जाने पर यह दस्तावेज दिखाने होते हैं|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>जैविक उपसमूह फार्म फाईल (कृषि क्षेत्र प्रपत्र)</strong></p> <p style="text-align: justify;">यह दस्तावेज प्रसार कार्यकर्ता द्वारा भरा जाता है| इस दस्तावेज में उपसमूह के खेतों की वृहद् मानचित्र (Overview map) भी बनाया जाता व समूह के सभी किसानों के खेतों व वहाँ जाने वाले रास्ते का मानचित्र (rout map) तथा जैविक व रासायनिक खेतों का मानचित्र भी बनाया जाता है| निhaरीक्षण के दौरान निरीक्षक द्वारा इसका बारीकी से अध्ययन किया जाता है|</p> <p style="text-align: justify;"> </p> <p style="text-align: justify;"><strong>आंतरिक नियंत्रण प्रणाली स्तरीय दस्तावेज</strong></p> <p style="text-align: justify;">इन दस्तावेजों का रखरखाव आई०सी०एस० संचालक, संस्था के द्वारा किया जाता है| इसमें निम्नलिखित दस्तावेज सम्मिलित हैं:</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अनुबंध पत्र</strong></p> <p style="text-align: justify;">यह दस्तावेज समूह द्वारा तय किये गए आंतरिक मानकों का किसान द्वारा पालन की एक लिखित स्वीकृति होती है|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>आंतरिक निरीक्षण जाँच सूची</strong></p> <p style="text-align: justify;">यह दस्तावेज आंतरिक निरीक्षक द्वारा आंतरिक निरीक्षण के दौरान जोखिमों के आंकलन हेतु भरा जाता है| दस्तावेज में कृषक के प्रक्षेत्र के बारे में सूचनाएं जैसे कृषक का नाम, कुल क्षेत्रफल (जैविक व अजैविक) प्रतिबंधित पदार्थों के प्रयोग की अंतिम तिथि, जैविक तथा अजैविक खेतों में उगाई गई फसलों के बारे में सूचनाएं जैसे प्रजाति का नाम, क्षेत्रफल, अनुमानित उत्पादन सूचनाएं अंकित होती हैं|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>वास्तविक कृषक सूची</strong></p> <p style="text-align: justify;">यह दस्तावेज आंतरिक नियंत्रण प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है| इसमें निरीक्षित किये गए समस्त कृषकों की सूचनाएं संगठित रूप इमं अंकित की जाती है| इसमें मुख्यतः कृषक का नाम, कृषक का कोड, कुल क्षेत्रफल, जैविक के अंतर्गत पंजीकृत क्षेत्रफल पर उगाई गई फसलों के बारे में विवरण जैसे: फसल का नाम, प्रजाति, कुल क्षेत्रफल, अनुमानित उत्पादन इत्यादि अंकित होता है| यह सूची आंतरिक निरीक्षण जाँच सूची में अंकित सूचनाओं के आधार पर निर्मित की जाती है|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>आंतरिक निरीक्षण</strong></p> <p style="text-align: justify;">आंतरिक निरीक्षण एक औपचारिक जाँच है जो इस तथ्य की पुष्टि करता है कि कृषक आंतरिक मानकों के समस्त पहलुओं का पालन कर उत्पादन कर रहा है| आंतरिक निरीक्षण आंतरिक नियंत्रण प्रणाली प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण भाग है|</p> <p style="text-align: justify;">आंतरिक नियंत्रण प्रणाली के अंतर्गत पंजीकृत शत-प्रतिशत कृषकों का प्रत्येक फसल चक्र में दो आंतरिक निरीक्षण किया जाना आवश्यक होता है| आंतरिक निरीक्षण फसल उत्पादन की उस अवस्था में किया जाता है जिस समय सम्बन्धित ,मानकों के सापेक्ष अननुपालन के खतरे सबसे अधिक होते हैं| सामान्यतः यह अवस्थायें फसल की बोवाई/रोपाई अथवा कटाई या जब फसलों पर बीमारी एवं कीट का प्रकोप सबसे अधिक होता हो, के समय होती है| गुणवत्ता प्रबंधक द्वारा आंतरिक निरीक्षण खड़ी फसल में पूर्ण करा लिया जाना चाहिये|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बाह्य निरीक्षण</strong></p> <p style="text-align: justify;">आंतरिक निरीक्षण की कार्यवाही पूर्ण होने के पश्चात आई०सी०एस० के अंतर्गत पंजीकृत कृषक समूहों को जैविक उत्पाद हेतु प्रमाण पत्र दिलाने के लिए यह आवश्यक है की आई०सी०एस० का मूल्यांकन किसी बाह्य प्रमाणीकरण संस्था से कराया जाए|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बाह्य प्रमाणीकरण हेतु आवश्यक तैयारियाँ</strong></p> <p style="text-align: justify;">आई०सी०एस० संचालक के बाह्य प्रमाणीकरण हेतु बाह्य प्रमाणीकरण संस्था के आने से पूर्व निम्नलिखित तयारी करनी होगी:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>आंतरिक निरीक्षण सम्बन्धी समस्त दस्तावेजों को पूर्ण करना|</li> <li>बाह्य प्रमाणीकरण की सूचना व तिथियों सम्बन्धित जानकारी किसानों तक पहुँचाना|</li> <li>बाह्य निरीक्षक के रहने एवं यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना|</li> </ul> <p style="text-align: justify;">बाह्य प्रमाणीकरण की प्रक्रिया</p> <p style="text-align: justify;">बाह्य निरीक्षण के दौरान प्रमाणीकरण संस्था द्वारा आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली की कार्य कुशलता की जाँच की जाती है| इस हेतु संस्था आंतरिक नियंत्रण प्रणाली के अंतर्गत पंजीकृत समस्त कृषकों का निरीक्षण न कर कुछ चयनित कृषकों का निरीक्षण कर अपने परिणामों का आंतरिक निरीक्षण के परिणामों से तुलना करती है| इसके अतिरिक्त नियंत्रण प्रणाली के अंतर्गत रखे गये दस्तावेजों की भी जाँच की जाती है|</p> <p style="text-align: justify;">निरीक्षण के परिणामों के आधार पर प्रमाणीकरण संस्था यह तय करती है कि सम्बन्धित आई०सी०एस० संचालक को जैविक उत्पाद का प्रमाण पत्र दिया जाये या नहीं| साथ ही प्रमाणीकरण संस्था द्वारा आई०सी०एस० संचालक को सूचित किया जाता है कि प्रमाण पत्र जारी करने से पहले संचालक को कौन सी कमियाँ दूर करनी होंगी|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बाह्य निरीक्षक</strong></p> <p style="text-align: justify;">बाह्य निरीक्षक प्रमाणीकरण संस्था द्वारा नियुक्त किये जाते हैं, जो प्रमाणीकरण मानकों के अनुरूप समूह का निरीक्षण करते हैं| ये समूह के अंतर्गत पंजीकृत समस्त किसानों के खेतों का निरीक्षण न करते हुए कुछ चयनित किसानों का औचक निरीक्षण करते हैं| ये कई बार अनेक तरह के प्रश्न पूछते हैं जिनका सही जवाब देना चाहिए| ये खेत की मिट्टी व उत्पाद के नमूने भी जमा करते हैं| किसान सदस्यों को इस प्रक्रिया में सहयोग देना चाहिये द्वारा समूह की कार्यप्रणाली का निरीक्षण कर प्रमाणीकरण संस्था को प्रमाणपत्र जारी करने की सिफारिश करते हैं|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>जैविक उत्पादों की बाजार व्यवस्था</strong></p> <p style="text-align: justify;">जैविक उत्पाद के बाद खेत से खाने की मेज तक पहुँचाने तक में कई प्रक्रियाओं (अन्न को जमा करना, कटाई के बाद का प्रंबधन, अनाज की सफाई व पैकेजिंग, विपणन आदि) से गुजरना होता है| हर प्रक्रिया में उत्पाद की गुणवत्ता व उसे पूरी तरह जैविक बनाए रखना उत्पादक व पुरे समूह की जिम्मेदारी के साथ-साथ एक बड़ी चुनौती भी होती है|</p> <p style="text-align: justify;">अन्तर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय व स्थानीय बाजार में जैविक उत्पादों की बड़ी मांग है| किसान अपनी खेती व उसके उत्पादों को पूरी तरह जैविक बनाकर उनका अच्छा दाम प्राप्त कर सकते हैं, साथ ही साथ पाने स्वास्थ्य को बजो बेहतर कर सकते हैं|</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ट्रेसनेट</strong></p> <p style="text-align: justify;">एपीडा द्वारा सं 2010 से ट्रेसनेट व्यवस्था लागू कर दी गई है जिसके तहत इंटरनेट की सहायता से समूह के सभी किसानों के खेत से भंडारण तक की सभी जानकारियाँ कम्प्यूटर में एक निश्चित प्रोग्राम के तहत भरी जाती है ताकि उत्पादन सम्बन्धी सारी जानकारियाँ आसानी से उपलब्ध हों व कोई भी किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न रहे| ट्रेसनेट के तहत समूह के पंजीकरण से प्रमाणपत्र प्राप्त करने तक की सारी कार्यवाही इंटरनेट सहायता से ही संभव है|</p> <p style="text-align: justify;">इस प्रकार जैविक प्रमाणीकरण प्रणाली के माध्यम से छोटे किसान भी अपने जैविक उत्पादों को बाजार में उचित दाम पर बेच कर समुचित लाभ प्राप्त कर सकते हैं|</p> <p style="text-align: justify;"> </p> <p style="text-align: justify;"><strong> स्रोत: उत्तराखंड राज्य जैव प्रौद्योगिकी विभाग; नवधान्य, देहरादून</strong></p>