परिचय पैडी स्ट्रॉ मशरूम, जिसे स्ट्रॉ मशरूम भी कहा जाता है, उष्णकटिबंधीय एवं उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण खाद्य मशरूम है। यह मशरूम विश्व में व्यावसायिक रूप से उगाए जाने वाले मशरूमों में छठे स्थान पर आता है। इस मशरूम की खेती की शुरुआत 1822 में चीन में हुई थी। भारत में इसका प्रथम प्रयास 1940 में कोयंबटूर (तमिलनाडु) में किया गया। वर्तमान में यह मशरूम मुख्यतः ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे तटीय राज्यों में लोकप्रिय है। इस मशरूम की लोकप्रियता के प्रमुख कारण हैं: उच्च तापमान में उगने की क्षमता बहुत तेज़ वृद्धि दर कम समय में फसल तैयार होना सस्ती एवं आसानी से उपलब्ध कच्ची सामग्री अच्छा स्वाद एवं उच्च पोषण मूल्य जलवायु एवं तापमान की आवश्यकता पैडी स्ट्रॉ मशरूम को “Warm Mushroom” कहा जाता है क्योंकि इसे उच्च तापमान की आवश्यकता होती है। उपयुक्त तापमान: 30–35°C फलन के लिए न्यूनतम तापमान: 28°C अधिकतम सहनशील तापमान: 38–40°C आर्द्रता (Relative Humidity): 80–85% यह मशरूम ठंडे मौसम में नहीं उगता, इसलिए यह ग्रीष्म ऋतु एवं मानसून काल में विशेष रूप से उपयुक्त होता है। जीवन चक्र एवं जैविक विशेषताएँ पैडी स्ट्रॉ मशरूम अन्य मशरूमों से जैविक रूप से भिन्न होता है: यह होमोथैलिक (Homothallic) प्रकृति का होता है इसके बीजाणु स्वयं उगने में सक्षम होते हैं इसमें क्लैम्प कनेक्शन अनुपस्थित होते हैं हाइफाएँ बहु-नाभिकीय (Multinucleate) होती हैं अनुकूल परिस्थितियों में इसका पूरा जीवन चक्र 4–5 सप्ताह में पूरा हो जाता है। फलन शरीर के विकास की अवस्थाएँ पैडी स्ट्रॉ मशरूम का फलन शरीर छः स्पष्ट अवस्थाओं से गुजरता है: पिनहेड अवस्था - यह प्रारंभिक अवस्था होती है, जिसमें मशरूम पिन के सिर के आकार का होता है। इस अवस्था में पूरा ढांचा सफ़ेद होता है और टोपी व डंठल अलग-अलग दिखाई नहीं देते। टाइनी बटन अवस्था - इस अवस्था में मशरूम गोल आकार ले लेता है। ऊपर का भाग हल्का भूरा तथा नीचे का भाग सफ़ेद रहता है। अंदर गिल्स (lamellae) बनना प्रारंभ हो जाता है। बटन अवस्था - यह व्यावसायिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इस समय मशरूम पूरी तरह यूनिवर्सल वील से ढका रहता है और बाजार में सबसे अधिक कीमत मिलती है। एग अवस्था - इस अवस्था में वील फटकर वोल्वा बन जाती है। टोपी छोटी रहती है और बीजाणु अभी नहीं बनते। कटाई के लिए यह सबसे उपयुक्त अवस्था है। एलॉन्गेशन अवस्था -इस अवस्था में डंठल लंबा हो जाता है, लेकिन टोपी अभी पूरी तरह नहीं खुलती। परिपक्व अवस्था - यह अंतिम अवस्था होती है। टोपी 6–12 सेमी व्यास की, गहरे स्लेटी रंग की होती है। गिल्स परिपक्व होकर बीजाणु बनाते हैं। पोषण मूल्य (Nutritive Value) पैडी स्ट्रॉ मशरूम अत्यंत पौष्टिक होता है: जल: लगभग 90% प्रोटीन: 30–43% (शुष्क भार पर) वसा: 1–6% कार्बोहाइड्रेट: 12–48% कच्चा रेशा: 4–10% यह लाइसिन, ग्लूटामिक एसिड तथा आवश्यक अमीनो अम्लों से भरपूर होता है। कच्चा माल (Substrate Selection) पैडी स्ट्रॉ मशरूम उच्च सेल्यूलोज एवं कम लिग्निन युक्त पदार्थों पर अच्छी तरह उगता है। मुख्य सब्सट्रेट: धान का पुआल (Paddy straw) कपास मिल अपशिष्ट (Cotton waste) केले के पत्ते गन्ने का बगास वाटर हायसिंथ कपास अपशिष्ट से उपज 30–40% अधिक प्राप्त होती है। पैडी स्ट्रॉ मशरूम की खेती की तकनीक चरण 1: पुआल की तैयारी हाथ से निकाले गए धान के पुआल के 0.75–1.0 किग्रा के गठ्ठर बनाएँ गठ्ठर की लंबाई लगभग 80–95 सेमी होनी चाहिए चरण 2: भिगोना गठ्ठरों को साफ पानी में 12–18 घंटे तक डुबोकर रखें इससे पुआल नरम हो जाता है और माइसेलियम के लिए अनुकूल बनता है चरण 3: अतिरिक्त पानी निकालना पुआल को बाँस या लकड़ी के प्लेटफॉर्म पर रखकर अतिरिक्त पानी निकालें पुआल बहुत गीला नहीं होना चाहिए चरण 4: बेड बनाना 4 गठ्ठर एक दिशा में रखें 4 गठ्ठर विपरीत दिशा में रखें इस प्रकार 8 गठ्ठरों की एक परत बनाएँ कुल 4 परतें बनती हैं चरण 5: स्पॉनिंग पहली और दूसरी परत के बीच स्पॉन डालें स्पॉन को 5 सेमी की दूरी पर फैलाएँ किनारों से 12–15 सेमी खाली छोड़ें चरण 6: पोषण पूरक प्रति बेड (30–40 किग्रा सूखा पुआल): 500 ग्राम स्पॉन 150 ग्राम अरहर (Red gram) पाउडर चरण 7: ढकना बेड को हल्के से दबाएँ साफ प्लास्टिक शीट से ढक दें तापमान: 30–35°C आर्द्रता: 80–85% चरण 8: शीट हटाना 7–8 दिन बाद प्लास्टिक हटाएँ तापमान 28–32°C बनाए रखें चरण 9: फलन 4–5 दिन में मशरूम निकलने लगते हैं 15–20 दिन तक उत्पादन मिलता है कटाई एवं उपरांत प्रबंधन मशरूम को एग अवस्था में तोड़ें ताज़ा उपयोग के लिए तुरंत बाज़ार भेजें सुखाकर भंडारण भी किया जा सकता है फसल के बाद बचा सब्सट्रेट उत्तम जैव-खाद होता है