परिचय बकरी पालन के लिये उपयुक्त और पर्याप्त आवास प्रबंध परम आवश्यक है। यह महत्वपूर्ण है कि बकरियों को प्रतिकूल/कठोर परिस्थितियों से बचाने के लिये उचित आश्रय में रखा जाय। बकरी पालक द्वारा खराब और अस्वास्थ्यकर आवास प्रबंधन, बीमारियों को दावत देती है एवं इसके वजह से 50 प्रतिशत से अधिक नवजात का मृत्यु हो सकता है। बकरीयां बारिश से डरते हैं। बकरियों को विशेषकर मेमनों को कुत्तों, जंगली जानवरों और चोरों से बचाने के लिये कोठे/बाड की आवश्यकता होती है। खराब मौसम के कारण वयस्क बकरियों का उत्पादन और उत्पादकता में कमी आ जाती है। बकरियों के आवास के प्रकार का चुनाव निम्न बातों पर निभर करता है बकरी पालन पद्धति झुंड का आकार उपलब्ध संसाधन। बकरियों के आवास स्थानीय तौर पर उपलब्ध सस्ते सामग्री से तैयार किया जा सकता है। विभिन्न प्रकार बकरियों के समूह/वर्ग के अलग-अलग तरह क आवास या आवास के भीतर विभिन्न खण्डों की आवश्यकता होती है। जैसे कि:- प्रजनन योग्य बकरें गाभिन बकरियों (अतिम माह) मेमने बीमार बकरियाँ बकरियों के आवास की मुख्य विशेषताएँ:- बैठने की व्यवस्था स्वरूप फर्श का प्रकार छत आवास का स्वरूप निम्न बातों पर निर्भर करता है:- उद्देश्य विशिष्ट आवश्यकताएँ स्थायी/अस्थायी मिट्टी/ईटों/लकड़ी का बना हुआ समुचित हवादार आसानी से साफ होने वाला फर्श मजबूत छत और दीवारें निर्दिष्ट मापदण्ड स्थायी आवास- 1.5 m2 (1.22x1.22 m) प्रति बकरी इसके साथ ही बकरी के घूमने-फिरने और दाना और पानी के लिये खुला स्थान। रात्रिकालीन आवास- 1.0 m2 (1x1 m) प्रति बकरी। ब्यॉत कक्ष- 3 m2 (1.73x1.73m) प्रति बकरी। बकरे के लिये स्थायी आवास- 3.0 m, 2 प्रति बकरा। मापः- स्थायी रूप से बकरियों के आवास हेतु यदि आपके पास 5 बकरियॉ हो तोः प्रति बकरी उपरोक्त निर्दिष्ट मापदण्ड से लेना है। फर्शः आवास जमीन से जुड़ा हुआ अथवा जमीन से उठा हुआ हो सकता है। जमीन से चुड़े हुये आवास (मचान के समान) को फर्श मिट्टी से बना हुआ/ पक्का फर्श हो सकता है। मिट्टी के फर्श ठोस हो ताकि आसानी से सफाई की जा सके। उठा हुआ/मचान के समान फर्श की ऊँचाई जमीन से 1.5 2m होनी चाहिये। लकड़ी के बत्ते/खंभे दूर-दूर (1.5-2 cm) लगे हो ताकि बकरियों के अपशिष्ट सीधे नीचे जमीन पर गिरें। ज्यादा दूर रखे बकरियों के पैर फंसने की आशंका बढ़ जायेगी। आवास के प्रकार मचान की भॉति आवास लाभ : इसमें ज्यादा/ कम संख्या में भी बकरियाँ रख सकते है। पर्याप्त हवादार। आसानी से सफाई हो जाती है और मजदूर ज्यादा नही लगते। मूत्र और मल आसानी से इक्कठा किये जा सकते है। मजबूत और टिकाऊ आवास। मचान बकरियों को शिकार से बचाता है। हानिः बनाने में महंगा चूंकि सामान अधिक लगता है। स्थानीय तौर पर उपलब्ध सामग्री से बने आवास छत :- बकरियों के आवास में छत होना आवश्यक है। छत लोहे की लहरदार चादर/पटेराघास/पाली विनाइल सामग्री से बनी होनी चाहिए। ढलायुक्त छत हो ताकि पानी न ही रूके और न ही रिसाव हो। बकरी के आवास के चारो तरफ बरामदा अथवा चबूतरा हो, जिससे की बारिश का पानी अन्दर न जाये और नींव कमजोर न हो। कोठे के अंदर लगने वाली सामग्री – खाने के लिए बर्तन - ऊपर रखना चाहिए, क्योंकि बकरियां ऊपर पैर रखकर गर्दन ऊंची करके खाना पसंद करती है। खाने की कमी न हो, इस प्रकार बर्तनों व खद्यान्नों की योजना बनानी चाहिए। पानी के बर्तन - अस्वच्छ पानी से संक्रामक रोग हो सकते हैं। अतः पानी कीटाणु नाशक दवा का प्रयोग करना चाहिए। पानी, खाने के बर्तन रोज साफ होने चाहिए। ईटों से बना पक्का आवास लाभ:- ढॉचा स्थायी होता है। जानवरों के द्वारा क्षति नही पहुँचायी जा सकती है। ईंटें मंहगी होती है। हानिः आवास पर्याप्त हवादार नहीं होती। फर्श की सफाई में अधिक ध्यान हेने की आवश्यकता होती है। कच्चा आवास लाभः निर्माण सस्ती होती है। अधिक समय तक टिकाऊ नही होता है। स्थानीय तौर पर उपलब्ध सस्ती सामग्री से तैयार होता है। हानिः अक्सर पर्याप्त हवादार नही होता है। फर्श की सफाई करने में मुश्किल होती है। अधिकतर कच्चे मिट्टी के आवास की छप्पर घासफूस से बनी होती है, जिसके कारण बारिश में रिसाव होता है। स्थानीय तौर पर उपलब्ध सामग्री से बना हुआ आवास पर्याप्त होता है। इसका मुख्य उद्देश्य बकरियों को बारिश से बचाना होता है। नीलगिरी के दूर-दूर रखे हुये, खम्भे से बनी साधारण दीवारें बकरियों को आसानी से एक स्थान पर रखती है, जो कि पर्याप्त हवादार है। विकसित आवास भी प्रदर्शित है, जिसमें आवासीय स्तर को जमीन से ऊँचा रखा गया है ताकि लकड़ी की पट्टी के बीच दरार से अवशिष्ट पदार्थ सीधे जमीन पर गिरे और उसका सरलता से संग्रह किया जा सकें। बकरी के आवास संबंधित सामान्य सुझाव यदि बकरियों को आवास में घूमने-फिरने के लिए पर्याप्त जगह न मिलने से उनकी गतिविधि सीमित होने के कारण बकरी के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आवास में बकरियों की संख्या अधिक होने के कारण श्वसन संबंधी बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। बकरी के आवास की सफाई प्रतिदिन होनी आवश्यक है, क्योंकि वहां पर एकत्र होने वाले अवशिष्ट पदार्थों में आकामक और परजीवी अन्य बीमारियों के पनपने के कारण रोगों के संकमण की संभावना बढ़ जाती है। गंदगीयुक्त आवास में कम उम्र के बकरियों में परजीवी अन्य बीमारियों और वयस्कों में त्वचा एवं खुर से संबंधित बीमारियों के फैलने की आशंका अधिक होती है। लोगों को अपने साथ पशुओं को नहीं रखना चाहिये। हर तीन महीने में ध्यान में रखने योग्य बातें फिनाइल या इसके जैसा कीटाणु नाशक छिड़ककर बकरियों एवं उनके बच्चों के कोठे को कीटाणु रहित करना चाहिए। कोठे के जमीन पर चूना छिड़कना चाहिए एवं दीवार पर चूने से पुताई करना चाहिए। अंतः एवं बाह्य परजीवियों का नाश करने के लिए समय-समय पर बकरियों में दवाई देनी चाहिए। कोठे की मिट्टी साल में एक बार निकालना व बदलना चाहिए। ऐसा करने से परजीवियों के कारण होने वाले रोगों से बचाव हो सकता है। निम्न बातों का ध्यान रखें बकरियों का बाड़ा, उनका घर आरामदायक होना चाहिए, जो उन्हें धूप, बरसात, ठंड, जंगली जानवर व रोगों से बचायें। बकरियों के रहने लिये पर्याप्त स्थान होना चाहिए। एक युवा बकरी हेतु 10 वर्गफीट रहना चाहिए। सर्दियों में बिछावन के लिए सूखी घास व बोरे के पर्दे लगाकर बचाव करना चाहिए। बाड़े का फर्श समतल, साफ-सुथरा होना चाहिए। छत, घास-फूस, पैरा, एसबेसटास या खपरैल की हो सकती है। शुद्ध हवा का आवागमन हो, ताकि पेशाब, गोबर की बदबू ना रहे, जिससे सांस का रोग ना हो। घर पूर्व, पश्चिम दिशा में होना चाहिए, ताकि सूरज की रोशनी घर पर पड़कर घर के अंदर पनपे, कीटाणुओं का नाश कर सकें। नर-मादा (गाभिन व दुधारू) मेमनों एवं बीमार बकरियों का अलग-लअग रखने हेतु छोटे-छोटे बाड़े तैयार करना चाहिए। नियमित समय पर बाड़े की साफ-सफाई फिनाईल से धुलाई करते रहना चाहिए। स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार