जैविक खेती मिशन कार्यक्षेत्र प्रदेश के 5 जिला- रायपुर, बालोद, रायगढ़, कोरिया एवं दंतेवाड़ा उद्देश्य राज्य में जैविक खेती द्वारा लागत में कमी एवं टिकाऊ उत्पादकता प्राप्त करना, प्रमाणित जैविक खेती को बढ़ावा देना, जैविक उत्पादन प्रणाली में कृषकों का क्षमता विकास। हितग्राही की पात्रता सभी श्रेणी के कृषक योजना में लाभान्वित किये जाते हैं। मिलने वाला लाभ जैविक कृषकों का 3 दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण रू. 750/- प्रति प्रशिक्षणार्थी प्रति दिन। जैविक कृषकों का 2 दिवसीय प्रशिक्षण रू. 13000/- प्रति प्रशिक्षण। जैविक कृषकों का राज्य के बाहर शैक्षणिक भ्रमण रू. 600/- प्रति कृषक प्रति दिन। जिला स्तरीय जैविक किसान मेला का अयोजन रू. 2.00 लाख प्रति जिला। राज्य स्तरीय जैविक किसान मेला/सम्मेलन रू. 5.00 लाख। जैविक कृषि तकनीकी पर फसल प्रदर्शन रू. 10,000/- प्रति प्रदर्शन प्रति एकड़। जैविक क्षेत्रों के सामुहिक जैविक प्रमाणीकरण हेतु अनुदान रू. 10,000/- प्रति हे. (3 वर्षो में) जैविक खाद/कम्पोस्ट उत्पादन इकाई की स्थापना (अ) नाडेप टांका लागत का 50 प्रतिशत् या रू. 4000/- जो भी कम हो। (ब) वर्मी कम्पोष्ट लागत का 50 प्रतिशत् या रू. 8000/- जो भी कम हो। मिट्टी परीक्षण कार्यक्षेत्र राज्य के समस्त जिले। उद्देश्य प्रदेश के कृषकों के खेतों के मिट्टी नमूनों की जांच कर मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं संतुलित उर्वरक उपयोग हेतु सुझाव। विभागीय मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला स्थायी प्रयोगशाला :- जिला- रायपुर, धमतरी, दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर, जांजगीर, जगदलपुर। चलित प्रयोगशाला :- जिला- कबीरधाम, कोरबा, कोरिया, कांकेर। हितग्राही की पात्रता सभी श्रेणी के कृषक योजना में लाभान्वित किये जाते हैं। मिलने वाला लाभ शासन द्वारा मिट्टी परीक्षण (नत्रजन, स्फुर, पोटाश एवं पी.एच. की जांच) के लिये रू. 2/- एवं सूक्ष्म तत्वों की जांच हेतु रू. 25/- प्रति नमूना शुल्क निर्धारित किया गया है। स्त्रोत : किसान पोर्टल,भारत सरकार