ब्रॉयलर उत्पादन ब्रायलर मुर्गीपालन में ध्यान देने योग्य बातें ब्रायलर के चूजे की खरीदारी में ध्यान दें कि जो चूजे आप खरीद रहें हैं उनका वजन 6 सप्ताह में 3 किलो दाना खाने के बाद कम से कम 1.5 किलो हो जाये तथा मृतयु दर 3 प्रतिशत से अधिक ना हो । अच्छे चूजे की खरीद कि लिए राँची पशुचिकित्सा महाविद्यालय के कुक्कुट से विशेषज्ञ या राज्य के संयुक्त निदेशक, कुक्कुट से संम्पर्क कर लें । उनसे आपको इस बात की जानकारी मिल जायेगी कि किस हैचरी का चूजा खरीदना अच्छा होगा । चूजा के आते ही उसे बक्सा समेत कमरे के अन्दर ले जायें, जहाँ ब्रूडर रखा हो । फिर बक्से का ढक्कन खोल दें। अब एक एक करके सारे चूजों को इलेक्ट्रल पाउडर या ग्लूकोज मिला पानी पिलाकर ब्रूडर के निचे छोड़ते जायें। बक्से में अगर बीमार चूजा है तो उसे हटा दें। चूजों के जीवन के लिए पहला तथा दूसरा सप्ताह संकटमय होता है । इस लिए इन दिनों में अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है। अच्छी देखभाल से मृत्यु संख्या कम की जा सकती है। पहले सप्ताह में ब्रूडर में तापमान 90 0 एफ. होना चाहिए। प्रत्येक सप्ताह 5 एफ. कम करते जायें तथा 70 एफ. से नीचे ले जाना चाहिए। यदि चूजे ब्रूडर के नीचे बल्ब के नजदीक एक साथ जमा हो जायें । तो समझना चाहिए के ब्रूडर में तापमान कम हैं। तापमान बढ़ाने के लिए अतिरिक्त बल्ब का इन्तजाम करें या जो बल्ब ब्रूडर में लगा है, उसको थोडा नीचे करके देखें। यदि चूजे बल्ब से काफी दूर किनारे में जाकर जमा हो तो समझना चाहिए ब्रूडर में तापमान ज्यादा हैं। ऐसी स्थिति में तापमान कम करें। इसके लिए बल्ब को ऊपर खींचे यो बल्ब की संख्या को कम करें। उपयुक्त गरमी मिलने पर चूजे ब्रूडर के चारों तरफ फैल जायेंगे । वास्तव में चूजों के चालचलन पर नजर रखें समझकर तापमान नियंत्रित करें। पहले दिन जो पानी पीने के लिए चूजे को दें, उसमें इलेक्ट्रल पाउडर या ग्लूकोज मिलायें। इसके अलावा 5 मि.ली. विटामिन ए., डी. 3 एवं बी.12 तथा 20 मि.ली. बी काम्प्लेक्स प्रति 100 चूजों के हिसाब से दें। इलेक्ट्रल पाउडर या ग्लूकोज दूसरे दिन से बन्द कर दें। बाकी दवा सात दिनों तक दें । वैसे बी- काम्प्लेक्स या कैल्सियम युक्त दवा 10 मि.ली. प्रति 100 मुर्गियों के हिसाब से हमेशा दे सकते हैं। जब चूजे पानी पी लें तो उसके 5-6 घंटे बाद अखबार पर मकई का दर्रा छीट दें, चूजे इसे खाना शुरु कर देंगे। इस दर्रे को 12 घंटे तक खाने के लिए देना चाहिए। तीसरे दिन से फीडर में प्री-स्टार्टर दाना दें। दाना फीडर में देने के साथ – साथ अखबार पर भी छीटें । प्री-स्टार्टर दाना 7 दिनों तक दें। चौथे या पाँचवें दिन से दाना केवल फीडर में ही दें। अखबार पर न छीटें। आठवें रोज से 28 दिन तक ब्रायलर को स्टार्टर दाना दें। 29 से 42 दिन या बेचने तक फिनिशर दाना खिलायें। दूसरे दिन से पाँच दिन के लिए कोई एन्टी बायोटिकस दवा पशुचिकित्सक से पूछकर आधा ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर दें। ताकि चूजों को बीमारियों से बचाया जा सके। शुरु के दिनों में विछाली (लीटर) को रोजाना साफ करें। विछाली रख दें। पानी बर्त्तन रखने की जगह हमेशा बदलते रहें। पाँचवें या छठे दिन चूजे को रानीखेत का टीका एफ –आँख तथा नाक में एक –एक बूँद दें। 14 वें या 15 वें दिन गम्बोरो का टीका आई.वी.डी. आँख तथा नाक में एक –एक बूँद दें। मरे हुए चूजे को कमरे से तुरन्त बाहर निकाल दें। नजदीक के अस्पताल या पशुचिकित्सा महाविद्यालय या पशुचिकित्सक से पोस्टमार्टम करा लें। पोस्टमार्टम कराने से यह मालूम हो जायेगा की मौत किस बीमारी या कारण से हई है। मुर्गी घर के दरवाजे पर एक बर्त्तन या नाद में फिनाइल का पानी रखें। मुर्गीघर में जाते या आते समय पैर धो लें। यह पानी रोज बदल दें। मुर्गियों को खिलाने के लिए दाना-मिश्रण अवयव चूजे प्रतिशत बढ़ने वाली अण्डा देन वाली मुर्गी मकई 22 25 40 चावल का कण 35 45 30 चोकर 5 5 5 चिनिया बादाम की खली 25 16 15 मछली का चूरा 10 6 5 चूने का पत्थर 1.0 1.5 3 हड्डी का चूण 1.0 1.0 1.5 नमक 0.5 0.5 0.5 मैगनीज सल्फेट ग्राम 100 कि. 0.5 25 25 विटामिन - - - अपोषक खाद्य सप्लीमेंट - - - प्रति 100 ग्राम दानों में विटामिन की निम्नांकित मात्रा डालनी चाहिए -10 ग्राम रोमीमिक्स ए.वी. 2 डी. 3 के या वीटाब्लेड के 20 ग्राम (ए.वी.2डी.3) या अलग-अलग विटामिन ए के इंटरनेशनल यूनिट्स 10,000 विटामिन डी 3 के आई.सी.यू एवं 500 मि.ग्राम रीबोफ्लोविन । इसके अतिरिक्त प्रजनन वाले मुर्गे – मुर्गीयों के लिए 15,000 आई.यूविटामिन ई. 1 मि. ग्राम विटामिन बी. 12 (10 ग्राम ए.पी.एफ100) एवं वायोटीन 6 मि.ग्राम प्रजनन के लिए दिये जाने वाले मिश्रण में कुछ अन्य विटामिन एवं ट्रेस मिनरल मिलाये जाते हैं। 50 ग्राम एम्प्रोल या बाईफ्यूरान एवं 100 ग्राम टी.एम. 5 या औरोफेक प्रति क्विंटल दाना में मिलाया जाता है। नोटः (अ) पीली मकई, चावल के कण एवं टूटे गेहुँ को ऊर्जा के स्त्रोत के रुप में दाना में मिलाया जाता है। दाना में यह एक दूसरे की जगह प्रयुक्त हो सकते हैं। (ब) चिनिया बादाम की खली के 8.5 प्रतिशत भाग में रेपसीड खली या सरसों की खली से पुरा किया जा सकता है। (स) मछली का चूरा या मास की बुकनी को भी एक दूसरे से पूरा किया जा सकता है, लिकिन अच्छे दाना-मिश्रण में 2.3 प्रतिशत अच्छी तरह का मछली का चूरा अवश्य देना चाहिए। मांस के लिए पाली जाने वाली मुर्गी का दाना दाना मिश्रणप्रतिशत में अवयव 1 2 3 4 अनाज का दर्रा (मकई ,गेहूँ बाजरा,ज्वर, मडुआ आदि) । 56 52 57 55 चिनिया बादाम की खली 20 25 15 20 चोकर चावल का कुंडा, चावल ब्रान आदि । 10 11 18 15 मछली का चूरा 12 10 8 8 हड्डी का चूण 2.5 2.5 2.5 2.5 लवण मिश्रण 1.5 1.5 1.5 1.5 साधारण नमक 0.5 0.5 0.5 0.5 दाना मिश्रण सं.1 एवं 2 को छः सप्ताह तक एवं उसके बाद 3 एवं 4 नं. खिलायें । प्रति 100 कि. दाना मिश्रण में विटामिन सप्लीमेंट 25 ग्राम खिलायें। मुर्गी अंडा उत्पादन हेतु मॉडल बैंक ऋण परियोजना ब्रॉयलर मुर्गीपालन हेतु मॉडल बैंक ऋण परियोजना बर्ड फ्लू मनुष्यों की तरह ही पक्षी भी फ्लू के शिकार होते हैं। बर्ड फ्लू को एवियन फ्लू, एवियन इंफ्लूएंजा के नाम से भी जाना जाता है। इसका एच-5 एन-1 वायरस पक्षियों के साथ ही मुर्गियों और बत्तखों को भी अपना शिकार बनाता है। बर्ड फ्लू के अधिकतर विषाणु केवल दूसरे पक्षियों को ही अपना निशाना बना सकते हैं, पर यह मनुष्यों के स्वास्थ्य पर भी विषम प्रभाव डाल सकता है। एच-5 एन-1 विषाणु से किसी आदमी के संक्रमित होने का पहला मामला हांगकांग में 1997 में सामने आया था। उसी समय से ही एशिया, अफ्रीका और यूरोप के देशों में बर्ड फ्लू का विषाणु फैलने लगा। यह घातक विषाणु एच-5 एन-1 भारत में जनवरी में फैला था। खाद्य और कृषि संगठनों के अनुसार देश भर में इसके फैलाव को रोकने के लिए 30 लाख 90 हजार से अधिक मुर्गियों और बत्तखों को मार दिया गया। 2 फरवरी 2008 के बाद से किसी नयी बीमारी के निशान देखने को नहीं मिले हैं। एवियन एंफ्लूएंजा आमतौर पर पक्षियों को ही अपना निशाना बनाता है, पर इसके एच-5 एन-1 विषाणु ने एशिया में अपनी शुरुआत (2003) के समय से ही लगभग 243 लोगों को अपना शिकार बना लिया है। यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) का है। मुरगाबी एच-5 एन-1 विषाणु को अपने साथ लाते हैं। मुर्गियां इनका सबसे आसान शिकार बन सकती हैं। वे इससे मानवों को संक्रमित कर सकती हैं, जो सबसे निकट संपर्क में रहते हैं। बाघ, बिल्ली (एच5एन1), सील (एच7एन7), पशु, अश्व प्रजाति (एच7एन7), नेवला (एच10एन4,एच1एन2,एच3एन2,एच4एन6,एच5एन1), मानव, सूअर (एच1एन1), व्हेल (एच2एन2, एच13एन9), मानव मूल धारक- जंगली मुरगाबी, बत्तख आदि (एच1-15, एन1-9), मूलधारक बाधिता, बटेर बर्ड फ्लू के फैलने के मामले में जो लोग संक्रमित पक्षियों के संपर्क में रहते हैं, इसका शिकार बन सकते हैं। मुर्गी अगर सही ढंग से नहीं पकी हो, तो उसे खानेवाला भी बीमार हो सकता है या फिर किसी ऐसे आदमी के संपर्क से भी यह बीमारी फैलती है, जो पहले से इसका शिकार हो। बर्ड फ्लू आदमी को बेहद बीमार कर सकता है, यहां तक कि मौत का कारण भी बन सकता है। फिलहाल अभी इसका कोई टीका नहीं है। बर्ड फ़्लू (एवियन इन्फ़्लूएंज़ा): आवश्यक तथ्य व जानकारी बर्ड फ़्लू (एवियन इन्फ़्लूएंज़ा): आवश्यक तथ्य व जानकारी-1 बर्ड फ़्लू (एवियन इन्फ़्लूएंज़ा): आवश्यक तथ्य व जानकारी-2 पशुपालन एवं मुर्गी उत्पादन - स्वास्थ्य की जानकारी ब्रॉयलर उत्पादन कर लाभ बढ़ाएं| देखिए इस विडियो में|