परिचय मशरूम मृत कार्बनिक पदार्थो पर उगने वाला एक प्रकार का कवक (फफूँद) होता है जो वर्षा ऋतु में मिट्टी में से या पौधों की सड़ी-गली पत्तियों मे से अपने आप खुम्भ या छतरी नुमा आकार के सफेद, लाल और पीले विभिन्न रंगों के कवक दिखते है। इसी को हम मशरूम कहते हैं, जिसे हमारे पूर्वज आदिकाल से ही खाने के लिए एवं दवा के रूप में प्रयोग करते आ रहे हैं। इनमें अन्य वनस्पति के समान हरित पदार्थ (क्लोरोफिल) नहीं होता। अब इसकी वैज्ञानिक खोजों द्वारा जानकारी हो चुकी है। इस पर पूरे विश्व में अनेक वैज्ञानिक एवं संस्थाएँ कार्य कर रही हैं। मशरूम तकनीकी रूप से वनस्पति कुल में रखा गया है तथा इसे कवक श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। सड़ रहे पदार्थ में से अपना भोजन कुछ महीन धागों जैसे रचना (कवक जाल) द्वारा सोखते हैं यह कवकजाल अधिकतर पदार्थ को ऊपरी सतह पर नजर नही आते। इनमें प्रजनन बीजाणुओं द्वारा होता है और यह बीजाणु इनके फलनकार्प में बनता है। जिसका हम खाने में उपयोग करते हैं, इसे ही मशरूम नाम दिया गया है। इसे खुम्बी, छतरी व कुकुरमुत्ता के नाम से भी जाना जाता है। प्रांतीय भाषाओं में मशरूम का नाम हमारे भारतवर्ष के राज्यों मे इसे लोग अलग-अलग प्रान्तीय भाषाओं के नाम से जानते हैं। जिसका विवरण हैं:- सारणी संख्या 1 : प्रांतीय भाषाओं में मशरूम का नाम क्रं. प्रदेश भाषा प्रान्तीय भाषा के प्रचलित नाम 1 उत्तर प्रदेश हिन्दी कुकुरमुत्ता 2 दिल्ली हिन्दी कुकुरमुत्ता या छतरी 3 हरियाणा हरियाणवी हिन्दी खुम्बी, ढ़ींगरी 4 पंजाब पंजाबी गुच्छी, खुम्भ 5 मध्यप्रदेश हिन्दी कुकुरमुत्ता 6 जम्मू कशमीर कश्मीरी थोर 7 हिमाचल प्रदेश हिमांचली कुल्हेन्द, छिछरू 8 राजस्थान मारवाड़ी ढिंगडी 9 केरल मलयालम अरिकूनु 10 तमिलनाडु तमिल कालन, पाम्बु कालन 11 गुजरात गुजराती बिलावड़ी गुजराती बिलावड़ी 12 महाराष्ट्र मराठी भमोड़ी 13 असम आसामी टिनई, टिटयेम्बू 14 मणिपुर मणिपुरी चेनगुमे, तेकतेकयान 15 उड़ीसा उड़िया गोच्छा, सवामाकबा 16. पश्चिम बंगाल बंगाली बैगर छाता, दूधहाता 17. बिहार हिंदी सॉप की छतरी, कुकुरमुत्ता, भूईकोड़ आदि काल से मशरूम को जंगलों से इकट्ठा कर खाने का बहुत बड़ा प्रचलन रहा है। इन मशरूमों का उत्पादन प्राकृतिक रूप से इतना अधिक होता है कि आदिवासी लोग इसे खाने के साथ-साथ इसे इकट्ठा कर नजदीकी बाजार मे बिक्री के लिए ले जाते हैं। कुछ सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ है कि कई टन मशरूम कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड एवं राजस्थान के पहाड़ाें एवं जंगलों से इकट्ठा कर दिल्ली व अन्य स्थानों को भेजा जाता है। कश्मीर सरकार के वन विभाग की देखरेख में विश्व का सबसे मंहगा गुच्छी मशरूम या मारचेला मशरूम को पहाड़ों से एकत्र कराया जाता है इससे सरकार को काफी आय प्राप्त हो रही है। यह यहाँ के लोगो का रोजगार का एक अच्छा साधन है। इससे लाखों परिवार की रोजी चलती है। वर्तमान में विश्व में मशरूम उत्पादन प्रतिवर्ष 110 लाख टन है और इसमें 10 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से वृद्धि हो रही है। चीन विश्व का अकेले लगभग 65-70 प्रतिशत मशरूम उत्पादन कर रहा है। पिछले कुछ सालों मे विशष्ठ मशरूम उत्पादन (आपस्टर मशरूम, मिल्की मशरूम, शिटाके मशरूम तथा कनपचड़ा मशरूम) में वृद्धि के कारण बटन मशरूम का उत्पादन पूरे विश्व में बढ़ा है। इसके अतिरिक्त औषधीय मशरूम जैसे गैनोडरमा (रिशी), मशरूम के उत्पादन में भी चीन अग्रणी देश है। भारत में मशरूम की स्थिति भारत में सभी प्रकार की जलवायु एवं व्यर्थ कृषि अवशेष पूरे साल उपलब्ध है। इसलिए यहाँ पर पूरे वर्ष मशरूम की खेती की जा सकती है। ऐसा अनुमान है कि हमारे भारत वर्ष में बहुत सारे कृषि अवशेष को या तो जला दिया जाता है या तो सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। यदि इसका कुछ भाग मशरूम उत्पादन में प्रयोग किया जाये तो मशरूम उत्पादन में एक बड़ी क्रांति आ सकती है और किसानों को इससे दुगुनी आमदनी हो सकती है तथा मशरूम उत्पादन के बाद कार्बनिक पदार्थ खेती में भी उर्वरता बढ़ाएगी। यद्यपि भारत में श्वेत बटन मशरूम को परीक्षण के तौर पर मशरूम अनुसंधान प्रयोगशाला सोलन में 1961-62 में किया गया परन्तु इसे सही दिशा 1990 के दशक में मिली क्योंकि यहां पर विदेशी कम्पनियों के माध्यम से बड़ी-बड़ी योजनाएं आई। इन योजनाओं के आने से मशरूम उत्पादन 1985-86 में 4000 टन से बढ़कर 1995-96 में 30-75000 टन प्रतिवर्ष हो गया था। इस समय भारत में मशरूम उत्पादन 125000 टन प्रतिवर्ष के आस पास है। स्त्राेत : भारत में मशरुम उत्पादन, कृषि विज्ञान केंद्र (राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान), उजवा, नई दिल्ली।