परिचय श्री हरिओम सपुत्र श्री बिषन सिंह निवास नली खुर्द, पो. कुंजपुरा जिला करनाल ने सन 1995 में कृषि विज्ञान केंद्र रा.डे.अनु.सं., करनाल से कृत्रिम गर्भाधान एवं प्राथमिक पशु चिकित्सा नाम प्रशिक्षण प्राप्त किया था। प्रशिक्षण लेने के बाद श्री हरिओम ने, जो पहले घर में भैंस ही पालते थे, शंकर गायों को पालना शुरू किया व देखते-देखते वे एक अच्छे सफल पशुपालक बन गये। अब वे अपने खेती के साथ-साथ पशुपालन व शंकर गायों का खरीदने बेचने का कार्य भी करते हैं। श्री हरिओम के पशुओं की संख्या निम्न प्रकार हैं- संकर गायें 8 संकर बछड़िया, एक 5 मुर्राह भैसें 5 मुर्राह कटडियां ३ पशु प्रबंध श्री हरिओम के के पास 20 पशुओं के लिए आवास व्यवस्था है साथ ही पशुओं को काफी खुला स्थान भी दिया गया जहाँ पशु समय-2 पर आराम कर सकें व् घूम सकें। श्री हरिओम अपने पशुओं का दूध हाथ से निकालते हैं पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए खुर पका मुहँ पका वैक्सीन प्रति वर्ष एक बार व गोलगोटू वैक्सीन प्रति वर्ष एक बार लगाई जाती है पशुओं की सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।पशुओं के लिए साफ पानी की व्यवस्था है। श्री हरिओम अपने पशुओं का अधिक से अधिक हरा चारा उपलब्ध कराते हैं व स्वयं बनाकर दाना उपलब्ध कराते हैं। उनका मानना है कि यदि पशुओं की उचित सफाई रखी जाये और उचित मात्रा में संतुलित आहार उपलब्ध कराया जाए तो पशुओं में बीमारियों स्वयं ही कम हो जाती हैं। पशु प्रजनन श्री हरिओम अपने पशुओं को कृत्रिम गर्भाधान द्वारा गाभिन कराते हैं। जिसके लिए पशु चिकित्सा अधिकारी, कुंजपुरा करनाल का सहयोग प्राप्त करते है। अच्छी नस्ल की दुधारू गायें रखना उनका शौक है। दूध उत्पादन एवं इससे आर्थिक लाभ श्री हरिओम प्रतिदिन 70-80 किलो दूध पशुओं से प्राप्त करके बेचते हैं। श्री हरिओम अपने पशुओं से दूध बेचकर लगभग 8000 रु, प्रति माह शुद्ध लाभ कमाते हैं। इसके अतिरिक्त श्री हरिओम शंकर नस्ल की गायें बेचकर प्रतिमाह अच्छा लाभ अर्जित करते हैं। स्त्रोत: कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार