कैल्शियम का एक अच्छा एवं सस्ता स्रोत होने के कारण पौधों में अंडों के छिलके के पाउडर का प्रयोग किया जाना चाहिए। उर्वरक और मृदा सुधारक के रूप में इसका उपयोग करने से घरेलू कचरे की महत्वपूर्ण मात्रा को कम करने में काफी मदद मिल सकती है। इसका इस्तेमाल पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण के लिए किया जा सकता है। ये मृदा के संवर्धन और पौधों की वृद्धि में मदद कर सकते हैं। यह खाद कैल्शियम खनिजों के खनन को कम करने में भी सहायता कर सकती है। उपयोगी है अंडे के छिलके से बनी खाद अंडे के छिलके में उपस्थित कैल्शियम कार्बोनेट पौधों की वृद्धि एवं विकास के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व है। यह पौधों की वृद्धि और विकास को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है जैसे: कैल्शियम पौधों के विकास में सहायक होता है। इसकी उपस्थिति में पौधे अन्य पोषक तत्वों को अच्छे से ग्रहण करते हैं और अधिक भोजन का निर्माण करते हैं। कैल्शियम कार्बोनेट कैल्शियम कोशिका भित्ति के निर्माण में भी सहायक होता है। यह छोटे एवं बड़े आकार के कंदों की गुणवत्ता एवं उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक होता है। कैल्शियम कार्बोनेट मृदा संशोधन के लिए एक अच्छी सामग्री है। हमारे देश में अंडे का सेवन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यह प्रोटीन का अच्छा एवं सस्ता स्रोत है। इसे उबालकर खाने के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने के भी उपयोग में लिया जाता है। इसलिए, इसकी मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही । अंडे के अन्दर वाले भाग का ही खाने में इस्तेमाल किया जाता है एवं सफेद रंग वाले ऊपरी भाग (छिलका) को अनुपयोगी समझकर फेंक दिया जाता है जैसे-रसोई के बचे हुए अन्य पदार्थों को फेक दिया जाता है। अंडे का छिलका पर्यावरण को काफी प्रदूषित करता है। इसके सड़ने से बहुत ज्यादा दुर्गंध फैलती है, जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। अंडे के छिलके से निकली दुर्गध मक्खियों को आकर्षित करती है, ये मनुष्य में बहुत सारे रोगों को फैलाने में वाहक का कार्य करती है। अंडे के छिलके का वजन सम्पूर्ण अंडे के वजन का लगभग 11 प्रतिशत होता है। इसमें सबसे अधिक मात्रा में कैल्शियम कार्बोनेट (91 प्रतिशत) पाया जाता है। इसके अतिरिक्त इसमें अन्य पोषक तत्व जैसे-पोटाश, नाइट्रोजन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस एवं सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे-क्लोराइड और जिंक भी पाए जाते हैं। अंडे के छिलके में उपस्थित झिल्ली में 69.2 प्रतिशत प्रोटीन, 2.7 प्रतिशत वसा, 1.5 प्रतिशत नमी और 27.2 प्रतिशत राख भी पाई जाती है। अंडे के छिलके से बनी खाद का प्रयोग अम्लीय मृदा को खेती योग्य बनाने में भी किया जा सकता है। इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम कार्बोनेट अम्लीय मृदा की अम्लता को कम करता है। इससे मृदा में पौधों की वृद्धि एवं विकास के अनुकूल वातावरण बन जाता है। अंडे के छिलके में पौधों के लिए अनिवार्य सूक्ष्म एवं अति सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे-यूरोनिक अम्ल, सियलिक अम्ल तथा अमीनो अम्ल भी पाए जाते हैं। एक अंडे के छिलके से तैयार एक चम्मच पाउडर में 750 से 800 मि.ग्रा. कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व विद्यमान होते हैं। इस प्रकार अंडे के छिलके के पाउडर का प्रयोग कम्पोस्ट एवं गोबर की खाद की गुणवत्ता बढ़ाने में भी किया जा सकता है। यह खाद सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल होती है। सैनिटाइज्ड अंडे के छिलके का इस्तेमाल खाद की खनिज सामग्री को बढ़ाने और पौधों के चारों ओर फैलने के लिए अलग-अलग कीटों जैसे स्लग और घोंघे के लिए किया जा सकता है। इसका उपयोग अंडे के छिलके वाली खाद (तरल अंडों की खाद) तैयार करने के लिए भी किया जा सकता है। पर्णीय छिड़काव (फर्टिगेशन) के रूप में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। अंडे की तरह भी पोषक तत्वों से भरपूर होती है और इसका उपयोग मृदा को उर्वर बनाने के लिए किया जा सकता है। खाद तैयार करने की विधि सर्वप्रथम अंडे के छिलकों को । इकट्ठा करें। इसके बाद उनमें साल्मोनेला । वृद्धि को रोकने के लिए पानी से अच्छी तरह से धोएं। इसके बाद कुछ रकाब के साथ 3-5 दिनों के लिए धूप में सुखाएं। सुखाने से छिलकों के प्रसंस्करण में और । भी मदद मिलती है। पर्याप्त सुखाने के बाद इनका मूसल या मिक्सर ग्राइंडर की सहायता से पाउडर बनाएं। यह पाउडर । घर की बगिया (किचन गार्डन) के साथ-साथ घर में हरियाली के उपयोग करने के लिए पर्याप्त रहता है। बड़ी मात्रा के लिए, बिजली से चलने वाले । ग्राइंडर की मदद से पाउडर बनाया जा सकता है। पीसते समय, नाक और मुंह किसी मास्क या कपड़े से ढककर रखें, । क्योंकि पाउडर से कुछ लोगों में छींक । और खांसी हो सकती है। टूटे हुए अंडे के छिलके का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है कि यह खाद आसानी से तैयार हो जाती है। इसमें अपेक्षाकृत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, परन्तु इसका नुकसान यह भी है कि इसके पोषक तत्वों को निकलने के लिए छिलके का क्षरण थोड़ा धीमा होता है। जिस विधि से चाय बनाई जाती है उसी विधि से अंडे के छिलकों से तरल उर्वरक तैयार किया जाता है। इस उर्वरक को अंडे के छिलकों को पानी के साथ उबालकर बनाया जाता है (गार्डन केयरजोन, 2017)। उबलने की प्रक्रिया अंडे के टुकड़े को तोड़ने और पोषक तत्वों को पानी में छोडने में मदद करती है। इस तरह तैयार तरल उर्वरक का पर्णीय छिड़काव किया जा सकता है। जी एट एल, 2017 के अनुसार इस तरह छिड़काव करने से पोषक तत्व पौधों द्वारा सीधे अवशोषित कर लिए जाते है। अंडे के छिलके से बने चाय के समान उर्वरक का लाभ इसके बनाने की विधि पर भी निर्भर करता है। इस तरह बने उर्वरकों को अधिक समय तक रखने से इनके जमने की आशंका रहती है। इसलिए उर्वरक को तैयार होते ही इस्तेमाल कर लेना चाहिए। इस उर्वरक को अधिक मात्रा में तैयार करने के लिए अंडे के छिलकों को आस-पड़ोस एवं पास के भोजनालयों से संग्रहित किया जा सकता है। मुर्गीपालन करने वाले किसान या बड़े पोल्ट्री फार्म, जहाँ अधिक मात्रा में चूजों का उत्पादन किया जाता है, वहां अंडे सेने की प्रक्रिया के बाद अंडे के छिलके फेंक दिये जाते हैं। ऐसे स्थानों से छिलके सेने की प्रक्रिया के बाद अंडे के छिलके फेंक दिये जाते हैं। ऐसे स्थानों से छिलके एकत्रित किए जा सकते हैं। प्रयोग करने का तरीका अंडे के छिलके के पाउडर को ठोस (पाउडर) रूप में सीधे मृदा में प्रयोग किया जा सकता है या पानी (तरल रूप) के साथ घोल बनाकर पीय छिड़काव किया जा सकता है। इसका उपयोग रसोई की बगिया (किचन गार्डन) तथा खेतों में भी किया जा सकता है। अंडे के छिलके में पोषक तत्वों की मात्रा सारणीः अंडे के छिलके में पोषक तत्वों को मात्रा क्र.सं पोषक तत्व मात्रा 1. नाइट्रोजन 0.04 प्रतिशत 2. फॉस्फोरस 4.5 पीपीएम 3. पोटेशियम 116.8 पीपीएम 4. कैल्शियम 73.8 पीपीएम 5. क्लोराइड 64.8 पीपीएम 6. गंधक 10 पीपीएम 7. मैग्नीशियम 23.5 पीपीएम स्त्राेत : खेती पत्रिका(आईसीएआर), मेहजबी, मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विज्ञान विभाग, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर 813210 (बिहार), अनूप कुमार द्विवेदी-शोध छात्र, सस्य विज्ञान विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी-221005 (उत्तर प्रदेश) और और कमलेश मीन- विषय वस्तु विशेषज्ञ, सस्य विज्ञान, कृषि विज्ञान केन्द्र(भाकृअनुप-भारतीय सब्बी अनुसंधान संस्थान) मल्हना, देवरिया-274506 (उत्तर प्रदेश)।